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रितिक का बीपीएल कार्ड बनाने पर ग्रामीणों ने आभार जताया
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रीतिक के साथ डीसी यशेंद्र सिंह
- फोटो : Rewari
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जाटूसाना निवासी नाबालिग रितिक का बीपीएल कार्ड बनने पर जाटूसाना गांव के लोगों और जिला पार्षदों ने बुधवार को डीसी यशेन्द्र सिंह से मिलकर आभार प्रकट किया है। डीसी यशेन्द्र सिंह ने नाबालिग रितिक को मुलाकात के दौरान जूस भी पिलाया।
डीसी यशेन्द्र ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि गत 13 जुलाई को रितिक का यह मामला संज्ञान में आया था, जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए इस बच्चे को बुलाकर राशन कार्ड की कार्रवाई को पूरा करवाया और इसके राशनकार्ड बनाने को लेकर आ रही तकनीकी दिक्कतों को लेकर उन्होंने मुख्यालय पर उच्च अधिकारियों से बात की। मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए स्पेशल केस बनाकर संबंधित विभाग को तुरंत प्रभाव से कार्रवाई कर राशन कार्ड बनाने के आदेश दिए। यह हरियाणा का पहला केस है कि किसी नाबालिग का विशेष बीपीएल कार्ड बना है। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि रितिक के जो भी अधिकार हैं वे उन्हें मिलते रहेंगे। उसकी शिक्षा के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को विशेष ध्यान रखने को कहा। रितिक की वस्तुस्थिति गांव जाटूसाना के सरकारी स्कूल में कक्षा सातवीं में पढ़ रहा छात्र रितिक जब वह 5 साल का हुआ मां उसे छोड़कर कहीं चली गईं। जब वह 9 साल का हुआ पिता क्षय रोग के कारण चल बसे। दादा- दादी जिंदा हैं, लेकिन वे खुद ही इतने बीमार रहते हैं कि उन्हें ही सहारा चाहिए। दो चाचा है जो मजदूरी करते हैं। वे खुद अपना पेट भर ले तो बड़ी बात है।
रितिक की दिनचर्या यह है कि वह घर में अकेला रहता है। तंगी के हालत के चलते उसके पिता 8 साल पहले गांव छोड़कर मजदूरी करने लग गया था। उनके पीछे से गांव में बीपीएल सर्वे की टीम आईं और उसके कार्ड को रद्द कर उन्हें सरकार से मिले 100 गज के प्लाट को रद्द करके चली गईं थी। उसके पिता 4 दिसंबर 2012 को गांव वापस आया नया एपीएल राशनकार्ड बनवाया, जिससे उनका किसी तरह उसका गुजारा हो जाता था। 2016 में टीबी की बीमारी के चलते उसके पिता की मृत्यु हो गई। राशनकार्ड को दुरुस्त कराने के लिए रितिक किसी के साथ राशनकार्ड में अपने पिता का नाम कटवाने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पहुंचा। यहां तकनीकी दिक्कतों की वजह से उसका कार्ड बनना संभव नहीं था, जो कि अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से बन गया है।
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इस अवसर पर जिला पार्षद अमित यादव, नीतू चौधरी व अन्य ग्रामीण भी उपस्थित थे।
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डीसी यशेन्द्र ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि गत 13 जुलाई को रितिक का यह मामला संज्ञान में आया था, जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए इस बच्चे को बुलाकर राशन कार्ड की कार्रवाई को पूरा करवाया और इसके राशनकार्ड बनाने को लेकर आ रही तकनीकी दिक्कतों को लेकर उन्होंने मुख्यालय पर उच्च अधिकारियों से बात की। मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए स्पेशल केस बनाकर संबंधित विभाग को तुरंत प्रभाव से कार्रवाई कर राशन कार्ड बनाने के आदेश दिए। यह हरियाणा का पहला केस है कि किसी नाबालिग का विशेष बीपीएल कार्ड बना है। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि रितिक के जो भी अधिकार हैं वे उन्हें मिलते रहेंगे। उसकी शिक्षा के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को विशेष ध्यान रखने को कहा। रितिक की वस्तुस्थिति गांव जाटूसाना के सरकारी स्कूल में कक्षा सातवीं में पढ़ रहा छात्र रितिक जब वह 5 साल का हुआ मां उसे छोड़कर कहीं चली गईं। जब वह 9 साल का हुआ पिता क्षय रोग के कारण चल बसे। दादा- दादी जिंदा हैं, लेकिन वे खुद ही इतने बीमार रहते हैं कि उन्हें ही सहारा चाहिए। दो चाचा है जो मजदूरी करते हैं। वे खुद अपना पेट भर ले तो बड़ी बात है।
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रितिक की दिनचर्या यह है कि वह घर में अकेला रहता है। तंगी के हालत के चलते उसके पिता 8 साल पहले गांव छोड़कर मजदूरी करने लग गया था। उनके पीछे से गांव में बीपीएल सर्वे की टीम आईं और उसके कार्ड को रद्द कर उन्हें सरकार से मिले 100 गज के प्लाट को रद्द करके चली गईं थी। उसके पिता 4 दिसंबर 2012 को गांव वापस आया नया एपीएल राशनकार्ड बनवाया, जिससे उनका किसी तरह उसका गुजारा हो जाता था। 2016 में टीबी की बीमारी के चलते उसके पिता की मृत्यु हो गई। राशनकार्ड को दुरुस्त कराने के लिए रितिक किसी के साथ राशनकार्ड में अपने पिता का नाम कटवाने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पहुंचा। यहां तकनीकी दिक्कतों की वजह से उसका कार्ड बनना संभव नहीं था, जो कि अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से बन गया है।
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इस अवसर पर जिला पार्षद अमित यादव, नीतू चौधरी व अन्य ग्रामीण भी उपस्थित थे।