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ईएमटी के अभाव में शोपीस बनीं एंबुलेंस
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Nov 2016 11:29 PM IST
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शोपीस बनीं एंबुलेंस
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सरकार ने मरीजों की सुविधा के लिए समय-समय पर एंबुलेंस तो मुहैया करा दी, लेकिन एंबुलेंस के संचालन के लिए जरूरी चालक एवं ईएमटी के नहीं होने से ये एंबुलेंस शोपीस बनकर रह गई हैं। ऐसे में इनका पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा। वहीं मरीजों की जान भी आफत में रहती है।
जिले के एक नागरिक अस्पताल, पांच सीएचसी, 13 पीएचसी एवं 113 सब सेंटर्स के लिए 16 एंबुलेंस तैनात हैं। नियमानुसार एक एंबुलेंस पर तीन ईएमटी की आवश्यकता होती है। ईएमटी गंभीर घायल को प्राथमिक उपचार देता है। जिससे अस्पताल तक पहुंचने तक मरीज की जान बचाई जा सके। लेकिन इन 16 एंबुलेंस पर केवल 28 ईएमटी ही तैनात हैं। जबकि नियम से 48 की जरूरत है। ऐसे में इन एंबुलेंस पर 20 ईएमटी चाहिए। शिफ्टों के ड्यूटी होने के चलते इन एंबुलेंस पर ईएमटी पूरी नहीं हो पाते। जिससे मरीजों की जान को खतरा बन जाता है।
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नाहड़ में घायल हुए तो जिंदगी राम भरोसे
यदि नाहड़ ब्लॉक में कोई दुर्घटना हो जाए तो मरीज की जान राम भरोसे है। यहां आने वाली सरकारी एंबुलेंस में ईएमटी ही नहीं है। ऐसे में प्राथमिक उपचार नहीं मिलने से मरीज की जान तक जा सकती है। इसके के साथ बावल में दो धारूहेड़ा में एक एवं कोसली में तीन ईएमटी तैनात हैं।
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बिना ड्राइवर खड़ी रहती हैं एंबुलेंस
अभी जिले की सड़कों पर 16 एंबुलेंस दौड़ रही हैं। इन एंबुलेस को चलाने के लिए विभाग को 48 ड्राइवरों की जरूरत है। जबकि जिले में केवल 38 ड्राइवर ही तैनात हैं। ऐसे में आपात स्थिति में भी ड्राइवर के अभाव में एंबुलेंस महज सफेद हाथी बनकर रह जाती है। वीरवार को ड्राइवर के अभाव में दो एंबुलेंस नागरिक अस्पताल में खड़ी रही। लेकिन इनको दिन भर ड्राइवर ही नसीब नहीं हुआ। बाकी दिनों में भी हालात कुछ इस तरह के ही रहते हैं।
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निजी एंबुलेंसों की चांदी
सरकारी एंबुलेंस की बदहाली का सबसे बड़ा लाभ निजी एंबुलेंस वाले उठा रहे हैं। समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर मजबूरन लोगों को निजी एंबुलेंस बुलानी पड़ती है। पिछले दिनों नागरिक अस्पताल में एक प्रसूता को तीन घंटे तक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हुई। रोहतक पहुंचने तक बहुत अधिक रक्तस्त्राव हो चुका था। जिससे उसकी बाद में मौत हो गई। हालांकि परिजनों की शिकायत पर मामले की जांच भी चल रही है। यह इकलौता मामला नहीं था। इससे पहले भी घायलों एवं प्रसूताओं को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण होने वाले हादसों के चलते प्रदर्शन तक हो चुके हैं। लेकिन हमेशा नागरिक अस्पताल ने जांच बिठाई। जिसका कभी परिणाम ही नहीं आ सका।
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भर्ती पर रोक से बनी समस्या
जिलेभर में ईएमटी और एंबुलेंस चालक एनएचएम के तहत भर्ती किए गए हैं। लेकिन एक साल से भी अधिक समय से एनएचएम में नई भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में समय-समय पर अस्पताल में एंबुलेंस तो आती रहीं, लेकिन चालक एवं ईएमटी नहीं आए। एनएचएम के जिला नोडल अधिकारी डा. लालसिंह ने बताया कि एनएचएम में भर्ती के लिए कई बार सरकार से डिमांड भी की गई। लेकिन सरकार ने कोई इजाजत नहीं दी। इन एंबुलेंस के सही संचालन के लिए चालक एवं ईएमटी की बेहद जरूरत है।
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जिले में ईएमटी की 32 पोस्ट प्रस्तावित हैं। जिनमें से 28 पर कर्मचारी तैनात हैं। लेकिन हाल के दिनों में एंबुलेंस की संख्या बढ़ने के कारण ईएमटी की भी ज्यादा जरूरत है। खाली पोस्ट को भरने के लिए एवं पोस्ट बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इन पोस्ट को भर दिया जाएगा।
-डॉ. बीके राजौरा, सीएमओ, रेवाड़ी।
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जिले के एक नागरिक अस्पताल, पांच सीएचसी, 13 पीएचसी एवं 113 सब सेंटर्स के लिए 16 एंबुलेंस तैनात हैं। नियमानुसार एक एंबुलेंस पर तीन ईएमटी की आवश्यकता होती है। ईएमटी गंभीर घायल को प्राथमिक उपचार देता है। जिससे अस्पताल तक पहुंचने तक मरीज की जान बचाई जा सके। लेकिन इन 16 एंबुलेंस पर केवल 28 ईएमटी ही तैनात हैं। जबकि नियम से 48 की जरूरत है। ऐसे में इन एंबुलेंस पर 20 ईएमटी चाहिए। शिफ्टों के ड्यूटी होने के चलते इन एंबुलेंस पर ईएमटी पूरी नहीं हो पाते। जिससे मरीजों की जान को खतरा बन जाता है।
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नाहड़ में घायल हुए तो जिंदगी राम भरोसे
यदि नाहड़ ब्लॉक में कोई दुर्घटना हो जाए तो मरीज की जान राम भरोसे है। यहां आने वाली सरकारी एंबुलेंस में ईएमटी ही नहीं है। ऐसे में प्राथमिक उपचार नहीं मिलने से मरीज की जान तक जा सकती है। इसके के साथ बावल में दो धारूहेड़ा में एक एवं कोसली में तीन ईएमटी तैनात हैं।
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बिना ड्राइवर खड़ी रहती हैं एंबुलेंस
अभी जिले की सड़कों पर 16 एंबुलेंस दौड़ रही हैं। इन एंबुलेस को चलाने के लिए विभाग को 48 ड्राइवरों की जरूरत है। जबकि जिले में केवल 38 ड्राइवर ही तैनात हैं। ऐसे में आपात स्थिति में भी ड्राइवर के अभाव में एंबुलेंस महज सफेद हाथी बनकर रह जाती है। वीरवार को ड्राइवर के अभाव में दो एंबुलेंस नागरिक अस्पताल में खड़ी रही। लेकिन इनको दिन भर ड्राइवर ही नसीब नहीं हुआ। बाकी दिनों में भी हालात कुछ इस तरह के ही रहते हैं।
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निजी एंबुलेंसों की चांदी
सरकारी एंबुलेंस की बदहाली का सबसे बड़ा लाभ निजी एंबुलेंस वाले उठा रहे हैं। समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर मजबूरन लोगों को निजी एंबुलेंस बुलानी पड़ती है। पिछले दिनों नागरिक अस्पताल में एक प्रसूता को तीन घंटे तक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हुई। रोहतक पहुंचने तक बहुत अधिक रक्तस्त्राव हो चुका था। जिससे उसकी बाद में मौत हो गई। हालांकि परिजनों की शिकायत पर मामले की जांच भी चल रही है। यह इकलौता मामला नहीं था। इससे पहले भी घायलों एवं प्रसूताओं को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण होने वाले हादसों के चलते प्रदर्शन तक हो चुके हैं। लेकिन हमेशा नागरिक अस्पताल ने जांच बिठाई। जिसका कभी परिणाम ही नहीं आ सका।
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भर्ती पर रोक से बनी समस्या
जिलेभर में ईएमटी और एंबुलेंस चालक एनएचएम के तहत भर्ती किए गए हैं। लेकिन एक साल से भी अधिक समय से एनएचएम में नई भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में समय-समय पर अस्पताल में एंबुलेंस तो आती रहीं, लेकिन चालक एवं ईएमटी नहीं आए। एनएचएम के जिला नोडल अधिकारी डा. लालसिंह ने बताया कि एनएचएम में भर्ती के लिए कई बार सरकार से डिमांड भी की गई। लेकिन सरकार ने कोई इजाजत नहीं दी। इन एंबुलेंस के सही संचालन के लिए चालक एवं ईएमटी की बेहद जरूरत है।
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जिले में ईएमटी की 32 पोस्ट प्रस्तावित हैं। जिनमें से 28 पर कर्मचारी तैनात हैं। लेकिन हाल के दिनों में एंबुलेंस की संख्या बढ़ने के कारण ईएमटी की भी ज्यादा जरूरत है। खाली पोस्ट को भरने के लिए एवं पोस्ट बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इन पोस्ट को भर दिया जाएगा।
-डॉ. बीके राजौरा, सीएमओ, रेवाड़ी।