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Employees need to be technically proficient for cyber fraud investigation: SP
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साइबर ठगी जांच के लिए कर्मचारियों को तकनीकी रूप से दक्ष होना जरूरी : एसपी
रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 26 Mar 2022 10:51 PM IST
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जांच के बेहतर तरीकों की जानकारी देते एक्सपर्ट।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। दक्षिण रेंज के साइबर थाना एवं सभी थानों में स्थापित साइबर हेल्प डेस्क पर कार्यरत पुलिस कर्मचारियों के लिए जिला सचिवालय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में साइबर एक्सपर्ट ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साइबर ठगी जांच के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के तरीकों में लगातार बदलाव हो रहा है। इनकी जांच करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तकनीकी रूप से दक्ष होना जरूरी है। ताकि मामलों को तेजी से निपटाएंगे। इसलिए सबसे पहले प्रयास यह होना चाहिए कि ट्रांजेक्शन की डिटेल्स लेकर बैंक के नोडल अधिकारियों से सामंजस्य स्थापित कर खाते को फ्रीज कराना सबसे जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि कार्यशाला के आयोजन का मकसद यही है कि बदले तौर-तरीकों के अनुसार उसी तरह जांच को आगे बढ़ाना है। ताकि पंजीकृत मामलों का निस्तारण करने के साथ खाते में गया पैसा वापस लाया जा सके। इस अवसर पर साइबर एक्सपर्ट भव्य खन्ना ने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामले में पहली जांच जिस यूपीआईडी से ट्रांजेक्शन हुई उसके बैंक अथवा वॉलेट का पता करके तुरंत प्रभाव से खाता फ्रीज कराना चाहिए। तत्पश्चात जिस खाते में पैसा गया है, उसकी भी तकनीकी माध्यम से जानकारी लेकर उस खाते को भी बैंक के साथ जानकारी शेयर करके ट्रांजेक्शन को अगले खाते में जाने से रोकना है। शुरूआत के दो स्टेप पर हम जितना जल्दी कार्रवाई करेंगे उतने पैसे वापसी के चांस बढ़ जाते हैं। मामलों में जितनी अधिक देरी की जाएगी उससे ट्रांजेक्शन भी उतनी ही बढ़ जाएगी। अन्य एक्सपर्ट योगेश खंडूजा, विनायक एवं प्रदीप कुमार ने भी पुलिस अधिकारियों को जांच में उपयोग आने वाली नवीनतम तकनीकी के साथ साइबर जांच से जुड़े सवालों का समाधान किया। इस अवसर पर उप पुलिस अधीक्षक अमित भाटिया, एएसपी (यूटी) जसलीन कौर के साथ दक्षिण रेंज साइबर थाना टीम तथा दक्षिण रेंज के सभी थानों की साइबर हेल्पडेस्क के सदस्य मौजूद रहे।
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