फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   e-trading, former, buisnesman, grain, grain mandi,

ई-ट्रेडिंग : खुश किसान आढ़तियों, व्यापारियों से निराश

Wed, 28 Sep 2016 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Wed, 28 Sep 2016 12:26 AM IST
विज्ञापन
e-trading, former, buisnesman, grain, grain mandi,
ई-ट्रेडिंग को बढ़ावा
एक अक्तूबर से शुरू होने वाली ई-ट्रेडिंग का आढ़तियों व व्यापारियों की तरफ से विरोध करने के बाद सरकार से मिली एक वर्ष की मोहलत से किसान गफलत में हैं। किसानों को इस सेवा के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार था लेकिन ई-ट्रेडिंग के प्रति आढ़तियों और व्यापारियों का रवैया किसानों को रास नहीं आ रहा है। किसानों का कहना है जिला प्रशासन की तरफ से चलाए जा रहे प्रत्येक ई-ट्रेडिंग जागरूकता कार्यक्रमों में संयुक्त रूप से व्यापारियों और किसानों ने दोनों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया है, बावजूद इसके विरोध के सुर उठना समझ से परे है।
विज्ञापन

22 सितंबर हरियाणा आढ़ती संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर की मंडियों में हड़ताल की गई थी, जिसका असर यह हुआ कि सीएम मनोहर लाल खट्टर ने आढ़तियों को एक वर्ष तक दोनों विकल्पों अर्थात ई-ट्रेडिंग और पुराने सिस्टम दोनों के अनुसार अनाज की खरीद करने की बात कही। हालांकि जिला प्रशासन ने इस फैसले की आधिकारिक सूचना नहीं मिलने की बात कह रहा है।
विज्ञापन


किसान चाहते हैं ई-ट्रेडिंग
सही मायनों में आढ़तियों से कम पढ़ा-लिखा किसान वर्ग ई-ट्रेडिंग को लेकर अधिक जिज्ञासु है लेकिन व्यापारी वर्ग नहीं।  किसानों का कहना है कि यह सेवा न केवल उनके लिए सुविधाजनक है, बल्कि ट्रेडिंग में पारदर्शिता लाने और देश के विकास में सहायक सिद्ध होगी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से चलाए जा रहे ई-ट्रेडिंग कैंपों में जिले के किसान बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आढ़तियों और व्यापारियों के रवैये को देखकर किसान मायूस हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


टैक्स से जुड़ा है ई-ट्रेडिंग  
व्यापार विशेषज्ञों की माने तो ई-ट्रेडिंग से न केवल ग्रेन मार्केट में धांधलियां रुकेंगी, बल्कि सरकारी राजस्व में भी इजाफा होगा। मैन्युल सिस्टम में मंडी में आने वाले अनाज का पूर्ण रिकॉर्ड मेनटेन नहीं किया जाता है। आधी से ज्यादा आवक बिना रिकॉर्ड और बिलिंग इधर से उधर हो जाती है। लेकिन ई-ट्रेडिंग लागू होने के बाद गेट में एंटर होते ही गेट पास बनेगा तथा माल बिकते ही जे फॉर्म के साथ बिलिंग होगी। वर्तमान में 5 से 6 हजार बोरी बाजरा मंडी पहुंच रहा है, लेकिन यह आंकड़ा वास्तविकता से मेल नहीं खाता, क्योंकि मंडी में एंटर होने वाली प्रत्येक अनाज को रिकॉर्ड में नहीं दिखाया जाता है।

मार्केट फीस और वैट में गड़बड़झाला  
सूत्रों की माने तो प्रदेशभर की अनाज मंडियों में अनाज पर मार्केट फीस और वैट को लेकर भारी धांधलियां है, जिसका उपाय केवल ई-ट्रेडिंग है। व्यापारियों को कुल अनाज की खरीद पर मार्केट कमेटी को 1 प्रतिशत मार्केट फीस देनी होती है, लेकिन बड़े पैमाने पर मार्केट फीस की रकम सरकारी खजाने तक पहुंचने की बजाय मंडी प्रशासन और संबंधित व्यापारी के जेब में पहुंचती है। दूसरी और बड़े स्तर पर अनाज पर लगने वाले वैट को भी व्यापारी आपसी मिलीभगत से बचा लेते हैं। ऐसे में ई-ट्रेडिंग ही इसका उपाय है, लेकिन विरोध के सुर उठना, ई-ट्रेडिंग के भविष्य पर प्रश्रचिन्ह खड़े करते हैं।
-----------
वर्जन:
हम निरंतर व्यापारियों व किसानो को ई-ट्रेडिंग के प्रति शिविरों के माध्यम से जागरूक कर रहे हैं। सीएम द्वारा एक वर्ष तक दोनों विकल्पों के साथ व्यापार करने को लेकर हमारे पास कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। हम उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशानुसार किसानों को ई-ट्रेडिंग से जुड़ने व लाभों के बारे में बता रहे हैं।
- प्रेमपाल, डीएफएससी, रेवाड़ी
-------

ई-ट्रेडिंग का कानसेप्ट अभी सरकार की समझ से ही परे है। यह सिस्टम व्यापारियों व किसानों दोनों के लिए जटिल है। हम किसानों को एडवांस में भी पैसा देते हैं और कई बार फसल से अधिक भी पैसा देते हैं। यह सिस्टम व्यवहारिक पटल पर कामयाब नहीं है। मैन्युल सिस्टम से अनाज की खरीद-फरोख्त का कार्य व्यापारियों व किसानों दोनों के समझ में आता है।
- राधेश्याम मित्तल, प्रधान, व्यापार मंडल
--------
ई-ट्रेडिंग का सारा काम कंप्यूटर द्वारा किया जाएगा, लेकिन अनाज मंडी में अभी यह कार्य मैन्युल सिस्टम से हो रहा है। पुराने आढ़ती-व्यापारी अपने देसी तरीके से बेहतर हिसाब रखते हैं, जो किसानों को भी समझ में आता है। सरकार इस सिस्टम को लागू करने के लिए निरंतर जागरूकता फैलाए और एक आसान तरीके के साथ ई-ट्रेडिंग को आढ़तियों व किसानों के समक्ष रखे, ताकि उनका काम नए सिस्टम से प्रभावित होने की बजाय और आसान हो।  - दीपक मंगला, प्रधान, वेलफेयर अनाज मंडी
----------
ई-ट्रेडिंग से अनाज मंडी में व्यापारियों की धांधली रुकेगी। जो टैक्स का पैसा व्यापारी बचाते हैं, वह सीधे सरकार के खाते में जाएगा, वहीं किसानों को भी उनके खाते में पैसा सीधे मिल पाएगा। - धर्मपाल, किसान, आराम नगर
------------
कई व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए सस्ते दामों पर किसान का अनाज खरीद कर स्टॉक कर लेते हैं और बाद में समर्थन मूल्य व दाम बढ़ने पर मोटा मुनाफा कमाते हैं, लेकिन ऑनलाइन होने से किसान को अनाज की पूरी कीमत मिलेगी। - सुभाष, आराम नगर

----------
व्यापारी ई-ट्रेडिंग का विरोध इसलिए कर रहे हैं कि उन्हें फिर मलाई खाने को नहीं मिलेगी। ई-ट्रेडिंग से खरीद होने पर व्यापारी टैक्स चोरी नहीं कर पाएंगे। ऐसे में व्यापारी इसका समर्थन कैसे कर सकते हैं। - फूला सिंह, बव्वा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed