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Rewari News: संसार के वास्तविक स्वरूप का किया वर्णन
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श्रीकृष्ण भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी युगल शरण से बातचीत करते भक्तजन। स्रोत : संस्था
रेवाड़ी। ब्रज गोपिका सेवा मिशन की तरफ से श्रीकृष्ण भवन में आयोजित 16 दिवसीय प्रवचन शृंखला के 9वें दिन स्वामी युगल शरण ने संसार के वास्तविक स्वरूप का वर्णन किया। बताया कि आत्मा को सुख देने से हमको अनंत आनंद मिलेगा। पहले तो ये दृढ़ होना चाहिए कि हम आत्मा है।
जब हम अपने को आत्मा मानेंगे तभी फिर आत्मा को सुखी बनाने का लक्ष्य बनाएंगे। हम जो आनंद चाहते हैं, वह शरीर का विषय नहीं, आत्मा का विषय है। इसलिए जितना भी भौतिक पदार्थ दे दीजिए, इससे आत्मा सुखी नहीं होगा। क्योंकि आत्मा भौतिक विषय नहीं, वह दिव्य है।
भगवान को प्राप्त करने के लिए भगवान को जानना होगा और भगवान को जानने के लिए संसार को जानना होगा। भगवान को कैसे जानेंगे, जब हमारे भीतर अटूट श्रद्धा होगी। श्रद्धा की उत्पत्ति कैसे होगी। जब संसार से वैराग्य होगा और संसार से वैराग्य कब होगा।
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जब हमको संसार का परिज्ञान हो जाएगा, जब हम संसार को जान लेंगे, तभी हम संसार से विरक्त होंगे। तभी हमारा मन भगवान में लगेगा, तभी भगवान के प्रति श्रद्धा होगी, तभी हम उसको जानेंगे। इसलिए संसार को जानना बहुत आवश्यक है।
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जब हम अपने को आत्मा मानेंगे तभी फिर आत्मा को सुखी बनाने का लक्ष्य बनाएंगे। हम जो आनंद चाहते हैं, वह शरीर का विषय नहीं, आत्मा का विषय है। इसलिए जितना भी भौतिक पदार्थ दे दीजिए, इससे आत्मा सुखी नहीं होगा। क्योंकि आत्मा भौतिक विषय नहीं, वह दिव्य है।
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भगवान को प्राप्त करने के लिए भगवान को जानना होगा और भगवान को जानने के लिए संसार को जानना होगा। भगवान को कैसे जानेंगे, जब हमारे भीतर अटूट श्रद्धा होगी। श्रद्धा की उत्पत्ति कैसे होगी। जब संसार से वैराग्य होगा और संसार से वैराग्य कब होगा।
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