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Rewari News: तपन बढ़ते ही मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ी, कारोबार बढ़ने की उम्मीद
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मटके की खरीदारी करते ग्राहक। संवाद
रेवाड़ी। जिले में गर्मी के चलते मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ गई है। बाजारों में इन दिनों मटकों की बिक्री में उछाल देखने को मिल रहा है और कुम्हारों के चेहरे खिले हुए हैं। मटकों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बाजार में साधारण मटके 50 से 100 रुपये, डिजाइनर मटके 100 से 400 रुपये, सुराही 50 से 300 रुपये और टोटी लगे बड़े मटके 200 से 500 रुपये तक बिक रहे हैं। कुतुबपुर निवासी कुम्हार उमेद ने बताया कि इस बार बिक्री में करीब 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि लोग मिट्टी के मटकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं, कुम्हार सुरेश का कहना है कि इस बार टोटी लगे मटकों की काफी मांग है, क्योंकि ये उपयोग में आसान होने के साथ-साथ दिखने में भी आकर्षक हैं। रोजाना 10 से 15 पीस बिक रहे हैं। ऑफिस में काफी कारगार साबित हो रहे हैं। बावल मार्ग पर दुकान लगाने वाले कुम्हार नितिन और सविता देवी ने बताया कि मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। कई लोग फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी से बचते हुए मटके का पानी पीना पसंद कर रहे हैं। इससे न केवल सेहत बेहतर रहती है बल्कि पारंपरिक कुम्हारी कला को भी नया जीवन मिल रहा है।
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अप्रैल से अगस्त तक चलता है मटकों का कारोबार
जिले में मटकों का कारोबार हर साल अप्रैल से शुरू होकर अगस्त तक चलता है। इस दौरान सबसे ज्यादा बिक्री मई और जून में होती है, जब गर्मी अपने चरम पर रहती है। जुलाई में बारिश का दौर शुरू होने से बिक्री में थोड़ी कमी आ जाती है, लेकिन इसके बावजूद मटकों की मांग बनी रहती है और अगस्त तक यह कारोबार जारी रहता है। गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग के चलते इस समय कुम्हारों के काम में तेजी देखी जाती है और उन्हें अच्छा लाभ भी मिलता है।
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बाजार में मिट्टी के मटकों की कीमतें
साधारण छोटे मटके 50 रुपये से 100 रुपये तक
डिजाइनर मटके 100 रुपये से 500 रुपये तक
सुराही 50 रुपये से 300 रुपये तक
टोटी लगे बड़े मटके 200 रुपये से 500 रुपये तक
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बाजार में साधारण मटके 50 से 100 रुपये, डिजाइनर मटके 100 से 400 रुपये, सुराही 50 से 300 रुपये और टोटी लगे बड़े मटके 200 से 500 रुपये तक बिक रहे हैं। कुतुबपुर निवासी कुम्हार उमेद ने बताया कि इस बार बिक्री में करीब 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
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उन्होंने कहा कि लोग मिट्टी के मटकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं, कुम्हार सुरेश का कहना है कि इस बार टोटी लगे मटकों की काफी मांग है, क्योंकि ये उपयोग में आसान होने के साथ-साथ दिखने में भी आकर्षक हैं। रोजाना 10 से 15 पीस बिक रहे हैं। ऑफिस में काफी कारगार साबित हो रहे हैं। बावल मार्ग पर दुकान लगाने वाले कुम्हार नितिन और सविता देवी ने बताया कि मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। कई लोग फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी से बचते हुए मटके का पानी पीना पसंद कर रहे हैं। इससे न केवल सेहत बेहतर रहती है बल्कि पारंपरिक कुम्हारी कला को भी नया जीवन मिल रहा है।
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अप्रैल से अगस्त तक चलता है मटकों का कारोबार
जिले में मटकों का कारोबार हर साल अप्रैल से शुरू होकर अगस्त तक चलता है। इस दौरान सबसे ज्यादा बिक्री मई और जून में होती है, जब गर्मी अपने चरम पर रहती है। जुलाई में बारिश का दौर शुरू होने से बिक्री में थोड़ी कमी आ जाती है, लेकिन इसके बावजूद मटकों की मांग बनी रहती है और अगस्त तक यह कारोबार जारी रहता है। गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग के चलते इस समय कुम्हारों के काम में तेजी देखी जाती है और उन्हें अच्छा लाभ भी मिलता है।
बाजार में मिट्टी के मटकों की कीमतें
साधारण छोटे मटके 50 रुपये से 100 रुपये तक
डिजाइनर मटके 100 रुपये से 500 रुपये तक
सुराही 50 रुपये से 300 रुपये तक
टोटी लगे बड़े मटके 200 रुपये से 500 रुपये तक