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अहीरवाल के लंदन में हर दिन एक गाय की तस्करी!.
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:50 AM IST
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कभी पीतल नगरी का खिताब हासिल करने वाली रेवाड़ी पिछले कुछ समय से गो या अन्य दुधारू पशुओं की तस्करी का गढ़ बनता जा रहा है। जिला पुलिस ने पिछले साल 2016 में 208 गोवंशों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया है। यानी हर दूसरे दिन में एक गोवंश तस्करों के चंगुल से बचा है।
जबकि पुलिस और गोरक्षकों व जागरूक नागरिकों को चकमा देकर तस्करी होने वाले पशुओं की तादाद कई गुना ज्यादा है। 2015 में लागू हुए हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गो-संवर्धन एक्ट की बात करें तो जिला पुलिस ने इस एक्ट के अंतर्गत 21 मामले दर्ज किये हैं और कुल 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक बार मुठभेड़ में पुलिसकर्मी घायल जबकि एक मामले में पुलिसकर्मी शहीद भी हुआ है। लगातार पुलिस के प्रयास के बावजूद पुलिस फिलहाल पशुओं की तस्करी रोकने में उस हद तक कामयाब नहीं हो सकी है, जिससे तस्करों में डर पनपे।
एनएच-8 बना है पशु तस्करों का गढ़
जिले में पशु तस्करी के सबसे ज्यादा मामले एनएच-8 पर सामने आते हैं। कुछ ही दिन पहले दो मामलों में राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर के पास गोरक्षकों ने कुछ तस्करों को पकड़कर पीटा था। बताया जाता है कि उस मामले से पहले गोरक्षक 24 घंटे में चार-पांच पशु तस्करों की गाड़ियां पकड़ चुके थे। वहीं शनिवार रात को भी कुछ रक्षकों ने क्रूरता पूर्वक भैंसों और कटड़ों को ले जा रहे युवकों को पीटा था। हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें तस्कर नहीं बल्कि व्यापारी करार दिया था।
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इसलिए तस्करों के लिए मुफीद है रेवाड़ी
पशुओं की तस्करी के लिए रेवाड़ी इसलिए भी मुफीद माना जाता है कि यहां से दिल्ली, राजस्थान के बॉर्डर बेहद करीब हैं। ऐसे में जरा सी सूचना में देरी होने पर तस्कर इत्मिनान के साथ जिला ही नहीं स्टेट बॉर्डर भी क्रॉस कर जाते हैं। इसके अलावा जिले में घुसने और निकलने के कई अंदरूनी रास्ते भी हैं। जिनकी पूरी जानकारी पशु तस्करों को रहती है।
गोरक्षक और तस्कर कई बार हो चुके हैं आमने-सामने
जिले में गोरक्षक और गोतस्करों का कई बार आमना-सामना हो चुका है। कई बार मामला मारपीट, वाहनों को क्षतिग्रस्त करना तो कुछ बार फायरिंग तक भी पहुंच चुका है। एक मामले में रक्षा दल के सदस्य टाटा गाड़ी के पीछे लग गए। अहमदपुर के नजदीक गोरक्षा दल के सदस्यों ने एक क्रूजर गाड़ी को सामने लगाकर टाटा को रुकवाने का प्रयास किया। अपने आपको घिरा देखकर टाटा सवार गो तस्करों ने गोली चला दी। गोली क्रूजर गाड़ी के शीशे में लगी। बड़ी गनीमत यह रही कि गो रक्षा दल का कोई भी सदस्य इस गोली का शिकार नहीं हुआ।
कैंटर, पिकअप ही नहीं टैंकर और बसों में भी तस्करी
पुलिस और गोरक्षकों को गच्चा देने के लिए गोतस्कर और खासकर मेव गिरोह के तस्कर नए-नए पैंतरे अपनाते हैं। अब महज कैंटर, पिकअप और ट्रक-ट्राले ही नहीं बल्कि अन्य वाहनों को भी तस्कर पशुओं की तस्करी के काम में लेते हैं। इनमें बॉडी काटकर टैंकर के अलावा लग्जरी बसों की सीटें हटाकर गायों और अन्य दुधारू पशुओं को बांधकर तस्करी की जाती है।
तस्करों के मन में नहीं खाकी का भी डर
पिछली कुछ वारदातों पर नजर दौड़ाएं तो साफ नजर आता है कि पशु तस्करों के मन में खाकी को लेकर कोई खौफ नहीं है। धारूहेड़ा के पास हाइवे पर तस्कर आए दिन पुलिस की बेरिकेडिंग तोड़ते हैं। इसके अलावा पुलिस पर पथराव, फायरिंग की वारदातें भी आए दिन सामने आती हैं। अप्रैल महीने में मॉडल टाउन थाने में तैनात पुलिसकर्मी राजसिंह की पिकअप से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। वहीं कुछ ही दिन बाद तस्करों ने ही पुलिसकर्मी अशोक पर भी फायरिंग की थी। गोली पुलिसकर्मी की बांह में लगी थी।
पिछले साल कुछ ये रहीं तस्करी की बड़ी वारदात
-08 मार्च: जानकारी के अनुसार बावल के टीबड़ीपुर में टोकने पर बदमाश गाय को छोड़कर भागे। पीछा करने पर फायरिंग।
-16 मार्च: धारूहेड़ा में एनएच-8 पर तस्करों ने पुलिस की वैन को टक्कर माकर फरार। वाहन क्षतिग्रस्त होने पर 35 गोधन पुलिस ने कराए मुक्त।
-29 मार्च: धारूहेड़ा में गो तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग और पथराव कर वाहन को किया क्षतिग्रस्त।
-10 अप्रैल: मॉडल टाउन थाना क्षेत्र के ही राजेश पायलट चौक पर गो तस्करों ने गाड़ी के नीचे कुचलकर गश्त कर रहे सिपाही राज सिंह की हत्या कर दी थी। तस्करों को रोकने के लिए कांस्टेबल ने गाड़ी को रुकवाना चाहा था।
-5 मई: गांव जड़थल के ग्रामीणों ने गोकशी के लिए आवारा गायों को चोरी कर ले जाते हुए दो गो-तस्करों को पकड़ने के बाद कसौला थाना पुलिस के हवाले किया। दो गाय, तीन बछिया और 11 बछड़े ले जा रहे थे तस्कर।
-23 मई: मॉडल टाउन थाने में तैनात एएसआई रणधीर सिंह, चालक पुलिसकर्मी अशोक पर चांदपुर की ढाणी के पास फायरिंग कर घायल कर दिया।
-10 जून: गांव गुर्जर घटाल में पुलिस बैरिकेटिंग तोड़ी, ग्रामीणों की मदद से पकड़े गए।
-16 जून: कोसली में तस्करों ने गोरक्षक दल पर की फायरिंग।
-17 जून: गोरक्षक और गोतस्करों का हुआ आमना-सामना। फायरिंग करने के साथ ही गाड़ी क्षतिग्रस्त कर भागे तस्कर।
-23 अगस्त: चार गौ तस्करों को सीआईए रेवाड़ी ने किया गिरफ्तार।
-29 अक्तूबर: बावल पुलिस ने 12 गाय व 9 बछङों को गौ तस्करों से कराया मुक्त, तस्कर फरार।
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गो या अन्य दुधारू पशु तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिसकर्मियों को समय-समय पर जरूरी गाइडलाइन दी जाती हैं। इसके अलावा सभी पुलिसकर्मियों को नाकाबंदी पुख्ता करने के निर्देश भी दिये गए हैं।
-संगीता कालिया, एसपी, जिला रेवाड़ी
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जबकि पुलिस और गोरक्षकों व जागरूक नागरिकों को चकमा देकर तस्करी होने वाले पशुओं की तादाद कई गुना ज्यादा है। 2015 में लागू हुए हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गो-संवर्धन एक्ट की बात करें तो जिला पुलिस ने इस एक्ट के अंतर्गत 21 मामले दर्ज किये हैं और कुल 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक बार मुठभेड़ में पुलिसकर्मी घायल जबकि एक मामले में पुलिसकर्मी शहीद भी हुआ है। लगातार पुलिस के प्रयास के बावजूद पुलिस फिलहाल पशुओं की तस्करी रोकने में उस हद तक कामयाब नहीं हो सकी है, जिससे तस्करों में डर पनपे।
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एनएच-8 बना है पशु तस्करों का गढ़
जिले में पशु तस्करी के सबसे ज्यादा मामले एनएच-8 पर सामने आते हैं। कुछ ही दिन पहले दो मामलों में राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर के पास गोरक्षकों ने कुछ तस्करों को पकड़कर पीटा था। बताया जाता है कि उस मामले से पहले गोरक्षक 24 घंटे में चार-पांच पशु तस्करों की गाड़ियां पकड़ चुके थे। वहीं शनिवार रात को भी कुछ रक्षकों ने क्रूरता पूर्वक भैंसों और कटड़ों को ले जा रहे युवकों को पीटा था। हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें तस्कर नहीं बल्कि व्यापारी करार दिया था।
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इसलिए तस्करों के लिए मुफीद है रेवाड़ी
पशुओं की तस्करी के लिए रेवाड़ी इसलिए भी मुफीद माना जाता है कि यहां से दिल्ली, राजस्थान के बॉर्डर बेहद करीब हैं। ऐसे में जरा सी सूचना में देरी होने पर तस्कर इत्मिनान के साथ जिला ही नहीं स्टेट बॉर्डर भी क्रॉस कर जाते हैं। इसके अलावा जिले में घुसने और निकलने के कई अंदरूनी रास्ते भी हैं। जिनकी पूरी जानकारी पशु तस्करों को रहती है।
गोरक्षक और तस्कर कई बार हो चुके हैं आमने-सामने
जिले में गोरक्षक और गोतस्करों का कई बार आमना-सामना हो चुका है। कई बार मामला मारपीट, वाहनों को क्षतिग्रस्त करना तो कुछ बार फायरिंग तक भी पहुंच चुका है। एक मामले में रक्षा दल के सदस्य टाटा गाड़ी के पीछे लग गए। अहमदपुर के नजदीक गोरक्षा दल के सदस्यों ने एक क्रूजर गाड़ी को सामने लगाकर टाटा को रुकवाने का प्रयास किया। अपने आपको घिरा देखकर टाटा सवार गो तस्करों ने गोली चला दी। गोली क्रूजर गाड़ी के शीशे में लगी। बड़ी गनीमत यह रही कि गो रक्षा दल का कोई भी सदस्य इस गोली का शिकार नहीं हुआ।
कैंटर, पिकअप ही नहीं टैंकर और बसों में भी तस्करी
पुलिस और गोरक्षकों को गच्चा देने के लिए गोतस्कर और खासकर मेव गिरोह के तस्कर नए-नए पैंतरे अपनाते हैं। अब महज कैंटर, पिकअप और ट्रक-ट्राले ही नहीं बल्कि अन्य वाहनों को भी तस्कर पशुओं की तस्करी के काम में लेते हैं। इनमें बॉडी काटकर टैंकर के अलावा लग्जरी बसों की सीटें हटाकर गायों और अन्य दुधारू पशुओं को बांधकर तस्करी की जाती है।
तस्करों के मन में नहीं खाकी का भी डर
पिछली कुछ वारदातों पर नजर दौड़ाएं तो साफ नजर आता है कि पशु तस्करों के मन में खाकी को लेकर कोई खौफ नहीं है। धारूहेड़ा के पास हाइवे पर तस्कर आए दिन पुलिस की बेरिकेडिंग तोड़ते हैं। इसके अलावा पुलिस पर पथराव, फायरिंग की वारदातें भी आए दिन सामने आती हैं। अप्रैल महीने में मॉडल टाउन थाने में तैनात पुलिसकर्मी राजसिंह की पिकअप से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। वहीं कुछ ही दिन बाद तस्करों ने ही पुलिसकर्मी अशोक पर भी फायरिंग की थी। गोली पुलिसकर्मी की बांह में लगी थी।
पिछले साल कुछ ये रहीं तस्करी की बड़ी वारदात
-08 मार्च: जानकारी के अनुसार बावल के टीबड़ीपुर में टोकने पर बदमाश गाय को छोड़कर भागे। पीछा करने पर फायरिंग।
-16 मार्च: धारूहेड़ा में एनएच-8 पर तस्करों ने पुलिस की वैन को टक्कर माकर फरार। वाहन क्षतिग्रस्त होने पर 35 गोधन पुलिस ने कराए मुक्त।
-29 मार्च: धारूहेड़ा में गो तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग और पथराव कर वाहन को किया क्षतिग्रस्त।
-10 अप्रैल: मॉडल टाउन थाना क्षेत्र के ही राजेश पायलट चौक पर गो तस्करों ने गाड़ी के नीचे कुचलकर गश्त कर रहे सिपाही राज सिंह की हत्या कर दी थी। तस्करों को रोकने के लिए कांस्टेबल ने गाड़ी को रुकवाना चाहा था।
-5 मई: गांव जड़थल के ग्रामीणों ने गोकशी के लिए आवारा गायों को चोरी कर ले जाते हुए दो गो-तस्करों को पकड़ने के बाद कसौला थाना पुलिस के हवाले किया। दो गाय, तीन बछिया और 11 बछड़े ले जा रहे थे तस्कर।
-23 मई: मॉडल टाउन थाने में तैनात एएसआई रणधीर सिंह, चालक पुलिसकर्मी अशोक पर चांदपुर की ढाणी के पास फायरिंग कर घायल कर दिया।
-10 जून: गांव गुर्जर घटाल में पुलिस बैरिकेटिंग तोड़ी, ग्रामीणों की मदद से पकड़े गए।
-16 जून: कोसली में तस्करों ने गोरक्षक दल पर की फायरिंग।
-17 जून: गोरक्षक और गोतस्करों का हुआ आमना-सामना। फायरिंग करने के साथ ही गाड़ी क्षतिग्रस्त कर भागे तस्कर।
-23 अगस्त: चार गौ तस्करों को सीआईए रेवाड़ी ने किया गिरफ्तार।
-29 अक्तूबर: बावल पुलिस ने 12 गाय व 9 बछङों को गौ तस्करों से कराया मुक्त, तस्कर फरार।
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गो या अन्य दुधारू पशु तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिसकर्मियों को समय-समय पर जरूरी गाइडलाइन दी जाती हैं। इसके अलावा सभी पुलिसकर्मियों को नाकाबंदी पुख्ता करने के निर्देश भी दिये गए हैं।
-संगीता कालिया, एसपी, जिला रेवाड़ी