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निर्माण में घटिया सामग्री लगाने पर भड़के फ्लैट मालिक
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Mon, 21 Mar 2016 12:20 AM IST
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भवन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी। गुड़गांव के पास होने पर रेवाड़ी में बिल्डर्स की नजर है और यहां गगनचुंबी इमारतों में फ्लैट और सुविधाओं के सपने लोगों को दिखाए जा रहे हैं। इसी क्रम में गढ़ी बोलनी रोड स्थित एक सोसायटी में घर खरीदने वाले लोगों ने फ्लैटों के निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग किए जाने पर बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन किया। सोसाइटी में फ्लैट खरीदने वाले लोगों का आरोप है कि मात्र पांच माह पहले ही मिले फ्लैटों में दीवारें और दरवाजे टूटने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि बिल्डर्स की मनमानी का खुलासा तब सामने आया जब यहां के रेजिडेंट्स ने निर्माण सामग्री की जांच सोनीपत स्थित एक लैब से कराई। लैब रिपोर्ट में निर्माण सामग्री को औसत दर्जे से भी निम्र स्तर का बताया गया है। इसके बाद फ्लैट मालिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
रविवार को बिल्डर्स के सेल्स कार्यालय बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया। उनकी यहां बैठे अधिकारियों से जमकर बहस भी हुई। हालांकि इससे पहले लोगों ने जांच रिपोर्ट आने के बाद उपभोक्ता फोरम सहित सीएम तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सरकार की ओर से कुछ भी जवाब नहीं मिलने के बाद लोगों के सब्र का बांध टूट गया।
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उन्होंने सेल्स कार्यालय के अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई। इधर जब सेल्स ऑफिस में बैठे सेल्स प्रतिनिधि से इस बाबत बात की गई तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए फ्लैट मालिकों को ही इसका जिम्मेदारी ठहरा दिया।
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यह है पूरा मामला
सीएम विंडो एव उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर चुके श्याम सुंदर सभ्रवाल एवं प्रदीप यादव ने बताया कि मई 2015 में गढ़ी बोलनी रोड स्थित सेक्टर-25-26 में एहसान वाटिक में कब्जा दिया गया था। एक साल भी नहीं हुआ कि फ्लैट्स की दीवारें और दरवाजे टूटने लगे हैं। उन्होंने बताया कि जब इसकी शिकायत मालिक को की गई तो उन्होंने बात ही करने से मना कर दिया।
इसके बाद 20 दिसंबर 2015 को सीएम विंडो एवं उपायुक्त यश गर्ग को इसकी शिकायत दी गई। तीन महीने बीत गए लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि फ्लैट बुक करवाने के समय उन्हें कम्यूनिटी हॉल सहित अनेक सुविधाओं की बात कही गई थी,लेकिन बिल्डर्स एक-एक इंच जमीन को सुविधाओं की जगह बेचने पर लगा हुआ है।
उन्होंने बताया कि हर माह विकास शुल्क के नाम पर दो हजार रूपये लिए जाते हैं, लेकिन 40 एकड़ में बने 300 से ज्यादा फ्लैट्स के लिए केवल एक ही सफाई कर्मी है। इसी के साथ पार्क में भी जनरेटर रखा दिया गया है। इससे वहां खेलने वाले बच्चों को खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि फ्लैट्स में लगी निर्माण सामग्री की सोनीपत लैब में जांच कराई तो उसे औसत से भी कम दर्जे की बताई है। उपभोक्ता फोरम में याचिका लगाई है। इस अवसर पर महावीर प्रसाद, राजेश यादव, हेतराम, डॉ आनंद कुमार, दीपक कुमार एवं मातादीन सहित अनेक रेजिडेंट उपस्थित थे।
वर्जन
उपभोक्ताओं को फ्लैटस खरीदने से पहले सभी कंडीशन बताई गई थी। घटिया सामग्री की बात मनघडंत है,ऐसा कुछ भी नहीं है। उपभोक्ता अपनी शिकायत मालिकों के सामने रखे,वहीं पर सुनवाई होगी।
आकाश जैन, सेल्स अधिकारी
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उन्होंने बताया कि बिल्डर्स की मनमानी का खुलासा तब सामने आया जब यहां के रेजिडेंट्स ने निर्माण सामग्री की जांच सोनीपत स्थित एक लैब से कराई। लैब रिपोर्ट में निर्माण सामग्री को औसत दर्जे से भी निम्र स्तर का बताया गया है। इसके बाद फ्लैट मालिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
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रविवार को बिल्डर्स के सेल्स कार्यालय बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया। उनकी यहां बैठे अधिकारियों से जमकर बहस भी हुई। हालांकि इससे पहले लोगों ने जांच रिपोर्ट आने के बाद उपभोक्ता फोरम सहित सीएम तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सरकार की ओर से कुछ भी जवाब नहीं मिलने के बाद लोगों के सब्र का बांध टूट गया।
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उन्होंने सेल्स कार्यालय के अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई। इधर जब सेल्स ऑफिस में बैठे सेल्स प्रतिनिधि से इस बाबत बात की गई तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए फ्लैट मालिकों को ही इसका जिम्मेदारी ठहरा दिया।
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यह है पूरा मामला
सीएम विंडो एव उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर चुके श्याम सुंदर सभ्रवाल एवं प्रदीप यादव ने बताया कि मई 2015 में गढ़ी बोलनी रोड स्थित सेक्टर-25-26 में एहसान वाटिक में कब्जा दिया गया था। एक साल भी नहीं हुआ कि फ्लैट्स की दीवारें और दरवाजे टूटने लगे हैं। उन्होंने बताया कि जब इसकी शिकायत मालिक को की गई तो उन्होंने बात ही करने से मना कर दिया।
इसके बाद 20 दिसंबर 2015 को सीएम विंडो एवं उपायुक्त यश गर्ग को इसकी शिकायत दी गई। तीन महीने बीत गए लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि फ्लैट बुक करवाने के समय उन्हें कम्यूनिटी हॉल सहित अनेक सुविधाओं की बात कही गई थी,लेकिन बिल्डर्स एक-एक इंच जमीन को सुविधाओं की जगह बेचने पर लगा हुआ है।
उन्होंने बताया कि हर माह विकास शुल्क के नाम पर दो हजार रूपये लिए जाते हैं, लेकिन 40 एकड़ में बने 300 से ज्यादा फ्लैट्स के लिए केवल एक ही सफाई कर्मी है। इसी के साथ पार्क में भी जनरेटर रखा दिया गया है। इससे वहां खेलने वाले बच्चों को खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि फ्लैट्स में लगी निर्माण सामग्री की सोनीपत लैब में जांच कराई तो उसे औसत से भी कम दर्जे की बताई है। उपभोक्ता फोरम में याचिका लगाई है। इस अवसर पर महावीर प्रसाद, राजेश यादव, हेतराम, डॉ आनंद कुमार, दीपक कुमार एवं मातादीन सहित अनेक रेजिडेंट उपस्थित थे।
वर्जन
उपभोक्ताओं को फ्लैटस खरीदने से पहले सभी कंडीशन बताई गई थी। घटिया सामग्री की बात मनघडंत है,ऐसा कुछ भी नहीं है। उपभोक्ता अपनी शिकायत मालिकों के सामने रखे,वहीं पर सुनवाई होगी।
आकाश जैन, सेल्स अधिकारी