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Rewari News: हाउस टैक्स समायोजित न करने पर कोर्ट ने नगर परिषद पर लगाया जुर्माना

Tue, 16 Jan 2024 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 16 Jan 2024 11:52 PM IST
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Court imposed fine on Municipal Council for not adjusting house tax
रेवाड़ी। नगर परिषद की तरफ से शहर निवासी एक व्यक्ति का हाउस टैक्स समायोजित न करने पर कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। नगर परिषद ने बचने के लिए कई दलीलें भी दी, मगर वह काम ना आई।
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न्यायाधीश ने नगर परिषद के बहाने को दरकिनार करते हुए उलटे उन्हें ही दोषी फर्म के विरुद्ध कोई कार्यवाही न करने का दोषी भी माना। जिसका नगर परिषद की तरफ से कोई सटीक उत्तर नहीं दिया जा सका। न्यायाधीश संजय कुमार खंपूजा ने नगर परिषद पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए 25000 रुपये क्षतिपूर्ति व 11000 रुपये वाद खर्च के देने के आदेश देते हुए हाउस टैक्स समायोजित करने व नगर परिषद को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने अपने आदेशों में परिषद अधिकारियों को सख्त चेतावनी भी जारी कर दी है यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो उन्हें 1 लाख तक जुर्माना व 3 साल तक की जेल भुगतनी पड़ सकती है।
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ये है पूरा मामला

रेवाड़ी शहर निवासी नरेश चंद ने 2013 में नगर परिषद में हाउस टैक्स जमा कराया था, लेकिन हाउस टैक्स जमा करने के बाद भी तकनीकी समस्या बता कर उस समय हाउस टैक्स की रसीद जारी नहीं की गई। कुछ समय बाद हाउस टैक्स की स्थिति के बारे में पता किया तो उसे हाउस टैक्स बकाया बताया गया। बार बार जाने पर भी नगर परिषद की ओर से न तो हाउस टैक्स की राशि को समायोजित नहीं किया गया न ही रसीद जारी की गई। इसके बाद नगर परिषद अधिकारियों की ओर से ये कहा गया कि अभी तो हाउस टैक्स को दोबारा जमा करा कर रसीद ले लो और एकाउंट साफ कर लो, बाद में आपकी राशि को समायोजित कर दिया जाएगा और उस पर हम ब्याज भी देंगे। नगर परिषद अधिकारियों के आश्वासन पर विश्वास करके उन्होंने ये राशि दोबारा जमा कर दी और इस प्रकार उन्होंने 2 बार हाउस टैक्स जमा करा दिया।
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बार बार नगर परिषद के चक्कर काटता रहा नरेश

नरेश ने बताया कि इसके कुछ दिन बाद अपने पूर्व की जमा की हुई राशि की रसीद लेने के लिए नगर परिषद अधिकारियों से संपर्क किया गया तो वो ये जान कर आश्चर्यचकित रह गए। जब उन्हें बताया गया कि हाउस टैक्स बकाया है और एक बार फिर से हाउस टैक्स जमा कराने के निर्देश अधिकारियों ने दे दिए। इसके बाद अधिकारियों के चक्कर काटने का सिलसिला शुरू हो गया और काफी प्रयास के बाद उन्हें पहले भरी हुई राशि की रसीद जारी कर दी गई, और आश्वासन दिया गया की भविष्य में इसे समायोजित कर दिया जाएगा न केवल इस राशि को बल्कि बाद में भरी हुई राशि को भी समायोजित नहीं किया गया। उन्हें लगातार प्रारम्भ से बकाया राशि दिखाते हुए ना केवल बकाया बल्कि उस पर ब्याज जोड़कर हाउस टैक्स की मांग नगर परिषद की तरफ से की जाती रही। जिसके बाद नरेश ने कोर्ट का रुख किया तो कोर्ट में नगर परिषद की ओर से ठेकेदार फर्म द्वारा लापरवाही की बात कहते हुए जिम्मेदारी से बचने का बहाना बनाया। हालांकि, कोर्ट ने फैसला नरेश के पक्ष में सुनाया।
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