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Rewari News: साइबर ठगी के आरोपी को कोर्ट ने दी जमानत
Tue, 22 Jul 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 22 Jul 2025 11:59 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले की एक महिला से साइबर ठगी के मामले में राजस्थान निवासी एक आरोपी संजीत को एडिशनल सेशन जज जतिन गर्ग की अदालत ने कड़े शर्तों के साथ जमानत दे दी। आरोपी की ओर से चौथी बार जमानत याचिका लगाई थी।
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह 9 मार्च से 2025 से हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है। अभियुक्त से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है।
अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले की सुनवाई में काफी लंबा समय लगेगा। ऐसे में नियमित जमानत दी जाए। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता अपने वकील के साथ इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुई है। शिकायतकर्ता ने लिखित रूप में बयान दिया है कि उसने अभियुक्तों के साथ समझौता कर लिया है और यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है।
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जिन अपराधों के तहत आवेदक-अभियुक्त पर मामला दर्ज किया गया है, वे समझौता योग्य प्रकृति के हैं। अभियुक्त 9 मार्च 2025 से हिरासत में है और उसकी पूर्व की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं।
मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को 1 लाख रुपये के जमानत बांड और समान राशि में एक जमानत प्रस्तुत करने पर जमानत दे दिया।
5 जनवरी 2025 को अंजू देवी ने एफआईआर में कहा था कि 15 दिसंबर 2024 को व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वाले ने कहा कि एक पार्सल आया है, जो महंगा है। पार्सल लेने के लिए 42 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
कॉल करने वाले ने उन्हें विभिन्न बैंकों के खाता नंबर दिए थे। 15 दिसंबर 2024 को उन्होंने विभिन्न खातों में 5 हजार रुपये, 15 हजार रुपये और 22 हजार रुपये स्थानांतरित किए थे।
कॉल करने वाले ने कहा कि शिकायतकर्ता ने गलत खाता संख्या में राशि स्थानांतरित कर दी थी और उनकी राशि वापस कर दी जाएगी। 16 दिसंबर 2024 को शिकायतकर्ता ने फिर से 25 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की।
महिला ने 1,40,900 रुपये की राशि के संबंध में उन्होंने साइबर अपराध शाखा के 1930 नंबर पर शिकायत दर्ज कराई थी।
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रेवाड़ी। जिले की एक महिला से साइबर ठगी के मामले में राजस्थान निवासी एक आरोपी संजीत को एडिशनल सेशन जज जतिन गर्ग की अदालत ने कड़े शर्तों के साथ जमानत दे दी। आरोपी की ओर से चौथी बार जमानत याचिका लगाई थी।
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह 9 मार्च से 2025 से हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है। अभियुक्त से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है।
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अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले की सुनवाई में काफी लंबा समय लगेगा। ऐसे में नियमित जमानत दी जाए। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता अपने वकील के साथ इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुई है। शिकायतकर्ता ने लिखित रूप में बयान दिया है कि उसने अभियुक्तों के साथ समझौता कर लिया है और यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है।
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जिन अपराधों के तहत आवेदक-अभियुक्त पर मामला दर्ज किया गया है, वे समझौता योग्य प्रकृति के हैं। अभियुक्त 9 मार्च 2025 से हिरासत में है और उसकी पूर्व की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं।
मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को 1 लाख रुपये के जमानत बांड और समान राशि में एक जमानत प्रस्तुत करने पर जमानत दे दिया।
5 जनवरी 2025 को अंजू देवी ने एफआईआर में कहा था कि 15 दिसंबर 2024 को व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वाले ने कहा कि एक पार्सल आया है, जो महंगा है। पार्सल लेने के लिए 42 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
कॉल करने वाले ने उन्हें विभिन्न बैंकों के खाता नंबर दिए थे। 15 दिसंबर 2024 को उन्होंने विभिन्न खातों में 5 हजार रुपये, 15 हजार रुपये और 22 हजार रुपये स्थानांतरित किए थे।
कॉल करने वाले ने कहा कि शिकायतकर्ता ने गलत खाता संख्या में राशि स्थानांतरित कर दी थी और उनकी राशि वापस कर दी जाएगी। 16 दिसंबर 2024 को शिकायतकर्ता ने फिर से 25 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की।
महिला ने 1,40,900 रुपये की राशि के संबंध में उन्होंने साइबर अपराध शाखा के 1930 नंबर पर शिकायत दर्ज कराई थी।