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कोरोना ने छीना मां को, कैसे गुजारा हो बच्चों का
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रेवाड़ी। कोराना की दूसरी लहर ने कई परिवारों के बच्चों से उनके माता-पिता का साया छीन लिया। इसके चलते अब उनकी पढ़ाई से लेकर पालन-पोषण को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। इसको देखते हुए ही सरकार ने अपनत्व योजना के तहत ऐसे बच्चों की आर्थिक मदद करने और उन्हें सहारा देने के लिए नौकरी तक देने की पहल की है।
इस लहर में शहर के कुतुबपुर मोहल्ला के बुद्धोमाता मंदिर के पास रहने वाले सोनी परिवार पर भी दुखों को पहाड़ टूटा। एक निजी कंपनी में नौकरी कर अपने तीन बच्चों का लालन पोषण करने वाली मीना भी बड़ी बेटी की शादी के महज 6 दिन बाद आठ मई को कोरोना की भेंट चढ़ गई। वर्ष 2018 में पिता नरेश सोनी की मौत के बाद मां का जाना तीन बच्चों के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर गया।
10वीं में पढ़ता है छोटा बेटा नीरज
मीना की बड़ी बेटी की शादी दो मई को हुई थी। इसके बाद से ही वह थोड़ी परेशान रहने लगी थी। बच्चों ने सोचा की बहन के दूसरे घर में जाने से शायद परेशान है। सात मई को तबीयत बिगड़ी तो शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, ऑक्सीजन स्तर का पता किया तो वह 32 मिला। पूरे शहर में कहीं वेंटिलेटर नहीं मिला तो मीना को महेंद्रगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके बाद उनकी कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और आठ मई को 45 वर्षीय मीना असमय बच्चों को छोड़कर चल बसी। मीना के तीन बच्चे हैं। सबसे छोटा बच्चा 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है, वहीं दूसरे नंबर की बेटी प्रिया अभी कॉलेज जा रही है। ऐसे में इन बच्चों को अब सरकार से मदद की दरकार है, ताकि समय रहते इन बच्चों को सहारा मिल सके।
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इस लहर में शहर के कुतुबपुर मोहल्ला के बुद्धोमाता मंदिर के पास रहने वाले सोनी परिवार पर भी दुखों को पहाड़ टूटा। एक निजी कंपनी में नौकरी कर अपने तीन बच्चों का लालन पोषण करने वाली मीना भी बड़ी बेटी की शादी के महज 6 दिन बाद आठ मई को कोरोना की भेंट चढ़ गई। वर्ष 2018 में पिता नरेश सोनी की मौत के बाद मां का जाना तीन बच्चों के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर गया।
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10वीं में पढ़ता है छोटा बेटा नीरज
मीना की बड़ी बेटी की शादी दो मई को हुई थी। इसके बाद से ही वह थोड़ी परेशान रहने लगी थी। बच्चों ने सोचा की बहन के दूसरे घर में जाने से शायद परेशान है। सात मई को तबीयत बिगड़ी तो शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, ऑक्सीजन स्तर का पता किया तो वह 32 मिला। पूरे शहर में कहीं वेंटिलेटर नहीं मिला तो मीना को महेंद्रगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके बाद उनकी कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और आठ मई को 45 वर्षीय मीना असमय बच्चों को छोड़कर चल बसी। मीना के तीन बच्चे हैं। सबसे छोटा बच्चा 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है, वहीं दूसरे नंबर की बेटी प्रिया अभी कॉलेज जा रही है। ऐसे में इन बच्चों को अब सरकार से मदद की दरकार है, ताकि समय रहते इन बच्चों को सहारा मिल सके।
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