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कॉलेजों में हेल्प डेस्क पर भी रोक, रिहायश, आय और जाति
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कोरोनाकाल में विद्यार्थियों को परेशानी न हो, इसके लिए कॉलेजों में प्रवेश के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का दावा किया जा रहा है। विद्यार्थी कॉलेजों में न आए, इसके लिए हेल्प डेस्क तक बनाने पर भी रोक है। लेकिन सिस्टम को समझिए की इन्हीं छात्रों को कोरोना पीड़ितों के बीच से गुजरते हुए आवास, आय, पिछड़ा वर्ग(बीसी), अनुसूचित जाति व आय पेरमाण पत्र बनवाने के लिए पटवारी, पार्षद, सरपंच और नगर परिषद के बाबू व सीएससी सेंटर सहित पांच से अधिक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे में जिम्मेदारों की ओर से एडमिशन प्रक्रिया ऑनलाइन करने के दावों की हकीकत सामने आ रही है। बता दें कि जिला के 17 कॉलेजों की 10 हजार से ज्यादा सीट पर बीएससी, बीए व अन्य स्नातक कक्षाओं के प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए 21 सितंबर आवेदन करने की अंतिम तिथि है, लेकिन विद्यार्थियों को एक-एक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तीन-तीन दिन दफ्तरों में घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। 12वीं पास विद्यार्थियों के दस्तावेज बनवाने के लिए परिजन भी साथ में आते हैं, ऐसे में हर रोज हजारों की संख्या में एडमिशन के प्रमाण पत्र बनवाने लोगों को दफ्तरों में जाना पड़ रहा है।
नगर परिषद में ईओ संक्रमित, प्रत्येक दिन पहुंच रहे 200 छात्र
शहर के नगर परिषद कार्यालय में प्रमाण पत्रों के लिए फाइल पर हस्ताक्षर करवाने को हर रोज औसतन 200 विद्यार्थी पहुंच रहे हैं। ऐसा ही हाल धारूहेड़ा व बावल नगर पालिकाओं का है। रेवाड़ी नप ईओ संक्रमित मिल चुके हैं, ऐसे में नप कार्यालय के अंदर संक्रमण फैलने का भी डर रहता है। लेकिन विद्यार्थियों व उनके परिजनों को कोरोना की परवाह किए बगैर नगर निकाय कार्यालयों में पहुंचना पड़ रहा है। नप में हस्ताक्षर करने वाले बाबू हरकेश ने बताया कि दफ्तर के समय से पहले ही विद्यार्थी पहुंच जाते हैं, जरूरी होने के चलते उनकी ओर से भी सबसे पहले विद्यार्थियों की फाइल पर ही हस्ताक्षर किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिन 200 से ज्यादा विद्यार्थी कार्यालय में आ रहे हैं।
पटवारी दफ्तर के सबसे ज्यादा चक्कर
शहर के मॉडल टाऊन स्थित पटवार घर में शहर सहित अनेक सर्कल के पटवारियों के दफ्तर हैं। अधिकतर समय पटवारी दफ्तर में ही नहीं मिलते हैं। दफ्तरों में पटवारियों के जो सहायक बैठे होते हैं, वह विद्यार्थियों से ठीक से बात भी नहीं करते हैं। हालात ऐसे हैं कि एक-एक पटवारी के लिए तीन-तीन दिन पटवार घर के चक्कर काटने पड़ते हैं, कई बार तो पटवारियों के सहायक कमरे का ताला बंद कर बैठे हुए होते हैं। पटवारी के छुट्टी पर जाने का हवाला देकर विद्यार्थियों को चलता कर देतेे हैं।
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तहसीलों में अधिकारियों की कमी से भी बढ़ी परेशानी
जिले में रेवाड़ी, बावल व कोसली तहसील व धारूहेड़ा, नाहड़, पाल्हावास, मनेठी व डहीना उपतहसील है। यहां तीन तहसीलों में से एकमात्र रेवाड़ी तहसील को छोड़ दिया जाए तो बावल व कोसली में तहसीलदार का पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके अलावा पांच उपतहसीलों में डहीना व धारूहेड़ा को छोड़कर मनेठी, नाहड़ व पाल्हावास में भी लंबे समय से नायब तहसीलदार का पद रिक्त पड़ा हुआ है। जबकि कोसली में तहसीलदार के साथ ही लंबे समय से नायब तहसीलदार का पद रिक्त है। ऐसे में विद्यार्थियों के दस्तावेज के काम से लेकर रेवेन्य का काम भी प्रभावित हो रहा है।
तीन उप तहसीलों का कार्यभार
रेवाड़ी के नायब तहसीलदार के पास मनेठी व नाहड़ का अतिरिक्त कार्यभार है। वहीं डहीना के नायब तहसीलदार के पास कोसली व पाल्हावास का अतिरिक्त कार्यभार है। ऐसे में रेवाड़ी के नायब तहसीलदार सोमवार और वीरवार को नाहड़ में ड्यूटी देते हैं तथा डहीना के नायब तहसीलदार सोमवार व शुक्रवार को कोसली में ड्यूटी देते हैं। जबकि कोसली में तहसीलदार का अतिरिक्त कार्यभार किसी के पास भी नहीं है।
विद्यार्थियों से बातचीत
गांव झाल निवासी छात्रा सपना ने बताया कि उसे कॉलेज में एडमिशन के लिए रिहायश प्रमाण की जरूरत थी। सरपंच से लेकर तहसील व सीएससी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कॉलेजों में हेल्प डेस्क तक पर रोक है, ऐसे में पूरी व्यवस्था एक जगह होनी चाहिए।
बावल निवासी सौरभ ने बताया कि उसे आयकर प्रमाण पत्र की जरूरत है, इसके लिए पार्षद, पटवारी व तहसीलदार के हस्ताक्षर जरूरी है। चार दिन से चक्कर काट रहे हैं, यदि सभी सुविधाए ंएक जगह मिल जाए तो कोरोनाकाल में संक्रमण से भी बचा जा सकता है।
जैनाबाद निवासी नवीन ने बताया कि डहीना उपतहसील में नायब तहसीलदार तो है, लेकिन अन्य उपतहसीलों को अतिरिक्त चार्ज होने के कारण यहां कम बैठते हैं। जिसके विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र व मूलनिवासी प्रमाण-पत्र बनाने का काम भी धीमी गति से चल रहा है।
बावल निवासी हरीश ने बताया कि एडमिशन के लिए आय प्रमाण पत्र व जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। एडमिशन के दौरान एक हल्फनामा लिया जा सकता है, कोरोना खत्म होने के बाद सभी छात्र दस्तावेज जमा करा देंगे।
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नगर परिषद में ईओ संक्रमित, प्रत्येक दिन पहुंच रहे 200 छात्र
शहर के नगर परिषद कार्यालय में प्रमाण पत्रों के लिए फाइल पर हस्ताक्षर करवाने को हर रोज औसतन 200 विद्यार्थी पहुंच रहे हैं। ऐसा ही हाल धारूहेड़ा व बावल नगर पालिकाओं का है। रेवाड़ी नप ईओ संक्रमित मिल चुके हैं, ऐसे में नप कार्यालय के अंदर संक्रमण फैलने का भी डर रहता है। लेकिन विद्यार्थियों व उनके परिजनों को कोरोना की परवाह किए बगैर नगर निकाय कार्यालयों में पहुंचना पड़ रहा है। नप में हस्ताक्षर करने वाले बाबू हरकेश ने बताया कि दफ्तर के समय से पहले ही विद्यार्थी पहुंच जाते हैं, जरूरी होने के चलते उनकी ओर से भी सबसे पहले विद्यार्थियों की फाइल पर ही हस्ताक्षर किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिन 200 से ज्यादा विद्यार्थी कार्यालय में आ रहे हैं।
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पटवारी दफ्तर के सबसे ज्यादा चक्कर
शहर के मॉडल टाऊन स्थित पटवार घर में शहर सहित अनेक सर्कल के पटवारियों के दफ्तर हैं। अधिकतर समय पटवारी दफ्तर में ही नहीं मिलते हैं। दफ्तरों में पटवारियों के जो सहायक बैठे होते हैं, वह विद्यार्थियों से ठीक से बात भी नहीं करते हैं। हालात ऐसे हैं कि एक-एक पटवारी के लिए तीन-तीन दिन पटवार घर के चक्कर काटने पड़ते हैं, कई बार तो पटवारियों के सहायक कमरे का ताला बंद कर बैठे हुए होते हैं। पटवारी के छुट्टी पर जाने का हवाला देकर विद्यार्थियों को चलता कर देतेे हैं।
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तहसीलों में अधिकारियों की कमी से भी बढ़ी परेशानी
जिले में रेवाड़ी, बावल व कोसली तहसील व धारूहेड़ा, नाहड़, पाल्हावास, मनेठी व डहीना उपतहसील है। यहां तीन तहसीलों में से एकमात्र रेवाड़ी तहसील को छोड़ दिया जाए तो बावल व कोसली में तहसीलदार का पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके अलावा पांच उपतहसीलों में डहीना व धारूहेड़ा को छोड़कर मनेठी, नाहड़ व पाल्हावास में भी लंबे समय से नायब तहसीलदार का पद रिक्त पड़ा हुआ है। जबकि कोसली में तहसीलदार के साथ ही लंबे समय से नायब तहसीलदार का पद रिक्त है। ऐसे में विद्यार्थियों के दस्तावेज के काम से लेकर रेवेन्य का काम भी प्रभावित हो रहा है।
तीन उप तहसीलों का कार्यभार
रेवाड़ी के नायब तहसीलदार के पास मनेठी व नाहड़ का अतिरिक्त कार्यभार है। वहीं डहीना के नायब तहसीलदार के पास कोसली व पाल्हावास का अतिरिक्त कार्यभार है। ऐसे में रेवाड़ी के नायब तहसीलदार सोमवार और वीरवार को नाहड़ में ड्यूटी देते हैं तथा डहीना के नायब तहसीलदार सोमवार व शुक्रवार को कोसली में ड्यूटी देते हैं। जबकि कोसली में तहसीलदार का अतिरिक्त कार्यभार किसी के पास भी नहीं है।
विद्यार्थियों से बातचीत
गांव झाल निवासी छात्रा सपना ने बताया कि उसे कॉलेज में एडमिशन के लिए रिहायश प्रमाण की जरूरत थी। सरपंच से लेकर तहसील व सीएससी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कॉलेजों में हेल्प डेस्क तक पर रोक है, ऐसे में पूरी व्यवस्था एक जगह होनी चाहिए।
बावल निवासी सौरभ ने बताया कि उसे आयकर प्रमाण पत्र की जरूरत है, इसके लिए पार्षद, पटवारी व तहसीलदार के हस्ताक्षर जरूरी है। चार दिन से चक्कर काट रहे हैं, यदि सभी सुविधाए ंएक जगह मिल जाए तो कोरोनाकाल में संक्रमण से भी बचा जा सकता है।
जैनाबाद निवासी नवीन ने बताया कि डहीना उपतहसील में नायब तहसीलदार तो है, लेकिन अन्य उपतहसीलों को अतिरिक्त चार्ज होने के कारण यहां कम बैठते हैं। जिसके विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र व मूलनिवासी प्रमाण-पत्र बनाने का काम भी धीमी गति से चल रहा है।
बावल निवासी हरीश ने बताया कि एडमिशन के लिए आय प्रमाण पत्र व जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। एडमिशन के दौरान एक हल्फनामा लिया जा सकता है, कोरोना खत्म होने के बाद सभी छात्र दस्तावेज जमा करा देंगे।