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Rewari News: विकास शुल्क मांगने पर आयोग ने नगर परिषद पर लगाया 50 हजार जुर्माना
Sat, 05 Oct 2024 01:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 05 Oct 2024 01:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। दो प्लॉटों की आईडी के लिए किए गए आवेदन पर नगर परिषद ने विकास शुल्क के नाम पर 8 लाख 82 हजार 198 रुपये मांगे। इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने विकास शुल्क को मनमाना करार देते हुए नगर परिषद पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही 11 हजार रुपये वाद खर्च देने और शिकायतकर्ता को 30 दिन के अंदर एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जारी करने का आदेश नगर परिषद को दिया।
जिला उपभोक्ता आयोग ने विकास शुल्क के नाम पर मांगी गई 8.82 लाख की राशि नहीं लेने का भी आदेश नगर परिषद को दिया। शहर के बड़ा तालाब स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ. घनश्याम मित्तल व सीमा मित्तल ने नगर परिषद से अपने 654 व 400 गज के दो प्लाॅटों की नई आईडी बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। नगर परिषद ने उनके आवेदन पर विकास शुल्क के नाम पर 8 लाख 82 हजार 198 रुपये मांगे। नगर परिषद ने विकास शुल्क जमा करने के बाद ही एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जारी करने की बात कही थी। शिकायतकर्ता ने उच्चाधिकारियों से बात की लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके बाद डॉक्टर घनश्याम मित्तल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में गुहार लगाई थी।
मामले में सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा एवं राजेंद्र प्रसाद ने अपने फैसले में नगर परिषद रेवाड़ी की ओर से मांगे गए विकास शुल्क गलत व गैर कानूनी बताया। कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने प्लॉट में मकान बनाने से पहले 11 सितंबर 2003 को 91 हजार 287 रुपये की राशि अदा की थी और नक्शा पास करा कर मकान एवं नर्सिंग होम बनाया था। यह नक्शा भी नर्सिंग होम के नाम से पास किया गया था। इसमें 78 हजार 480 रुपये का भुगतान विकास शुल्क के तौर पर किया गया था। इसके बाद भी शिकायतकर्ता ने दूसरे प्लाट के लिए विकास शुल्क के नाम पर 48 हजार की राशि 18 सितंबर 2023 को दिए थे।
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सभी हाउस टैक्स व विकास शुल्क कराए थे जमा
शिकायतकर्ता ने नगर परिषद के ऑनलाइन पोर्टल पर दोनों प्लाॅटों की आईडी बनाकर नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने का आग्रह किया था। नगर परिषद ने 9 लाख 41 हजार 248 रुपये की मांग की, जिसमें 8 लाख 82 हजार 198 रुपये विकास शुल्क के नाम पर मांगी गई थी। शिकायतकर्ता ने उच्चाधिकारियों से मिलकर कहा कि उनका नर्सिंग होम लाल डोरा की जमीन पर बना हुआ है। उनके नर्सिंग होम के अनुसार सभी हाउस टैक्स एवं विकास शुल्क जमा कराए जा चुके हैं।
कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाई नगर परिषद
जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष नगर परिषद रेवाड़ी की ओर से दलील दी गई कि यह गली कामर्शीयल घोषित की गई है। ऐसे में विकास शुल्क वसूल किया जाना है। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि नगर परिषद ने कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे जिससे यह समझा जा सके कि इस पर विकास शुल्क लेना जायज है। आयोग ने नगर परिषद को 30 दिन के अंदर शिकायतकर्ता को नो ड्यूज सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया।
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रेवाड़ी। दो प्लॉटों की आईडी के लिए किए गए आवेदन पर नगर परिषद ने विकास शुल्क के नाम पर 8 लाख 82 हजार 198 रुपये मांगे। इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने विकास शुल्क को मनमाना करार देते हुए नगर परिषद पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही 11 हजार रुपये वाद खर्च देने और शिकायतकर्ता को 30 दिन के अंदर एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जारी करने का आदेश नगर परिषद को दिया।
जिला उपभोक्ता आयोग ने विकास शुल्क के नाम पर मांगी गई 8.82 लाख की राशि नहीं लेने का भी आदेश नगर परिषद को दिया। शहर के बड़ा तालाब स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ. घनश्याम मित्तल व सीमा मित्तल ने नगर परिषद से अपने 654 व 400 गज के दो प्लाॅटों की नई आईडी बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। नगर परिषद ने उनके आवेदन पर विकास शुल्क के नाम पर 8 लाख 82 हजार 198 रुपये मांगे। नगर परिषद ने विकास शुल्क जमा करने के बाद ही एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जारी करने की बात कही थी। शिकायतकर्ता ने उच्चाधिकारियों से बात की लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके बाद डॉक्टर घनश्याम मित्तल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में गुहार लगाई थी।
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मामले में सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा एवं राजेंद्र प्रसाद ने अपने फैसले में नगर परिषद रेवाड़ी की ओर से मांगे गए विकास शुल्क गलत व गैर कानूनी बताया। कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने प्लॉट में मकान बनाने से पहले 11 सितंबर 2003 को 91 हजार 287 रुपये की राशि अदा की थी और नक्शा पास करा कर मकान एवं नर्सिंग होम बनाया था। यह नक्शा भी नर्सिंग होम के नाम से पास किया गया था। इसमें 78 हजार 480 रुपये का भुगतान विकास शुल्क के तौर पर किया गया था। इसके बाद भी शिकायतकर्ता ने दूसरे प्लाट के लिए विकास शुल्क के नाम पर 48 हजार की राशि 18 सितंबर 2023 को दिए थे।
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सभी हाउस टैक्स व विकास शुल्क कराए थे जमा
शिकायतकर्ता ने नगर परिषद के ऑनलाइन पोर्टल पर दोनों प्लाॅटों की आईडी बनाकर नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने का आग्रह किया था। नगर परिषद ने 9 लाख 41 हजार 248 रुपये की मांग की, जिसमें 8 लाख 82 हजार 198 रुपये विकास शुल्क के नाम पर मांगी गई थी। शिकायतकर्ता ने उच्चाधिकारियों से मिलकर कहा कि उनका नर्सिंग होम लाल डोरा की जमीन पर बना हुआ है। उनके नर्सिंग होम के अनुसार सभी हाउस टैक्स एवं विकास शुल्क जमा कराए जा चुके हैं।
कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाई नगर परिषद
जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष नगर परिषद रेवाड़ी की ओर से दलील दी गई कि यह गली कामर्शीयल घोषित की गई है। ऐसे में विकास शुल्क वसूल किया जाना है। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि नगर परिषद ने कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे जिससे यह समझा जा सके कि इस पर विकास शुल्क लेना जायज है। आयोग ने नगर परिषद को 30 दिन के अंदर शिकायतकर्ता को नो ड्यूज सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया।