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Rewari News: शहरवासियों को राशनिंग से मिलेगा छुटकारा, वाटर टैंक के लिए मिली जमीन

Wed, 06 Mar 2024 01:05 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 06 Mar 2024 01:05 AM IST
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City residents will get relief from rationing, land given for water tank
रेवाड़ी। काफी समय से शहर में चली आ रही पानी की राशनिंग से शहरवासियों को छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है। शहर से सटे गांव भगवानपुर की पंचायत ने जनस्वास्थ्य विभाग को 11 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इस पर वाटर टैंक बनाया जाएगा। इससे करीब तीन लाख की आवादी को पेयजल की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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गांव भगवानपुर में वाटर टैंक के लिए जमीन की मांग पंचायत से की गई। अब जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूरी दस्तावेजों को पूरा कराया जा रहा है। इसके बाद मुख्यालय से मंजूरी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्ष 2015 में शहर को ठीक जलापूर्ति करने के लिए अतिरिक्त वाटर टैंक निर्माण की घोषणा की गई थी। विभाग की ओर से उस वक्त करीब 50 करोड़ रुपये आवंटित कर किए गए थे, लेकिन जमीन न मिलने से कार्य में बीच में अटका गया। इस समय शहर सिंचाई के लिए ही नहीं पेयजल के लिए भी पूरी तरह जवाहर लाल नेहरू कैनाल से आने वाले यमुना के पानी पर निर्भर हैं।
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नहरी का पानी का शोधन कर सप्लाई के लिए रेवाड़ी के कालका गांव में 5 वाटर टैंक और लिसाना में तीन वाटर टैंक बनाए गए हैं। मौजूदा समय में इन्हीं वाटर टैंको से रेवाड़ी शहर की पौने तीन लाख से अधिक की आबादी को पेयजल आपूर्ति की जाती है। नहरी पानी का पूरी तरह से भंडारण न हो पाने से रेवाड़ी शहर के लोगों को एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल की सप्लाई की जाती है।
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जिले को मिलता है महज 510 क्यूसेक पानी

पानीपत स्थित खूबडू से रेवाड़ी तक जवाहरलाल नेहरू कैनाल के माध्यम से पानी पहुंचता है। इस दौरान नहरी पानी को 18 बार लिफ्ट करना पड़ता है। रेवाड़ी में नहरी पानी की मात्रा करीब 770 क्यूसेक निर्धारित की गई है, लेकिन जिले को महज 510 क्यूसेक पानी ही मिल पाता है। वहीं दूसरी ओर नहरी पानी रेवाड़ी में महज 15 दिन ही चल पाता है।



इसस पहले चांदावास में बनने की जगी थी उम्मीद

जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव चांदवास में करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से एक वाटर टैंक का निर्माण कराया जाना था, लेकिन पंचायत की ओर से जमीन ही चिह्नित नहीं गई। वहीं पिछली पंचायत की ओर से प्रस्ताव दिया गया था, नई पंचायत बनने के बाद प्रक्रिया अधर में लटक गई।

20 बूस्टिंग स्टेशनों से होती है पानी सप्लाई

शहर में नहरी परियोजना पर आधारित पेयजल सप्लाई है। यहां नहर के पानी को कालका और लिसाना में बने जलघरों में एकत्रित किया जाता है। इसके बाद वहां से धारूहेड़ा चुंगी और नगर परिषद में बने टैंक के माध्यम से शहर की कॉलोनियों में पानी सप्लाई छोड़ा जाता है। शहर में पानी के लिए 20 जगह बूस्टिंग स्टेशन बनाए हुए हैं।




गांव भगवानपुर में नया टैंक बनाने के लिए जमीन देखी गई है। पंचायत ने 11 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव भी पास कर दिया है। टैंक बनाने के लिए पूरे दस्तावेज एकत्रित किए जा रहे हैं। इसके बाद स्वीकृति के लिए फाइल को चंडीगढ़ भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलते ही टैंक बनाने की प्रक्रिया सिरे चढ़ पाएगी।--विनय चौहान, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी।
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