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Rewari News: बाल वाटिकाओं में खेल-खेल में पढ़ेंगे बच्चे
Sun, 04 Aug 2024 01:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 04 Aug 2024 01:08 AM IST
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फोटो: 16रेवाड़ी। नांगलतेजू स्थित बाल वाटिका में पढ़ाई करते बच्चे। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले की बाल वाटिकाओं में बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान कराया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने बाल वाटिकाओं के लिए अल्फाबेट प्रिंटेड फ्लोर मैट भिजवाए हैं। इसे बीईओ कार्यालय में उपलब्ध करा दिया गया है।
फ्लोर मैट पर अंग्रेजी और हिंदी के अल्फाबेट प्रिंट हैं। जिले में करीब 315 बाल वाटिका संचालित हैं। प्राइवेट स्कूलों और प्ले स्कूलों की तर्ज पर शिक्षा विभाग ने कम आयु के बच्चों के लिए प्ले स्कूल शुरू किए हैं। सरकारी प्ले स्कूलों को बाल वाटिका का नाम दिया गया है। बाल वाटिका में छह वर्ष से कम आयु के बच्चों का दाखिला किया जाता है। बाल वाटिकाएं आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित हो रही हैं। अधिकारियों के अनुसार इन मैट को बाल वाटिका के कमरों में बिछाया जाएगा। इससे छोटे बच्चे मैट पर लिखे अक्षरों को देखकर उनकी पहचान कर सकेंगे। वहीं, फ्लोर मैट छोटे बच्चों के सुरक्षा मानकों के अनुसार भी हैं। खेल के दौरान फ्लोर मैट के कारण बच्चे को चोट भी नहीं लगेगी।
बाल वाटिका-1 में 3 से 4 वर्ष के बच्चे, बाल वाटिका- 2 में 4 से 5 वर्ष के और बाल वाटिका - 3 में 5 से 6 वर्ष तक के बच्चे जाते हैं। इसके साथ ही 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा बच्चों के भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को स्टेशनरी, बैग, किताबें दी जाती हैं।
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वर्जन:
बाल वाटिका में बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के लिए अल्फाबेट प्रिंटेड फ्लोर मैट भिजवाए जाएंगे। मुख्यालय की तरफ से अल्फाबेट प्रिंटेड फ्लोर मैट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजे जा चुके है। जल्द ही ये मैट बाल वाटिकाओं में भिजवाए जाएंगे। -सत्यपाल धूपिया बीईओ, रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। जिले की बाल वाटिकाओं में बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान कराया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने बाल वाटिकाओं के लिए अल्फाबेट प्रिंटेड फ्लोर मैट भिजवाए हैं। इसे बीईओ कार्यालय में उपलब्ध करा दिया गया है।
फ्लोर मैट पर अंग्रेजी और हिंदी के अल्फाबेट प्रिंट हैं। जिले में करीब 315 बाल वाटिका संचालित हैं। प्राइवेट स्कूलों और प्ले स्कूलों की तर्ज पर शिक्षा विभाग ने कम आयु के बच्चों के लिए प्ले स्कूल शुरू किए हैं। सरकारी प्ले स्कूलों को बाल वाटिका का नाम दिया गया है। बाल वाटिका में छह वर्ष से कम आयु के बच्चों का दाखिला किया जाता है। बाल वाटिकाएं आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित हो रही हैं। अधिकारियों के अनुसार इन मैट को बाल वाटिका के कमरों में बिछाया जाएगा। इससे छोटे बच्चे मैट पर लिखे अक्षरों को देखकर उनकी पहचान कर सकेंगे। वहीं, फ्लोर मैट छोटे बच्चों के सुरक्षा मानकों के अनुसार भी हैं। खेल के दौरान फ्लोर मैट के कारण बच्चे को चोट भी नहीं लगेगी।
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बाल वाटिका-1 में 3 से 4 वर्ष के बच्चे, बाल वाटिका- 2 में 4 से 5 वर्ष के और बाल वाटिका - 3 में 5 से 6 वर्ष तक के बच्चे जाते हैं। इसके साथ ही 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा बच्चों के भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को स्टेशनरी, बैग, किताबें दी जाती हैं।
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वर्जन:
बाल वाटिका में बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के लिए अल्फाबेट प्रिंटेड फ्लोर मैट भिजवाए जाएंगे। मुख्यालय की तरफ से अल्फाबेट प्रिंटेड फ्लोर मैट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजे जा चुके है। जल्द ही ये मैट बाल वाटिकाओं में भिजवाए जाएंगे। -सत्यपाल धूपिया बीईओ, रेवाड़ी।