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पारा चढ़ने से बीमार होने लगे बच्चे
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रेवाड़ी। तापमान बढ़ने से बच्चे बीमार होने लगे हैं। उनके अभिभावक उन्हें सामान्य अस्पतालों और निजी अस्पतालों में रोजाना लेकर पहुंच रहे हैं। इनकी संख्या सैकड़ों में बताई जाती है। अकेले रेवाड़ी शहर में यह आंकड़ा सवा सौ से अधिक बताया जाता है। रविवार को अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25.0 डिग्री सेल्सियस रहा।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी महलावत ने अभिभावकों जरूरी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बच्चों के शरीर बहुत जल्द गर्म होना शुरू हो जाते हैं और उनको जल्द गर्मी का आभास होना शुरू हो जाता है। इसलिए इनको गर्मी से बचाने की आवश्यकता है। गर्मी के मौसम में बच्चों के शरीर में डी-हाइड्रेशन की समस्या देखने को मिलती है। इसलिए अपने बच्चों को अभिभावक भरपूर मात्रा में पानी पीने के लिए प्रेरित करें। यह इस समस्या को दूर करेगा। चूंकि शनिवार को अधिकतम तापमान 46.0 और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा। चिकित्सकों की मानें तो घर पर छोटे बच्चे, क्रैच या नर्सरी कक्षाओं में जाने वाले बच्चों के पेट में नियमित रूप से तरल पदार्थ दिया जाना चाहिए। ताकि उनको भूख न लगे। भूखे होने से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए इन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
बासी खाना और कटे फल बच्चों को खाने के लिए न दें : डॉ. सचिन
चिकित्सक डॉ. सचिन भारद्वाज बताते हैं कि बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कटे फल या फ्रिज में कई दिनों से रखे खाने या पीने के पदार्थ बच्चों को न दें। किसी शादी समारोह या पार्टी में भी खानपान पर विशेष ध्यान दें। खाना खाते वक्त अच्छी तरह हाथ और मुंह को धो लेना जरूरी है। पेयजल की स्वच्छता बेहद जरूरी है क्योंकि जलजनित बीमारियों की वजह से पेट की अधिकांश बीमारियां होती हैं। इनमें सिर दर्द, पेचिश, पेट दर्द, बुखार, शरीर की टूटन आदि शामिल हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को घर से साफ किया हुुआ पानी की बोतल दें। घर की छत पर रखी पानी की टंकी हो, तो उसके पानी या आरओ सिस्टम के पानी की गुणवत्ता और शुद्धता समय-समय पर जांच लें। बुजुर्ग और बच्चों को ऐसा पानी जल्द बीमार कर सकता है। जलापूर्ति लाइन से पेयजल में आई गंदगी भी पेट खराब कर बच्चों को बीमार कर सकती है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी महलावत ने अभिभावकों जरूरी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बच्चों के शरीर बहुत जल्द गर्म होना शुरू हो जाते हैं और उनको जल्द गर्मी का आभास होना शुरू हो जाता है। इसलिए इनको गर्मी से बचाने की आवश्यकता है। गर्मी के मौसम में बच्चों के शरीर में डी-हाइड्रेशन की समस्या देखने को मिलती है। इसलिए अपने बच्चों को अभिभावक भरपूर मात्रा में पानी पीने के लिए प्रेरित करें। यह इस समस्या को दूर करेगा। चूंकि शनिवार को अधिकतम तापमान 46.0 और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा। चिकित्सकों की मानें तो घर पर छोटे बच्चे, क्रैच या नर्सरी कक्षाओं में जाने वाले बच्चों के पेट में नियमित रूप से तरल पदार्थ दिया जाना चाहिए। ताकि उनको भूख न लगे। भूखे होने से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए इन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
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बासी खाना और कटे फल बच्चों को खाने के लिए न दें : डॉ. सचिन
चिकित्सक डॉ. सचिन भारद्वाज बताते हैं कि बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कटे फल या फ्रिज में कई दिनों से रखे खाने या पीने के पदार्थ बच्चों को न दें। किसी शादी समारोह या पार्टी में भी खानपान पर विशेष ध्यान दें। खाना खाते वक्त अच्छी तरह हाथ और मुंह को धो लेना जरूरी है। पेयजल की स्वच्छता बेहद जरूरी है क्योंकि जलजनित बीमारियों की वजह से पेट की अधिकांश बीमारियां होती हैं। इनमें सिर दर्द, पेचिश, पेट दर्द, बुखार, शरीर की टूटन आदि शामिल हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को घर से साफ किया हुुआ पानी की बोतल दें। घर की छत पर रखी पानी की टंकी हो, तो उसके पानी या आरओ सिस्टम के पानी की गुणवत्ता और शुद्धता समय-समय पर जांच लें। बुजुर्ग और बच्चों को ऐसा पानी जल्द बीमार कर सकता है। जलापूर्ति लाइन से पेयजल में आई गंदगी भी पेट खराब कर बच्चों को बीमार कर सकती है।
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