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Rewari News: बच्चों के नाजुक कंधों पर बस्ते का बोझ नहीं, उम्मीदों के पंख हों
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स्कूलों का निरीक्षण करते हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य सुमन राणा व गणेश। स्रोत
रेवाड़ी। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य सुमन राणा व गणेश की तरफ से विभिन्न स्कूलों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान समर वैली पब्लिक स्कूल भांडौर, प्ले स्कूल गोलियांकी, राजकीय माध्यमिक विद्यालय मनेठी, आंगनबाड़ी प्ले स्कूल मनेठी में जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि बच्चों के बैग उनकी उम्र व उनके वजन के हिसाब से काफी भारी है। इस मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी व जिला बाल कल्याण समिति की टीम भी मौजूद रही।
उनके अनुसार बच्चों के नाजुक कंधों पर बस्ते का बोझ नहीं, उम्मीदों के पंख होने चाहिए। पहले से ही तेज गति से भागती जिंदगी में बच्चों पर वजनी बस्ता बढ़ता तनाव का कारण बना हुआ है। मासूम बचपन में स्कूली बस्तों का बोझ कम होने की बजाय बढ़ना चिंता का विषय है।
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हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग व टीम ने बच्चों के मिड-डे मील का भी निरीक्षण किया। आयोग ने कहा कि पोषण भी शिक्षा के साथ संरक्षण का अहम विषय है। आयोग ने बच्चों से संबंधित अन्य मुख्य मुद्दे जैसे प्ले ग्राउंड में बच्चों की सुरक्षा, शौचालयों में स्वच्छता आदि का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल में अनुपस्थित बच्चों पर संज्ञान लेने और उनके अभिभावकों से बातचीत करने के निर्देश दिए।
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निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि बच्चों के बैग उनकी उम्र व उनके वजन के हिसाब से काफी भारी है। इस मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी व जिला बाल कल्याण समिति की टीम भी मौजूद रही।
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उनके अनुसार बच्चों के नाजुक कंधों पर बस्ते का बोझ नहीं, उम्मीदों के पंख होने चाहिए। पहले से ही तेज गति से भागती जिंदगी में बच्चों पर वजनी बस्ता बढ़ता तनाव का कारण बना हुआ है। मासूम बचपन में स्कूली बस्तों का बोझ कम होने की बजाय बढ़ना चिंता का विषय है।
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हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग व टीम ने बच्चों के मिड-डे मील का भी निरीक्षण किया। आयोग ने कहा कि पोषण भी शिक्षा के साथ संरक्षण का अहम विषय है। आयोग ने बच्चों से संबंधित अन्य मुख्य मुद्दे जैसे प्ले ग्राउंड में बच्चों की सुरक्षा, शौचालयों में स्वच्छता आदि का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल में अनुपस्थित बच्चों पर संज्ञान लेने और उनके अभिभावकों से बातचीत करने के निर्देश दिए।