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Rewari News: बोदन सिंह ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ लड़ी थी लड़ाई
Wed, 13 Mar 2024 01:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 13 Mar 2024 01:37 AM IST
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बावल। कस्बे के उपमंडल कार्यालय से पूर्व दिशा की ओर बसा गांव झाबुआ करीब 800 साल पूर्व दिल्ली के नरेला से आए झाबरमल ने बसाया था। करीब 4000 आबादी वाला यह गांव राजस्थान के जिला खेरथल तिजारा की सीमा से सटा है। गांव में लगभग 2800 से अधिक मतदाता हैं। इनमें 1300 महिलाएं शामिल हैं। बोदन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान और चीन के खिलाफ लड़ाइयां लड़ी हैं।
जाट बाहुल्य गांव में विभिन्न जातियों के लोग मिल जुलकर रहते हैं। झाबुआ गांव बिहड़ के नाम से भी प्रसिद्ध है। गांव में बड़ा जंगल बिहड़ होता है। इससे गांव को बिहड़ के नाम से भी जाना जाता है। गांव में एक सैनिक को वीर चक्र से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त गांव में चार स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। 1962-65 और 1971 की लड़ाई लड़ने वाले सैनिक सूबेदार बोदन सिंह आज भी जीवित हैं। जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। गांव में छोटे-मोटे झगड़े आपस में ही सुलझा लिए जाते हैं। थाना-चौकी नहीं जाना पड़ता है।
गांव में 1400 एकड़ में है मोर प्रजनन केंद्र
परिवहन सुविधा के अभाव में ग्रामीण निजी वाहनों में लटक कर यात्रा करते हैं। छात्र और छात्राओं को पढ़ने के लिए परेशानी होती है। गांव में पशु स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खेल स्टेडियम, आंगनबाड़ी आदि की सुविधाएं हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पशु अस्पताल में चिकित्सक कभी-कभी दिखाई देते हैं। इसके अतिरिक्त गांव में करीब 1400 एकड़ में बना मोर प्रजनन केंद्र है। गांव विकास के मामले में भी काफी आगे निकल चुका है। गांव की गलियों से लेकर संपर्क मार्ग भी पक्के हैं। बिहड़ में वन्य जीवों को देखने के लिए प्रदेश भर के लोग भ्रमण करने आते हैं। इससे गांव की अलग पहचान बनी हुई है।
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बच्चों में शिक्षा के प्रति अच्छा रुझान
गांव के बच्चों में शिक्षा के प्रति अच्छा रुझान है। कई लोग सरकारी नौकरियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बोदन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान और चीन के खिलाफ तीनों लड़ाइयां लड़ी हैं। गांव में सेना को लेकर युवाओं में विशेष रुझान रहता है। सतेंद्र झाबुआ ने बताया कि गांव के युवाओं में विभिन्न खेलों के प्रति अच्छा रुझान है। कबड्डी में गांव के बच्चों ने देश में प्रदेश स्तर पर नाम रोशन किया है।
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जाट बाहुल्य गांव में विभिन्न जातियों के लोग मिल जुलकर रहते हैं। झाबुआ गांव बिहड़ के नाम से भी प्रसिद्ध है। गांव में बड़ा जंगल बिहड़ होता है। इससे गांव को बिहड़ के नाम से भी जाना जाता है। गांव में एक सैनिक को वीर चक्र से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त गांव में चार स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। 1962-65 और 1971 की लड़ाई लड़ने वाले सैनिक सूबेदार बोदन सिंह आज भी जीवित हैं। जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। गांव में छोटे-मोटे झगड़े आपस में ही सुलझा लिए जाते हैं। थाना-चौकी नहीं जाना पड़ता है।
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गांव में 1400 एकड़ में है मोर प्रजनन केंद्र
परिवहन सुविधा के अभाव में ग्रामीण निजी वाहनों में लटक कर यात्रा करते हैं। छात्र और छात्राओं को पढ़ने के लिए परेशानी होती है। गांव में पशु स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खेल स्टेडियम, आंगनबाड़ी आदि की सुविधाएं हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पशु अस्पताल में चिकित्सक कभी-कभी दिखाई देते हैं। इसके अतिरिक्त गांव में करीब 1400 एकड़ में बना मोर प्रजनन केंद्र है। गांव विकास के मामले में भी काफी आगे निकल चुका है। गांव की गलियों से लेकर संपर्क मार्ग भी पक्के हैं। बिहड़ में वन्य जीवों को देखने के लिए प्रदेश भर के लोग भ्रमण करने आते हैं। इससे गांव की अलग पहचान बनी हुई है।
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बच्चों में शिक्षा के प्रति अच्छा रुझान
गांव के बच्चों में शिक्षा के प्रति अच्छा रुझान है। कई लोग सरकारी नौकरियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बोदन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान और चीन के खिलाफ तीनों लड़ाइयां लड़ी हैं। गांव में सेना को लेकर युवाओं में विशेष रुझान रहता है। सतेंद्र झाबुआ ने बताया कि गांव के युवाओं में विभिन्न खेलों के प्रति अच्छा रुझान है। कबड्डी में गांव के बच्चों ने देश में प्रदेश स्तर पर नाम रोशन किया है।