{"_id":"6499ec4f54c7af1f6a0ff6b4","slug":"belgaum-auto-charging-arbitrary-fare-due-to-lack-of-city-service-rewari-news-c-198-1-rew1001-1595-2023-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: सिटी सेवा के अभाव में मनमाना किराया वसूल रहे बेलगाम ऑटो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: सिटी सेवा के अभाव में मनमाना किराया वसूल रहे बेलगाम ऑटो
विज्ञापन
रेवाड़ी। शहर में सिटी बस सेवा का संचालन नहीं होने का लाभ ऑटो चालक उठा रहे हैं। प्रशासन की मिलीभगत से शहर में ऑटो चालकों की मनमानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। महिलाओं से बदतमीजी के साथ-साथ ऑटो चालक ट्रैफिक नियम कानूनों की भी जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। परिवहन विभाग की ओर से ऑटो चालक के अलावा दो सवारियों की अनुमति होती है, लेकिन एक ऑटो में आठ से लेकर 12 सवारियां बैठाई जाती है। हालांकि पुलिस की ओर से ऑटो चालकों के लिए स्टैंड बनाने के साथ नियमों का पालन कराने की बात कहीं जा रही है।
मनमाने ढंग से ऑटो की पार्किंग, सड़क पर लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बन रही है। ऑटो रिक्शा में न तो मोबाइल नंबर लिखे गए हैं और न ही उनके चालकों ने अबतक अपना कॉमर्शियल लाइसेंस बनवाया है। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई करने ट्रैफिक पुलिस और आरटीए उन पर कार्रवाई करने में कोताही बरत रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या फिर शहर के बीच चौक चौराहे हो सभी जगह लोग बेलगाम ऑटो चालकों से परेशान है।
शहर में आठ सौ से अधिक ऑटो
शहर में आठ सौ से अधिक ऑटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश के पास ट्रैफिक मानकों का पालन नहीं कर रहे है। रेलवे परिसर में ऑटो चालक की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि वह यात्रियों से मारपीट तक करने को उतारू हैं। प्लेटफार्म पर ट्रेन रुकते ही चालक यात्रियों को अपनी-अपनी ऑटो में बैठने उनसे जोर जबरदस्ती करते हैं, जिसकी वजह से रोजाना यात्रियों के साथ कई बार मारपीट हो जाती है। वहीं मनमाने ढंग से ऑटो की पार्किंग के चलते स्टेशन परिसर के बाहर जाम जैसी समस्या से भी लोगों को जूझना पड़ता है। इनकी मनमानी पर आरपीएफ, जीआरपी तो दूर ट्रैफिक पुलिस भी गंभीर नहीं है। यहीं वजह है कि बढ़ती संख्या के साथ-साथ उनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
विज्ञापन
प्रदूषण भी बढ़ाते है ऑटो
शहर में दौड़ने वाले दर्जनों ऑटो ऐसे हैं, जो कंडम हो चुके हैं। कंडम ऑटो से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है। इसकी रोकथाम के लिए शासन ने वाहनों के प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच करने के प्रावधान है। इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस द्वारा ऐसे ऑटो चालकों पर कार्रवाई करने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं ले रहा है।
स्टेशन परिसर में अव्यवस्था का आलम
रेलवे स्टेशन परिसर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। ट्रेनों के आने के बाद तो स्थिति और खराब हो जाती है। ऑटो चालक यात्रियों को बैठाने के चक्कर में कहीं भी ऑटो को खड़ा कर देते हैं। इससे अन्य यात्रियों और वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यात्रियों की सुरक्षा भी नजरअंदाज
यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी सुरक्षित नहीं है। नियमों के मुताबिक ऑटो चालकों के सीट के पीछे संबंधित ऑटो चालाक का नाम, मोबाइल नंबर, लाइसेंस नंबर गाड़ी नंबर लिखा जाना है। इतना ही नहीं उनमें चाइल्ड लाइन, हेल्प लाइन के भी नंबर लिखे जाने हैं, लेकिन शहर में अधिकांश ऑटो यह सभी चीजें लिखी हुई नहीं हैं।
क्षमता से अधिक सवारी ढोते हैं
ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारी बैठा रहे हैं। चालाक सीट पर भी दो से तीन यात्रियों को जबरदस्ती बैठाया जाता है। बदले में मनमाना किराया वसूला जा रहा है। बाहरी व्यक्ति से तय किराया से अधिक पैसे भी लिए जा रहे हैं। अनजान यात्रियों को कई बार गलत स्थान पर उतार दिया जाता है।
शहर में ऑटो चालकों की मनमानी नहीं होने दी जाएगी। निर्धारित स्टैंड भी बनाए जाएंगे। अभियान चलाकर ऑटो के कागजातों, लाइसेंस व अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
-संजीव बल्हारा, डीएसपी रेवाड़ी
विज्ञापन
मनमाने ढंग से ऑटो की पार्किंग, सड़क पर लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बन रही है। ऑटो रिक्शा में न तो मोबाइल नंबर लिखे गए हैं और न ही उनके चालकों ने अबतक अपना कॉमर्शियल लाइसेंस बनवाया है। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई करने ट्रैफिक पुलिस और आरटीए उन पर कार्रवाई करने में कोताही बरत रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या फिर शहर के बीच चौक चौराहे हो सभी जगह लोग बेलगाम ऑटो चालकों से परेशान है।
विज्ञापन
शहर में आठ सौ से अधिक ऑटो
शहर में आठ सौ से अधिक ऑटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश के पास ट्रैफिक मानकों का पालन नहीं कर रहे है। रेलवे परिसर में ऑटो चालक की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि वह यात्रियों से मारपीट तक करने को उतारू हैं। प्लेटफार्म पर ट्रेन रुकते ही चालक यात्रियों को अपनी-अपनी ऑटो में बैठने उनसे जोर जबरदस्ती करते हैं, जिसकी वजह से रोजाना यात्रियों के साथ कई बार मारपीट हो जाती है। वहीं मनमाने ढंग से ऑटो की पार्किंग के चलते स्टेशन परिसर के बाहर जाम जैसी समस्या से भी लोगों को जूझना पड़ता है। इनकी मनमानी पर आरपीएफ, जीआरपी तो दूर ट्रैफिक पुलिस भी गंभीर नहीं है। यहीं वजह है कि बढ़ती संख्या के साथ-साथ उनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
विज्ञापन
प्रदूषण भी बढ़ाते है ऑटो
शहर में दौड़ने वाले दर्जनों ऑटो ऐसे हैं, जो कंडम हो चुके हैं। कंडम ऑटो से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है। इसकी रोकथाम के लिए शासन ने वाहनों के प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच करने के प्रावधान है। इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस द्वारा ऐसे ऑटो चालकों पर कार्रवाई करने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं ले रहा है।
स्टेशन परिसर में अव्यवस्था का आलम
रेलवे स्टेशन परिसर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। ट्रेनों के आने के बाद तो स्थिति और खराब हो जाती है। ऑटो चालक यात्रियों को बैठाने के चक्कर में कहीं भी ऑटो को खड़ा कर देते हैं। इससे अन्य यात्रियों और वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यात्रियों की सुरक्षा भी नजरअंदाज
यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी सुरक्षित नहीं है। नियमों के मुताबिक ऑटो चालकों के सीट के पीछे संबंधित ऑटो चालाक का नाम, मोबाइल नंबर, लाइसेंस नंबर गाड़ी नंबर लिखा जाना है। इतना ही नहीं उनमें चाइल्ड लाइन, हेल्प लाइन के भी नंबर लिखे जाने हैं, लेकिन शहर में अधिकांश ऑटो यह सभी चीजें लिखी हुई नहीं हैं।
क्षमता से अधिक सवारी ढोते हैं
ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारी बैठा रहे हैं। चालाक सीट पर भी दो से तीन यात्रियों को जबरदस्ती बैठाया जाता है। बदले में मनमाना किराया वसूला जा रहा है। बाहरी व्यक्ति से तय किराया से अधिक पैसे भी लिए जा रहे हैं। अनजान यात्रियों को कई बार गलत स्थान पर उतार दिया जाता है।
शहर में ऑटो चालकों की मनमानी नहीं होने दी जाएगी। निर्धारित स्टैंड भी बनाए जाएंगे। अभियान चलाकर ऑटो के कागजातों, लाइसेंस व अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
-संजीव बल्हारा, डीएसपी रेवाड़ी