{"_id":"6755c54ef7b86fbed30f984b","slug":"before-the-swachh-survekshan-22-toilets-in-the-city-will-be-repaired-for-rs-4462-lakh-rewari-news-c-198-1-rew1001-212546-2024-12-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले शहर में 22 शौचालयों की 44.62 लाख रुपयों से होगी मरम्मत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले शहर में 22 शौचालयों की 44.62 लाख रुपयों से होगी मरम्मत
Sun, 08 Dec 2024 09:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 08 Dec 2024 09:41 PM IST
विज्ञापन
नाईवाली चौक के पास बने शौचालय की बदहाल दशा। संवाद
रेवाड़ी। शहर में नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले शौचालय की दशा जल्द सुधरी नजर आएगी। नगर परिषद की तरफ से 44 लाख 62 हजार रुपये की लागत से 22 शौचालयों और 7 यूरीनिल स्पॉट की मरम्मत करवाई जाएगी। फिलहाल टेंडर जारी हो चुका है, टेंडर की अंतिम तिथि 16 दिसंबर है।
दूसरी ओर स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए टीम अब कभी भी आ सकती है। ऐसे में नगर परिषद की कोशिश रहेगी की शौचालयों की दशा जल्द से जल्द सुधारी जा सके। मौजूदा समय में शहर के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति काफी खराब है। कहीं पानी की टंकी नहीं तो कहीं टंकी है लेकिन उसमें पानी नहीं है। सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। इसकी वजह से अधिकतर सार्वजनिक शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं। बदबू की वजह से उसके नजदीक से गुजरना भी मुश्किल होता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार देखरेख के अभाव में इन शौचालयों की स्थिति खराब होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि नगर परिषद ने शौचालयों की देखरेख के लिए पैसा खर्च नहीं किया। परंतु पैसा खर्च करने के बाद बावजूद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। शहर में रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों लोग खरीदारी करने आते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें नगर परिषद के शौचालयों का प्रयोग करने के बारे में सोचना पड़ता है, क्योंकि ये साफ-सफाई के अभाव में गंदगी से अटे पड़े हैं। संवाद
विज्ञापन
केंद्र सरकार के संज्ञान लेने के बाद बने टॉयलेट भी बदहाल
बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन की ब्रांड एंबेसडर प्रियंका यादव द्वारा करीब 5 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट किया गया था। इसमें प्रियंका ने शहर में शौचालय नहीं होने का दर्द बयां किया तो प्रदेश सरकार से लेकर अधिकारियों तक नींद टूटी। शहर में सुभाष पार्क और नेहरू पार्क के अलावा 2 अन्य जगह शौचालय का निर्माण कराया गया था। समय बीतने के साथ देखरेख के अभाव में अब सभी शौचालय बदहाल हालत में हैं।
इस बार शहर को मिला था ओडीएफ ++
बता दें कि इस साल भारत सरकार की ओर से जारी की गई रैंकिंग में ओडीएफ ++ का सर्टिफिकेट लेकर शहर अव्वल बना था। जबकि बावल को ओडीएफ + रैंक मिला था। धारूहेड़ा की स्थिति काफी खराब है, जिसे ओडीएफ रैंक दिया गया है। ओडीएफ में खुले में शौच से मुक्त की जांच होती है। ओडीएफ + में शहर में यूरीनल का उपयोग लोग करते हैं इसकी पुष्टि होती है। ओडीएफ ++ में शहर से निकलने वाले मल के निपटान की व्यवस्था क्या है यह देखी जाती है। इस बार शहर तीनों ही कैटेगरी में अच्छी स्थिति में पाया गया।
मोबाइल टॉयलेट की भी दशा हुई खराब
शहर को खुले में शौच मुक्त करने के लिए करीब पांच जगह मोबाइल टॉयलेट रखे गए थे, लेकिन अब ये भी करीब 2 साल से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। मोबाइल टॉयलेट महाराणा प्रताप चौक स्थित नगर परिषद कार्यालय में जर्जर हो रहे हैं। इन टॉयलेट के पोट, टैंक व पानी की टंकी टूट चुकी है। गोकल गेट, सती कॉलोनी, बारा हजारी, नाईवाली चौक व रेलवे रोड स्थित टॉयलेट में सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है।
महिलाओं को होती है सबसे अधिक परेशानी
शहर में खासकर मेन बाजार में कई साल से शौचालय बनाने की मांग चली आ रही थी। चूंकि बाजार में आने वाले बाहरी लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या ये ही होती थी। इसके बाद गोकल गेट के पास भी एक शौचालय बनाया गया। खासकर शौचालय नहीं होने से महिलाओं को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी थी। गोकल गेट पर बने शौचालय में भी सफाई का अभाव है। बारा हजारी में बनाए गए शौचालय की हालत काफी दयनीय है।
नगर परिषद की तरफ से 44 लाख 62 हजार रुपये की लागत से 22 शौचालयों और 7 यूरीनिल की मरम्मत करवाई जाएगी। फिलहाल टेंडर जारी हो चुका है। अलॉटमेंट होते ही जल्द ही काम शुरू करवाया जाएगा।
-सुधीर, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, रेवाड़ी
विज्ञापन
दूसरी ओर स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए टीम अब कभी भी आ सकती है। ऐसे में नगर परिषद की कोशिश रहेगी की शौचालयों की दशा जल्द से जल्द सुधारी जा सके। मौजूदा समय में शहर के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति काफी खराब है। कहीं पानी की टंकी नहीं तो कहीं टंकी है लेकिन उसमें पानी नहीं है। सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। इसकी वजह से अधिकतर सार्वजनिक शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं। बदबू की वजह से उसके नजदीक से गुजरना भी मुश्किल होता है।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों के अनुसार देखरेख के अभाव में इन शौचालयों की स्थिति खराब होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि नगर परिषद ने शौचालयों की देखरेख के लिए पैसा खर्च नहीं किया। परंतु पैसा खर्च करने के बाद बावजूद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। शहर में रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों लोग खरीदारी करने आते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें नगर परिषद के शौचालयों का प्रयोग करने के बारे में सोचना पड़ता है, क्योंकि ये साफ-सफाई के अभाव में गंदगी से अटे पड़े हैं। संवाद
विज्ञापन
केंद्र सरकार के संज्ञान लेने के बाद बने टॉयलेट भी बदहाल
बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन की ब्रांड एंबेसडर प्रियंका यादव द्वारा करीब 5 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट किया गया था। इसमें प्रियंका ने शहर में शौचालय नहीं होने का दर्द बयां किया तो प्रदेश सरकार से लेकर अधिकारियों तक नींद टूटी। शहर में सुभाष पार्क और नेहरू पार्क के अलावा 2 अन्य जगह शौचालय का निर्माण कराया गया था। समय बीतने के साथ देखरेख के अभाव में अब सभी शौचालय बदहाल हालत में हैं।
इस बार शहर को मिला था ओडीएफ ++
बता दें कि इस साल भारत सरकार की ओर से जारी की गई रैंकिंग में ओडीएफ ++ का सर्टिफिकेट लेकर शहर अव्वल बना था। जबकि बावल को ओडीएफ + रैंक मिला था। धारूहेड़ा की स्थिति काफी खराब है, जिसे ओडीएफ रैंक दिया गया है। ओडीएफ में खुले में शौच से मुक्त की जांच होती है। ओडीएफ + में शहर में यूरीनल का उपयोग लोग करते हैं इसकी पुष्टि होती है। ओडीएफ ++ में शहर से निकलने वाले मल के निपटान की व्यवस्था क्या है यह देखी जाती है। इस बार शहर तीनों ही कैटेगरी में अच्छी स्थिति में पाया गया।
मोबाइल टॉयलेट की भी दशा हुई खराब
शहर को खुले में शौच मुक्त करने के लिए करीब पांच जगह मोबाइल टॉयलेट रखे गए थे, लेकिन अब ये भी करीब 2 साल से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। मोबाइल टॉयलेट महाराणा प्रताप चौक स्थित नगर परिषद कार्यालय में जर्जर हो रहे हैं। इन टॉयलेट के पोट, टैंक व पानी की टंकी टूट चुकी है। गोकल गेट, सती कॉलोनी, बारा हजारी, नाईवाली चौक व रेलवे रोड स्थित टॉयलेट में सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है।
महिलाओं को होती है सबसे अधिक परेशानी
शहर में खासकर मेन बाजार में कई साल से शौचालय बनाने की मांग चली आ रही थी। चूंकि बाजार में आने वाले बाहरी लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या ये ही होती थी। इसके बाद गोकल गेट के पास भी एक शौचालय बनाया गया। खासकर शौचालय नहीं होने से महिलाओं को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी थी। गोकल गेट पर बने शौचालय में भी सफाई का अभाव है। बारा हजारी में बनाए गए शौचालय की हालत काफी दयनीय है।
नगर परिषद की तरफ से 44 लाख 62 हजार रुपये की लागत से 22 शौचालयों और 7 यूरीनिल की मरम्मत करवाई जाएगी। फिलहाल टेंडर जारी हो चुका है। अलॉटमेंट होते ही जल्द ही काम शुरू करवाया जाएगा।
-सुधीर, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, रेवाड़ी

नाईवाली चौक के पास बने शौचालय की बदहाल दशा। संवाद