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Rewari News: बाबू बालमुकुंद गुप्त की हवेली बदहाली के हवाले
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बाबू बालमुकुंद गुप्त की जर्जर हवेली। संवाद
जगदीश यादव
कोसली। बाबू बालमुकुंद गुप्त की स्मृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन आज भी यह मांग सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। गुड़ियानी स्थित उनकी ऐतिहासिक हवेली जिसे राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए कई बार आवाज उठ चुकी है आज भी उपेक्षा की शिकार है। हवेली जर्जर हो चुकी है। इस पर ध्यान देने की काफी जरूरत है।
हरियाणा सरकार की ओर से दो साल पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस हवेली में ई-लाइब्रेरी, संग्रहालय और स्मारक बनाने की घोषणा की थी लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे क्षेत्रीय साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों में रोष है।
ग्रामीणों का कहना है कि बालमुकुंद गुप्त की विरासत को सहेजने की जिम्मेदारी केवल सरकारी घोषणाओं से पूरी नहीं होगी। इसके लिए ईमानदार और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में गुप्त जैसे क्रांतिकारी पत्रकारों की भूमिका को यदि इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला तो यह हमारी सामूहिक भूल होगी।
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गुप्त की स्मृति में अब तक हवेली को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना, उनके नाम पर पत्रकारिता शोध संस्थान खोलना, डाक टिकट जारी करना व गुड़ियानी व रेवाड़ी में उनके भव्य स्मारक स्थापित करने जैसी प्रमुख मांगें अधूरी हैं।
संरक्षित और प्रचारित किया जाना जरूरी
बाबू बालमुकुंद परिषद के संस्थापक महासचिव सत्यवीर नाहड़िया ने बताया कि हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा के कार्यकाल में बालमुकुंद गुप्त को स्मरण करने की जो प्रेरक पहल हुई थी वह अब भी साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से किसी हद तक जारी है। अकादमी प्रत्येक वर्ष उनके जन्मदिवस या पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेती रही है लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्थायी संरचना या योजना सामने नहीं आई है। उनका जीवन, लेखनी और विचारधारा आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है जिसे संरक्षित और प्रचारित किया जाना चाहिए।
बीडीपीओ अनील यादव ने बताया कि घोषणा अनुसार हवेली में लाइब्रेरी बननी है, जिसके लिए हवेली की स्थिति रिपोर्ट लोकनिर्माण विभाग से मांगी गई है। उनकी रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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कोसली। बाबू बालमुकुंद गुप्त की स्मृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन आज भी यह मांग सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। गुड़ियानी स्थित उनकी ऐतिहासिक हवेली जिसे राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए कई बार आवाज उठ चुकी है आज भी उपेक्षा की शिकार है। हवेली जर्जर हो चुकी है। इस पर ध्यान देने की काफी जरूरत है।
हरियाणा सरकार की ओर से दो साल पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस हवेली में ई-लाइब्रेरी, संग्रहालय और स्मारक बनाने की घोषणा की थी लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे क्षेत्रीय साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों में रोष है।
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ग्रामीणों का कहना है कि बालमुकुंद गुप्त की विरासत को सहेजने की जिम्मेदारी केवल सरकारी घोषणाओं से पूरी नहीं होगी। इसके लिए ईमानदार और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में गुप्त जैसे क्रांतिकारी पत्रकारों की भूमिका को यदि इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला तो यह हमारी सामूहिक भूल होगी।
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गुप्त की स्मृति में अब तक हवेली को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना, उनके नाम पर पत्रकारिता शोध संस्थान खोलना, डाक टिकट जारी करना व गुड़ियानी व रेवाड़ी में उनके भव्य स्मारक स्थापित करने जैसी प्रमुख मांगें अधूरी हैं।
संरक्षित और प्रचारित किया जाना जरूरी
बाबू बालमुकुंद परिषद के संस्थापक महासचिव सत्यवीर नाहड़िया ने बताया कि हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा के कार्यकाल में बालमुकुंद गुप्त को स्मरण करने की जो प्रेरक पहल हुई थी वह अब भी साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से किसी हद तक जारी है। अकादमी प्रत्येक वर्ष उनके जन्मदिवस या पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेती रही है लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्थायी संरचना या योजना सामने नहीं आई है। उनका जीवन, लेखनी और विचारधारा आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है जिसे संरक्षित और प्रचारित किया जाना चाहिए।
बीडीपीओ अनील यादव ने बताया कि घोषणा अनुसार हवेली में लाइब्रेरी बननी है, जिसके लिए हवेली की स्थिति रिपोर्ट लोकनिर्माण विभाग से मांगी गई है। उनकी रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।