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री-कैलिब्रेशन के बाद भी 95 एटीएम बूथ खाली
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Fri, 23 Dec 2016 11:59 PM IST
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पटेलनगर स्थित एचडीएफसी एटीएम पर गुरुवार को लगी लंबी कतार।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले की एटीएम में री-कैलिब्रेशन का कार्य पूरा होने के बाद भी करीब 95 से अधिक एटीएम बूथ खाली पड़े हैं। नोटबंदी को 46 दिन बीच चुके हैं। एटीएम बूथों पर उपभोक्ताओं की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि बैंक शाखाओं में हालात कुछ हद तक सुधरे हैं लेकिन एटीएम पर उपभोक्ताओं की परेशानी ज्यों की त्यों बनी है।
नोटबंदी की शुरूआत में बैंककर्मियों के पास एटीएम के री-कैलिब्रेशन और कैसेट चेंज नहीं होने की परेशानी थी। बैंकों का आश्वासन था कि यह कार्य पूरा होते ही सभी एटीएम में पैसा उपलब्ध होगा। 46 दिन बाद भी हालात जस के तस हैं। अब बैंक फिर से कैश की किल्लत का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो कुछ सरकारी और निजी बैंक शाखाएं ब्रांच से सटे एटीएम मशीनों में तो कैश डाल रही हैं, लेकिन ब्रांच से दूर शहर, बाजार या अन्य किसी स्थान पर स्थित एटीएम मशीन में बिल्कुल भी कैश नहीं डला है। इसके पीछे बैंकों को अपने ब्रांच से संबंधित उपभोक्ताओं को पहले सुविधा देने का कांसेप्ट भी माना जा रहा है। एटीएम मशीनों में अन्य बैंकों के खाताधारक भी कैश निकाल सकते हैं। इसीलिए संबंधित बैंक अधिक से अधिक कैश अपने ग्राहकों के लिए बचा रहा है। ऐसे में आधे से अधिक एटीएम बूथ पिछले कई दिनों से सूने पड़े हैं।
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करेंसी शार्टेज भी बड़ा कारण
बैंककर्मियों का कहना है कि बैंक शाखा में कैश विड्राल के लिए आने वाले उपभोक्ताओं के लिए ही पर्याप्त कैश नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में सभी एटीएम मशीनों में कैश डाला, तो शाखा में कैश की समस्या बन जाएगी। इसी के चलते शहरभर के ब्रांच से सटे एटीएम बूथ ही सुचारु हैं। इसके अलावा अन्य एटीएम बूथ आउट ऑफ कैश हैं।
कंपनी कर्मचारी सर्वाधिक प्रभावित
धारूहेड़ा और बावल औद्योगिक क्षेत्र में दूसरे प्रांतों के हजारों कर्मचारी कंपनियों में काम करते हैं। इन कर्मचारियों बैंक खाता जिले से भिन्न किसी क्षेत्र की बैंक शाखा में है। इन लोगों के पास एटीएम से पैसा कैश प्राप्त करना ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन एटीएम मशीनों की माली हालत ने कंपनी कर्मचारियों के दैनिक खर्चे व जरूरतों पर लगाम लगा दी है।
आरबीआई गाइड लाइन से अधिकारी से लेकर उपभोक्ता तक कंफ्यूज
रेवाड़ी। नोटबंदी के बाद पैसों के लेन-देन को लेकर लगातार बदलते फैसलों से उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। नोटबंदी के 46 दिनों में आरबीआई ने 60 से अधिक सर्कुलर जारी किए हैं। ऐसे में आम उपभोक्ता आरबीआई की गाइड लाइन और बैंक की कतार में फंस कर खड़ा है।
गत मंगलवार और बुधवार को बैंक शाखाओं ने उपभोक्ताओं ने सेल्फ डिक्लेरेशन के साथ एक मुश्त पुराने नोट जमा कराए, जिसको लेकर उपभोक्ताओं ने रोष भी प्रकट किया था। वहीं गुरुवार को लोगों ने बिना फॉर्म के पुराने नोट जमा कराए। उपभोक्ताओं ने इसे केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच सामंजस्य की कमी बताया है। दो दिनों में एक ही एक फैसला बदल जाने से उपभोक्ता और भी उलझ गए हैं। आरबीआई ने बुधवार को स्पष्ट किया केवाईसी पूर्ण वाले उपभोक्ता 5 हजार से अधिक की राशि 30 दिसंबर तक कितनी ही बार जमा करा सकते हैं। जबकि कई बैंकों में उपभोक्ताओं को 5 हजार से अधिक की राशि केवल एक बार ही जमा कराने की बात कही जा रही है, जिसमें कोई पूछताछ नहीं होगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को अभी भी केवाईसी डॉक्यूमेंट या विदआउट केवाईसी डॉक्यूमेंट के बिना कितने पैसे जमा होंगे। बिना केवाईसी वाला खाताधारक पांच रुपये कितनी बार जमा करा सकता है आदि कई दुविधाएं लोगों को परेशान कर रही हैं।
शहर की विभिन्न बैंक शाखाओं के ब्रांच मैनेजर तक भी आरबीआई सर्कुलरों को लेकर कंफ्यूज हैं। आरबीआई सर्कुलर कहता है कि केवाईसी खाताधारक 30 दिसंबर तक कितने भी पैसे कितनी बार ही जमा करा सकते हैं। कई बैंकों में एक मुश्त पैसा जमा करने के बाद अगले दिन पांच हजार की भी राशि जमा नहीं करने की सूचना दी गई।
चौदह ट्रांजेक्शन मोड्स से आसान होगी लाइफ
रेवाड़ी। इन दिनों कैश की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ता चौदह से अधिक ट्रांजेक्शन मोड्स को अपनाकर अपनी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकते हैं। पीएनबी ग्रामीण स्व: रोजगार ट्रेनिंग संस्थान के निदेशक राजेंद्र निगम ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताए बताए विभिन्न ट्रांजेक्शन मोड्स के लाभ।
ट्रांजेक्शन मोड्स:
चेक- किसी भी बैंक का खाताधारक अपनी संबंधित ब्रांच से चेक बुक इश्यू करवाकर चेक से कैश रिसीव करना, किसी अन्य के खाते में पेमेंट देना, किसी अन्य खाताधारक का चेक प्राप्त कर संबंधित ब्रांच में जाकर कैश पेमेंट भी प्राप्त कर सकता है।
डिमांड ड्रॉफ्ट- बैंक खाताधारक किसी संस्थान, अस्पताल या अन्य जगह पेमेंट करने के लिए इस समय डिमांड ड्रॉफ्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। देखा गया है कि चेक की विश्वसनीयता को लेकर अस्पताल, शिक्षण संस्थान आदि जगहों पर चेक स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में खाते से पैसे डेबिट करवाकर खाताधारक डिमांड ड्रॉफ्ट के माध्यम से जरूरी पेमेंट कर सकते हैं। डिमांड ड्राफ्ट बनाने के लिए बैंक निर्धारित फीस भी लेता है। यह फीस बहुत मामूली होती है।
नेफ्ट/ आरटीजीएस- नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स (नेफ्ट) ट्रांसफर व रियल टाइम ग्रोस सेटलमेंट (आरटीजीएस) ऐसे दो ट्रांसेक्शन मोड हैं, जिनके द्वारा एक खाताधारक एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसे स्थानांतरित कर सकता है। नेफ्ट द्वारा केवल दो लाख रुपये से कम की राशि ही एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर की जा सकती है या प्राप्त की जा सकती है। वहीं आरटीजीएस से 2 लाख से अधिक की राशि एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर की जा सकती है।
एटीएम/ डेबिट कार्ड- एटीएम/ डेबिट कार्ड के द्वारा खाताधारक किसी भी एटीएम बूथ पर जाकर मशीन में कार्ड डालकर पिन नंबर डायल कर निर्धारित सीमा तक की राशि निकासी कर सकता है।
इंटरनेट बैंकिंग- इंटरनेट बैंकिंग के लिए खाताधारक अपनी होम ब्रांच में जाकर इंटरनेट बैंकिंग के लिए एप्लीकेशन लगा सकता है। जिसके बाद खाताधारक को लोग इन पासवर्ड मिल जाएंगे। जिससे उपभोक्ता बैंक की वेबसाइट पर अपना अकाउंट लोग इन कर पैसा ट्रांसफर, ऑनलाइन शॉपिंग, पेमेंट सहित अनेक सुविधाओं का लाभ ले सकता है। इंटरनेट बैंकिंग में लोग इन पासवर्ड के अलावा ट्रांजेक्शन पासवर्ड भी सेट करना होता है।
पीओएस मशीन- प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन स्वैप मशीन है। इसमें उपभोक्ता कार्ड स्वैप कर किसी भी प्रकार की शॉपिंग कर सकता है। पेट्रोल पंप, बाजार, दुकान आदि जगहों पर यह मशीन देखी जा सकती है। मशीन में कार्ड स्वैप करने के बाद ग्राहक को अपना चार अंकों का पिन एंटर करना होता है। जिसके बाद ही ट्रांजेक्शन प्रक्रिया पूरी होगी।
यूएसएसडी- यह सेवा साधारण फोन से लेकर एंड्रायड फोन में इस्तेमाल की जा सकती है। बैंक शाखा में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के डायल पैड पर अकाउंट बैलेंस, मिनी स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन के लिए एमएमआईडी, एमपिन विकल्प का चुनाव कर पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
ई-वॉलेट- नोटबंदी के बाद सभी बैंकों ने अपनी ई-वॉलेट सेवा शुरू की है। इस सेवा के लिए एंड्रायड फोन और इंटरनेट जरूरी है। मोबाइल में ई-वॉलेट एप डाउनलोड करने के बाद यूजर आईडी और पासवर्ड सेट किया जाता है। ई-वॉलेट को बैंक खाते से जोडक़र ई-वॉलेट में पैसे जमा किए जा सकते हैं। जिसके बाद एक उपभोक्ता ई-वॉलेट सेवा से पेमेंट कर शॉपिंग व अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकता है। ई-वॉलेट में जमा पैसे वापस बैंक खाते में भी ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
एईपीएस- आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम ट्रांजेक्शन का ऐसा माध्यम है, जिससे एक उपभोक्ता सुरक्षित तरीके से अपने आधार कार्ड नंबर का इस्तेमाल कर पैसा जमा, निकासी व शॉपिंग कर सकता है। जिले में अभी इस सेवा की शुरूआत नहीं हुई है। लेकिन आने वाले दिनों में इस माध्यम से ग्राहक अपने अंगूठे के निशान और आधार नंबर से सुरक्षित लेन-देन कर पाएंगे।
यूपीआई- सभी बैंकों ने अपना यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस शुरू किया है। इस सेवा के माध्यम से एक उपभोक्ता आसानी से फंड ट्रांसफर, ऑनलाइन लेन-देन, एयर टिकट, रेल टिकट व अन्य ऑनलाइन पेमेंट्स सेवाओं का लाभ उठा सकता है।
मोबाइल बैंकिंग- मोबाइल बैंकिंग सिस्टम इंटरनेट बैंकिंग सिस्टम की तरह है। लेकिन इस सेवा में इंटरनेट बैंकिंग की तुलना में ट्रांजेक्शन लिमिट कम रखी गई है।
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वर्जन
कैश की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ता इन दिनों विभिन्न कैशलेस व अन्य लेन-देन माध्यमों को अपनाकर अपने जरूरतें पूरी कर सकते हैं। ई-वॉलेट, यूएसएसडी, कार्ड स्वैप, डिमांड ड्रॉफ्ट जैसी सेवाओं से उपभोक्ता बैंकों और एटीएम बूथों की लंबी कतार से बच सकते हैं। - राजेंद्र निगम, निदेशक, पीएनबी स्वरोजगार संस्थान
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जिले भर की सभी एटीएम री-कैलिब्रेशन हो चुकी हैं। कैश की किल्लत के चलते इन सभी एटीएम में पैसा नहीं डल पा रहा है। प्रर्याप्त मात्रा में पैसा नहीं पहुंच रहा है। शुक्रवार को भी पीएनबी की चेस्ट में केवल 80 लाख रुपये ही नई करेंसी पहुंची है। वहीं आरबीआई गाइड लाइन की जहां तक बात है, तो आए दिन हो रहे संशोधनों के चलते थोड़ी सी असमंजस की स्थिति बन गई है। केवाईसी वाले उपभोक्ता 30 दिसंबर तक कितनी बार ही कितने भी पैसे अपने खाते में जमा करा सकते हैं। - एसएस गुप्ता, एलडीएम, रेवाड़ी
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नोटबंदी के बाद से ही निजी अस्पतालों को विभिन्न पेमेंट मोड्स के माध्यम से मरीजों को पूर्ण उपचार देने के निर्देश जारी किए हुए हैं। पीओएस मशीन के ऑर्डर अधिक होने से उपलब्धता में थोड़ी देरी हो रही है। लेकिन अस्पताल संचालक हार्ड कैश के अलावा अन्य पेमेंट माध्यमों से भी अपनी फीस ले सकते हैं। यदि कोई अस्पताल संचालक पर केवल कैश से ही फीस चुकाने का दबाव डालता है, तो प्रशासन उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा।
- कैप्टन मनोज कुमार, एडीसी, रेवाड़ी
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नोटबंदी की शुरूआत में बैंककर्मियों के पास एटीएम के री-कैलिब्रेशन और कैसेट चेंज नहीं होने की परेशानी थी। बैंकों का आश्वासन था कि यह कार्य पूरा होते ही सभी एटीएम में पैसा उपलब्ध होगा। 46 दिन बाद भी हालात जस के तस हैं। अब बैंक फिर से कैश की किल्लत का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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सूत्रों की मानें तो कुछ सरकारी और निजी बैंक शाखाएं ब्रांच से सटे एटीएम मशीनों में तो कैश डाल रही हैं, लेकिन ब्रांच से दूर शहर, बाजार या अन्य किसी स्थान पर स्थित एटीएम मशीन में बिल्कुल भी कैश नहीं डला है। इसके पीछे बैंकों को अपने ब्रांच से संबंधित उपभोक्ताओं को पहले सुविधा देने का कांसेप्ट भी माना जा रहा है। एटीएम मशीनों में अन्य बैंकों के खाताधारक भी कैश निकाल सकते हैं। इसीलिए संबंधित बैंक अधिक से अधिक कैश अपने ग्राहकों के लिए बचा रहा है। ऐसे में आधे से अधिक एटीएम बूथ पिछले कई दिनों से सूने पड़े हैं।
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बैंककर्मियों का कहना है कि बैंक शाखा में कैश विड्राल के लिए आने वाले उपभोक्ताओं के लिए ही पर्याप्त कैश नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में सभी एटीएम मशीनों में कैश डाला, तो शाखा में कैश की समस्या बन जाएगी। इसी के चलते शहरभर के ब्रांच से सटे एटीएम बूथ ही सुचारु हैं। इसके अलावा अन्य एटीएम बूथ आउट ऑफ कैश हैं।
कंपनी कर्मचारी सर्वाधिक प्रभावित
धारूहेड़ा और बावल औद्योगिक क्षेत्र में दूसरे प्रांतों के हजारों कर्मचारी कंपनियों में काम करते हैं। इन कर्मचारियों बैंक खाता जिले से भिन्न किसी क्षेत्र की बैंक शाखा में है। इन लोगों के पास एटीएम से पैसा कैश प्राप्त करना ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन एटीएम मशीनों की माली हालत ने कंपनी कर्मचारियों के दैनिक खर्चे व जरूरतों पर लगाम लगा दी है।
आरबीआई गाइड लाइन से अधिकारी से लेकर उपभोक्ता तक कंफ्यूज
रेवाड़ी। नोटबंदी के बाद पैसों के लेन-देन को लेकर लगातार बदलते फैसलों से उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। नोटबंदी के 46 दिनों में आरबीआई ने 60 से अधिक सर्कुलर जारी किए हैं। ऐसे में आम उपभोक्ता आरबीआई की गाइड लाइन और बैंक की कतार में फंस कर खड़ा है।
गत मंगलवार और बुधवार को बैंक शाखाओं ने उपभोक्ताओं ने सेल्फ डिक्लेरेशन के साथ एक मुश्त पुराने नोट जमा कराए, जिसको लेकर उपभोक्ताओं ने रोष भी प्रकट किया था। वहीं गुरुवार को लोगों ने बिना फॉर्म के पुराने नोट जमा कराए। उपभोक्ताओं ने इसे केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच सामंजस्य की कमी बताया है। दो दिनों में एक ही एक फैसला बदल जाने से उपभोक्ता और भी उलझ गए हैं। आरबीआई ने बुधवार को स्पष्ट किया केवाईसी पूर्ण वाले उपभोक्ता 5 हजार से अधिक की राशि 30 दिसंबर तक कितनी ही बार जमा करा सकते हैं। जबकि कई बैंकों में उपभोक्ताओं को 5 हजार से अधिक की राशि केवल एक बार ही जमा कराने की बात कही जा रही है, जिसमें कोई पूछताछ नहीं होगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को अभी भी केवाईसी डॉक्यूमेंट या विदआउट केवाईसी डॉक्यूमेंट के बिना कितने पैसे जमा होंगे। बिना केवाईसी वाला खाताधारक पांच रुपये कितनी बार जमा करा सकता है आदि कई दुविधाएं लोगों को परेशान कर रही हैं।
शहर की विभिन्न बैंक शाखाओं के ब्रांच मैनेजर तक भी आरबीआई सर्कुलरों को लेकर कंफ्यूज हैं। आरबीआई सर्कुलर कहता है कि केवाईसी खाताधारक 30 दिसंबर तक कितने भी पैसे कितनी बार ही जमा करा सकते हैं। कई बैंकों में एक मुश्त पैसा जमा करने के बाद अगले दिन पांच हजार की भी राशि जमा नहीं करने की सूचना दी गई।
चौदह ट्रांजेक्शन मोड्स से आसान होगी लाइफ
रेवाड़ी। इन दिनों कैश की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ता चौदह से अधिक ट्रांजेक्शन मोड्स को अपनाकर अपनी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकते हैं। पीएनबी ग्रामीण स्व: रोजगार ट्रेनिंग संस्थान के निदेशक राजेंद्र निगम ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताए बताए विभिन्न ट्रांजेक्शन मोड्स के लाभ।
ट्रांजेक्शन मोड्स:
चेक- किसी भी बैंक का खाताधारक अपनी संबंधित ब्रांच से चेक बुक इश्यू करवाकर चेक से कैश रिसीव करना, किसी अन्य के खाते में पेमेंट देना, किसी अन्य खाताधारक का चेक प्राप्त कर संबंधित ब्रांच में जाकर कैश पेमेंट भी प्राप्त कर सकता है।
डिमांड ड्रॉफ्ट- बैंक खाताधारक किसी संस्थान, अस्पताल या अन्य जगह पेमेंट करने के लिए इस समय डिमांड ड्रॉफ्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। देखा गया है कि चेक की विश्वसनीयता को लेकर अस्पताल, शिक्षण संस्थान आदि जगहों पर चेक स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में खाते से पैसे डेबिट करवाकर खाताधारक डिमांड ड्रॉफ्ट के माध्यम से जरूरी पेमेंट कर सकते हैं। डिमांड ड्राफ्ट बनाने के लिए बैंक निर्धारित फीस भी लेता है। यह फीस बहुत मामूली होती है।
नेफ्ट/ आरटीजीएस- नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स (नेफ्ट) ट्रांसफर व रियल टाइम ग्रोस सेटलमेंट (आरटीजीएस) ऐसे दो ट्रांसेक्शन मोड हैं, जिनके द्वारा एक खाताधारक एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसे स्थानांतरित कर सकता है। नेफ्ट द्वारा केवल दो लाख रुपये से कम की राशि ही एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर की जा सकती है या प्राप्त की जा सकती है। वहीं आरटीजीएस से 2 लाख से अधिक की राशि एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर की जा सकती है।
एटीएम/ डेबिट कार्ड- एटीएम/ डेबिट कार्ड के द्वारा खाताधारक किसी भी एटीएम बूथ पर जाकर मशीन में कार्ड डालकर पिन नंबर डायल कर निर्धारित सीमा तक की राशि निकासी कर सकता है।
इंटरनेट बैंकिंग- इंटरनेट बैंकिंग के लिए खाताधारक अपनी होम ब्रांच में जाकर इंटरनेट बैंकिंग के लिए एप्लीकेशन लगा सकता है। जिसके बाद खाताधारक को लोग इन पासवर्ड मिल जाएंगे। जिससे उपभोक्ता बैंक की वेबसाइट पर अपना अकाउंट लोग इन कर पैसा ट्रांसफर, ऑनलाइन शॉपिंग, पेमेंट सहित अनेक सुविधाओं का लाभ ले सकता है। इंटरनेट बैंकिंग में लोग इन पासवर्ड के अलावा ट्रांजेक्शन पासवर्ड भी सेट करना होता है।
पीओएस मशीन- प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन स्वैप मशीन है। इसमें उपभोक्ता कार्ड स्वैप कर किसी भी प्रकार की शॉपिंग कर सकता है। पेट्रोल पंप, बाजार, दुकान आदि जगहों पर यह मशीन देखी जा सकती है। मशीन में कार्ड स्वैप करने के बाद ग्राहक को अपना चार अंकों का पिन एंटर करना होता है। जिसके बाद ही ट्रांजेक्शन प्रक्रिया पूरी होगी।
यूएसएसडी- यह सेवा साधारण फोन से लेकर एंड्रायड फोन में इस्तेमाल की जा सकती है। बैंक शाखा में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के डायल पैड पर अकाउंट बैलेंस, मिनी स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन के लिए एमएमआईडी, एमपिन विकल्प का चुनाव कर पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
ई-वॉलेट- नोटबंदी के बाद सभी बैंकों ने अपनी ई-वॉलेट सेवा शुरू की है। इस सेवा के लिए एंड्रायड फोन और इंटरनेट जरूरी है। मोबाइल में ई-वॉलेट एप डाउनलोड करने के बाद यूजर आईडी और पासवर्ड सेट किया जाता है। ई-वॉलेट को बैंक खाते से जोडक़र ई-वॉलेट में पैसे जमा किए जा सकते हैं। जिसके बाद एक उपभोक्ता ई-वॉलेट सेवा से पेमेंट कर शॉपिंग व अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकता है। ई-वॉलेट में जमा पैसे वापस बैंक खाते में भी ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
एईपीएस- आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम ट्रांजेक्शन का ऐसा माध्यम है, जिससे एक उपभोक्ता सुरक्षित तरीके से अपने आधार कार्ड नंबर का इस्तेमाल कर पैसा जमा, निकासी व शॉपिंग कर सकता है। जिले में अभी इस सेवा की शुरूआत नहीं हुई है। लेकिन आने वाले दिनों में इस माध्यम से ग्राहक अपने अंगूठे के निशान और आधार नंबर से सुरक्षित लेन-देन कर पाएंगे।
यूपीआई- सभी बैंकों ने अपना यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस शुरू किया है। इस सेवा के माध्यम से एक उपभोक्ता आसानी से फंड ट्रांसफर, ऑनलाइन लेन-देन, एयर टिकट, रेल टिकट व अन्य ऑनलाइन पेमेंट्स सेवाओं का लाभ उठा सकता है।
मोबाइल बैंकिंग- मोबाइल बैंकिंग सिस्टम इंटरनेट बैंकिंग सिस्टम की तरह है। लेकिन इस सेवा में इंटरनेट बैंकिंग की तुलना में ट्रांजेक्शन लिमिट कम रखी गई है।
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कैश की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ता इन दिनों विभिन्न कैशलेस व अन्य लेन-देन माध्यमों को अपनाकर अपने जरूरतें पूरी कर सकते हैं। ई-वॉलेट, यूएसएसडी, कार्ड स्वैप, डिमांड ड्रॉफ्ट जैसी सेवाओं से उपभोक्ता बैंकों और एटीएम बूथों की लंबी कतार से बच सकते हैं। - राजेंद्र निगम, निदेशक, पीएनबी स्वरोजगार संस्थान
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जिले भर की सभी एटीएम री-कैलिब्रेशन हो चुकी हैं। कैश की किल्लत के चलते इन सभी एटीएम में पैसा नहीं डल पा रहा है। प्रर्याप्त मात्रा में पैसा नहीं पहुंच रहा है। शुक्रवार को भी पीएनबी की चेस्ट में केवल 80 लाख रुपये ही नई करेंसी पहुंची है। वहीं आरबीआई गाइड लाइन की जहां तक बात है, तो आए दिन हो रहे संशोधनों के चलते थोड़ी सी असमंजस की स्थिति बन गई है। केवाईसी वाले उपभोक्ता 30 दिसंबर तक कितनी बार ही कितने भी पैसे अपने खाते में जमा करा सकते हैं। - एसएस गुप्ता, एलडीएम, रेवाड़ी
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नोटबंदी के बाद से ही निजी अस्पतालों को विभिन्न पेमेंट मोड्स के माध्यम से मरीजों को पूर्ण उपचार देने के निर्देश जारी किए हुए हैं। पीओएस मशीन के ऑर्डर अधिक होने से उपलब्धता में थोड़ी देरी हो रही है। लेकिन अस्पताल संचालक हार्ड कैश के अलावा अन्य पेमेंट माध्यमों से भी अपनी फीस ले सकते हैं। यदि कोई अस्पताल संचालक पर केवल कैश से ही फीस चुकाने का दबाव डालता है, तो प्रशासन उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा।
- कैप्टन मनोज कुमार, एडीसी, रेवाड़ी