फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   Asharam had settled in Asra's Majra village

आशाराम ने बसाया था आसरा का माजरा गांव

Tue, 16 Mar 2021 01:13 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 16 Mar 2021 01:13 AM IST
विज्ञापन
Asharam had settled in Asra's Majra village
गांव आसरा का माजरा में शहीद नायक जगराम के नाम पर बनाया गया राजकीय विद्यालय। - फोटो : Rewari
बावल उपमंडल मुख्यालय से महज चार किलोमीटर दूर बसे गांव आसरा का माजरा को वर्ष 1525 में राजस्थान के सीकर से आए तीन भाइयों में से एक आशाराम ने बसाया था। फुटबॉल खिलाड़ियों के गांव के नाम से प्रसिद्ध यहां के खिलाड़ी अमित कुमार, एसपी सिंह, रवि कुमार, सोनू, कुलदीप व अशीष कुमार सहित 8 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। जाट बाहुल्य इस गांव की आबादी करीब 2000 व 900 से अधिक मतदाता हैं। गांव में एक स्वतंत्रता सेनानी और जगराम व सांवलराम दो शहीद हुए हैं। सरकारी सुविधाओं के नाम पर यहां मात्र प्राइमरी स्कूल है। हालांकि पशु स्वास्थ्य केंद्र व उपस्वास्थ्य केंद्र के लिए यहां के ग्रामीण कई बार जनप्रतिनिधियों के पास गुहार लगा चुके हैं। इसके बावजूद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। इसके अलावा शहर जाने के लिए कोई सरकारी परिवहन सुविधा नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
विज्ञापन

उत्तर भारत का सबसे बड़ा देशोरी काज
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 150 साल पूर्व एक बुजुर्ग की मौत के बाद उसके परिजनों की ओर देशोरी काज किया गया था। यह काज उत्तर भारत का सबसे बड़ा काज था, जहां देशभर के लोगों ने हिस्सा लिया था। जिसकी आसपास के क्षेत्रों में काफी चर्चा हुई थी।
विज्ञापन

गांव विकास के मामले में सबसे आगे है। सभी ग्रामीण आपस में मिलजुल कर रहते हैं। गांव के युवाओं में खेलों के प्रति काफी लगाव है। यहां फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- विकास सिंह, सरपंच
गांव के युवाओं में देशप्रेम की भावना है। यही कारण है कि यहां के अधिकांश युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं। हालांकि गांव के युवा चिकित्सा, शिक्षा, अधिवक्ता व अन्य व्यवसाय से भी जुड़े हुए हैं।
-जयसिंह एडवोकेट
गांव में सरकारी सुविधाओं का अभाव है। सरकारी सुविधाओं के नाम पर यहां महज एक प्राइमरी स्कूल है, जबकि यहां के बच्चों की पढ़ाई में अच्छी रुचि है। शिक्षण संस्थान नहीं होने के कारण बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए गांव से दूर शहरों में जाना पड़ता है।
-हवासिंह एडवोकेट
मेरा गांव शहर से मात्र 4 किलोमीटर दूर है, लेकिन सरकारी परिवहन सुविधा का अभाव है। जिसके कारण ग्रामीणों को शहर जाने के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा गांव में पशु स्वास्थ्य केंद्र का भी अभाव है, जिससे पशु पालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
-महेंद्र सिंह
मेरे गांव के युवाओं में खेलों के प्रति बेहद लगाव है। यहां के खिलाड़ियों ने फुुटबॉल में देश-विदेश में नाम कमाया है। इसके अलावा यहां के युवाओं ने शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में काफी नाम कमाया है। इसके अलावा गांव में अधिवक्ता भी हैं।
-जयओम
गांव के सभी लोग आपस में मिलजुुल कर रहते हैं। विकास कार्य हो या फिर धार्मिक व सामाजिक कार्य सभी ग्रामीण आपस में सलाह करने के बाद करते हैं। इसके अलावा सरकारी परिवहन सुविधा के अभाव के कारण ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
-सतपाल
फुटबॉल खिलाड़ियों के नाम से मशहूर इस गांव में करीब 8 खिलाड़ी देश-विदेश स्तर पर फुटबॉल खेल चुके हैं। गांव के युवाओं में खेलों के प्रति काफी लगाव है। गांव में दो शहीद भी हुए हैं, जो ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणादायक बने हुए हैं।

-विजय कुमार
मेरे गांव के अनेक युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं। गांव में एक स्वतंत्रता सेनानी व दो शहीद हुए हैं। इसके अलावा युवाओं में सेना में भर्ती होने का जज्बा है। सेना में भर्ती होने के लिए सुबह-शाम को अभ्यास करने वाले युवाओं की भीड़ लगी रहती है।
-श्रीओम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed