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एम्स संघर्ष समिति कार्यालय में बोले वन मंत्री, मनेठी में एम्स निर्माण के लिए सरकार आपके साथ

Sun, 11 Aug 2019 12:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2019 12:36 AM IST
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मंत्री राव नरबीर सिंह एम्स कार्यालय में लोगों की समस्याएं सुनते हुए। - फोटो : Rewari
शनिवार को नारनौल जाते समय मनेठी में एम्स संघर्ष समिति के कार्यालय में रुके सूूबे के वन मंत्री राव नरबीर सिंह शिलान्यास में अरावली फोरेस्ट की अड़चन के सवाल पर समिति सदस्यों से कहा कि मंगलवार को डीसी से मिलना पॉजिटिव होगा।
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समिति सदस्यों ने मंत्री के समक्ष मांग रखी जो वन विभाग ने शर्त रखी है उसको हटवाया जाए और जल्द से जल्द मनेठी में एम्स का शुभारंभ करवाया जाए। सरपंच श्योजात सिंह ने कहा कि वन विभाग ने पेड़ हटाने की शर्त लगाई, जबकि जेल भरो आंदोलन में हुई महापंचायत में सभी लोगों ने 5 पौधे लगाने का संकल्प लिया है, जो पेड़ उखाड़े जाएंगे, उससे अधिक पौधे इस क्षेत्र के लोग लगाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गुमराह कर एम्स के शिलान्यास में अड़चन डाले हुए हैं। इस दौरान समिति अध्यक्ष सरपंच श्योताज सिंह, सचिव ओमप्रकाश सेन, कर्नल राजेन्द्र सिंह, डा. जितेन्द्र, देशराज, विनोद पंच सितारा, महीपाल सिंह, सुरेश कुमार, मास्टर लक्ष्मण सिंह, लालचन्द, दलबीर सिंह, ईश्वर सिंह, नरेन्द्र, वेद्रपकाश, नवीन कुमार सहित अनेक लोग रहे।
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वन सलाहकार समिति के नामंजूरी वाले फैसले को दोबारा विचार करने के लिए समिति की ओर से शनिवार को एक पत्र सौंपा गया है। समिति का कहना है कि अरावली स्कीम के तहत पौधरोपण कार्य के लिए के लिए दी गई जमीन की सत्यता पता करने पर सामने आया है कि वन विभाग ने पौधरोपण के समय जो खसरा नंबद दिए हैं उनमें काफी गलतियां हैं। कुछ निजी जमीनों के भी खसरा नंबर दिए गए हैं। जो कि गलत हैं। वन विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट को दिए गए खसरा नंबर राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता है। समिति इसका अवलोकन राजस्व विभाग से कर चुकी है।
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मसानी में 300 एकड़ में पौधरोपण का प्रस्ताव दे चुकी सरकार
समिति की ओर से लिखे गए रिव्यू पत्र में कहा गया है कि अरावली क्षेत्र में जो पौधरोपण की गई है। वह अधिकतर कांटेदार पौधे हैं। जिसको पिछले दो साल से वन विभाग कांटेदार पौधों को निकालकर स्थानीय प्रजाति के पौधों को लगा रहा है। जिससे मनेठी क्षेत्र भी शामिल है। क्षेत्र में वन की कमी न हो इसके लिए फोरेस्ट कंजर्वेटर एक्ट 1980 व 1988 पालना करते हुए जो जमीन मनेठी एम्स में आएगी, उसके बदले में हरियाणा सरकार मैसानी बैराज में लगभग 300 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव दे चुकी है।
मेवात में मेडिकल वहां पर एफसीए की अड़चन क्यों नहीं आई
मेवात में हसन खां मेडिकल कॉलेज बना, उसमें भी अरावली परियोजना के तीनों मॉडल की जमीन शामिल की गई थी। उसका किसी भी प्रकार से एफसीए केस नहीं बनाया गया। समिति का कहना है कि हमने एफसीए केस की पालना करते हुए उसे बनाकर भेजा है। इसके अलावा कांडला बंदरगाह से चलकर रेवाड़ी, पलवल दादरी तक जाने वाली रेलवे कॉरिडोर में भी नूह जिला की अरावली श्रंखला की पहाड़ियां काटी गई। जिसका कोई एफसीए केस नहीं बनाया गया।

मनेठी संघर्ष समिति के प्रधान सरपंच श्योताज सिंह ने कहा कि शनिवार को वन मंत्री ने प्रयास करने की बात कही है। डीसी से मिलने के भी निर्देश दिए हैं। आशा की किरण दिखाई दे रही है। जब वन सलाहकार समिति की अड़चन दूर करने पर पता चला कि वन विभाग की ओर से पौधरोपण के समय खसरा नंबर ही गलत दिए गए हैं। ऐसे में मंगलवार को डीसी सहित सीएम व केंद्रीय वन मंत्रालय को भी वन सलाहकार समिति के फैसले का रिव्यु करने का पत्र भेजा जाएगा। पत्र मेें सभी फैक्ट दिए गए हैं।
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