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चिट्ठियों के दौर के बाद अब जुर्माने की मांगी गई अनुमति
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साहबी बैराज में भरा केमिकल युक्त पानी।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। जिले के कस्बा धारूहेड़ा की बड़ी समस्या भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से आने वाला केमिकल युक्त बदबूदार पानी स्थानीय लोगों के अलावा हरियाणा-राजस्थान के मुख्यमंत्रियों, अधिकारियों, राष्ट्रीय हरित आयोग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के गले की फांस बना हुआ है। ऐसे में चिट्ठियों के दौरे के बाद अब दोषियों पर जुर्माने की अनुमति मुख्यालय से मांग ली गई है।
दक्षिण हरियाणा के दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 48 को नीचे से साहबी नदी गुजरती है, जो कई दशकों पूर्व राजस्थान और हरियाणा के काफी इलाकों में तबाही मचाती थी। उस नदी पर उक्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव मसानी के पास कई दशक पहले साहबी बैराज बनाया गया था, जिसके माध्यम से इस नदी के पानी को नियंत्रित करने की योजना तैयार की गई थी। जब से यह बैराज बना, तब से अब तक कभी दोबारा साहबी नदी में इतना अधिक पानी नहीं आया। उधर राजस्थान के क्षेत्र के काफी गांव भी इस नदी के पानी की चपेट में आते थे। इस नदी क्षेत्र के हरसियाणा - राजस्थान के काफी गांवों में आज भी जमीन से काफी ऊंचे मिट्टी के कच्चे बांध बनाए हुए देखे जा सकते हैं।
बदलते समय के साथ भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से केमिकल युक्त पानी कस्बा धारूहेड़ा के सेक्टर 6 और 4 के घरों में घुस रहा है और समस्या से कई वर्षों से लोग परेशान हैं। अलवर और रेवाड़ी के उपायुक्त के अलावा नगर पालिका, एनएचएआई के अधिकारी और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी समस्या को देख और समझने के लिए मौका मुआयना कर चुके हैं, मगर समस्या जस की तस है। उधर, मामले में शिकायतकर्ता गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव का कहना है कि धारूहेड़ा क्षेत्र के गांवों एवं आने वाली पीढ़ी के लिए वे इंसाफ मांग रहे हैं और जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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अधिकारिक पक्ष
- बोर्ड ने मुख्यालय से गंदे पानी की समस्या को लेकर दोषियों के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति मांगी थी, जो मिल गई है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भिजवाई गई है। समस्या के समाधान के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयासरत है।
- दिनेश यादव, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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दक्षिण हरियाणा के दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 48 को नीचे से साहबी नदी गुजरती है, जो कई दशकों पूर्व राजस्थान और हरियाणा के काफी इलाकों में तबाही मचाती थी। उस नदी पर उक्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव मसानी के पास कई दशक पहले साहबी बैराज बनाया गया था, जिसके माध्यम से इस नदी के पानी को नियंत्रित करने की योजना तैयार की गई थी। जब से यह बैराज बना, तब से अब तक कभी दोबारा साहबी नदी में इतना अधिक पानी नहीं आया। उधर राजस्थान के क्षेत्र के काफी गांव भी इस नदी के पानी की चपेट में आते थे। इस नदी क्षेत्र के हरसियाणा - राजस्थान के काफी गांवों में आज भी जमीन से काफी ऊंचे मिट्टी के कच्चे बांध बनाए हुए देखे जा सकते हैं।
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बदलते समय के साथ भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से केमिकल युक्त पानी कस्बा धारूहेड़ा के सेक्टर 6 और 4 के घरों में घुस रहा है और समस्या से कई वर्षों से लोग परेशान हैं। अलवर और रेवाड़ी के उपायुक्त के अलावा नगर पालिका, एनएचएआई के अधिकारी और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी समस्या को देख और समझने के लिए मौका मुआयना कर चुके हैं, मगर समस्या जस की तस है। उधर, मामले में शिकायतकर्ता गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव का कहना है कि धारूहेड़ा क्षेत्र के गांवों एवं आने वाली पीढ़ी के लिए वे इंसाफ मांग रहे हैं और जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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- बोर्ड ने मुख्यालय से गंदे पानी की समस्या को लेकर दोषियों के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति मांगी थी, जो मिल गई है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भिजवाई गई है। समस्या के समाधान के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयासरत है।
- दिनेश यादव, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।