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Rewari News: बाबा श्याम के लक्खी मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
Sat, 08 Mar 2025 12:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 08 Mar 2025 12:05 AM IST
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फोटो : 16बाबा के दरबार में श्याम निशान लेकर पहुंचे भक्तजन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुंड। गांव जैतपुर में श्री श्याम बाबा का लक्खी मेला 28 फरवरी से शुरू हो चुका है। यहां दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। खाटू के बाद यह श्याम बाबा का दूसरा बड़ा धाम बना गया है। श्याम भक्त श्याम निशान लेकर उमड़ रहे हैं।
यहां सुरक्षा को लेकर खास बंदोबस्त किए गए हैं। गांव में स्थित प्राचीन शीश के दानी श्रीश्याम मंदिर में 9-10 मार्च को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान के जैतपुर गांव का मंदिर महाभारत काल से देशभर के लाखों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बना हुआ है। यही कारण है कि मेले में आसपास के गांवो के साथ-साथ राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, यूपी, मुंबई, महाराष्ट, कोलकाता सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से भक्त बाबा के दर्शन करने आते हैं।
भक्त हाथों में श्याम पताकाएं और श्याम निशान उठाकर दरबार में हाजिरी लगाने भारी संख्या में जुट रहे हैं। मेले में भंडारे, सत्संग, जागरण और अन्य व्यवस्था की गई है। मेले में चिकित्सा कैम्प भी लगाए हैं। खाटू के बाद जैतपुर धाम दूसरा सबसे बड़ा श्याम भक्तों के आस्था का स्थल बनता जा रहा है। हर साल करीब 5-6 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के स्थान पर ध्वज चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। यह मेला 11 मार्च द्वादशी तक चलेगा।
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महाभारत से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
श्री श्याम सेवा समिति के प्रधान ताराचंद यादव ने बताया कि मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। मान्यता है कि महाभारत काल में बर्बरीक द्वारा शीश दान देने के पहले श्रीकृष्ण ने शीश को टीका था। इस स्थल को भी बड़े श्रद्धा भाव से श्याम भक्त पूजते हैं। भजन गायक भजन कीर्तन से बाबा की स्तुति करते हैं। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रहती है। श्याम मंदिर के ग्रामीण पुजारी रतिराम ने बताया कि इस श्याम मंदिर का निर्माण 1820, 22 विक्रम संवत में उनके पूर्वजों ने करवाया था।
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यहां श्रद्धालुओं की मन्नत होती है पूरी : ताराचंद
समाजसेवी ताराचंद प्रधान व ग्रामीण बताते हैं कि श्रद्धालु यहां के श्याम-धाम की भक्ति में उतनी ही शक्ति मानते हैं जितनी कि खाटू श्याम धाम की। इसलिए यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां जो भी भक्त सच्ची भक्ति और श्रद्धा से आता है उसकी उतनी ही मन्नतें पूरी होती हैं, जिससे क्षेत्र के लोग अपने आपको धन्य मानते हैं।
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कुंड। गांव जैतपुर में श्री श्याम बाबा का लक्खी मेला 28 फरवरी से शुरू हो चुका है। यहां दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। खाटू के बाद यह श्याम बाबा का दूसरा बड़ा धाम बना गया है। श्याम भक्त श्याम निशान लेकर उमड़ रहे हैं।
यहां सुरक्षा को लेकर खास बंदोबस्त किए गए हैं। गांव में स्थित प्राचीन शीश के दानी श्रीश्याम मंदिर में 9-10 मार्च को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान के जैतपुर गांव का मंदिर महाभारत काल से देशभर के लाखों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बना हुआ है। यही कारण है कि मेले में आसपास के गांवो के साथ-साथ राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, यूपी, मुंबई, महाराष्ट, कोलकाता सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से भक्त बाबा के दर्शन करने आते हैं।
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भक्त हाथों में श्याम पताकाएं और श्याम निशान उठाकर दरबार में हाजिरी लगाने भारी संख्या में जुट रहे हैं। मेले में भंडारे, सत्संग, जागरण और अन्य व्यवस्था की गई है। मेले में चिकित्सा कैम्प भी लगाए हैं। खाटू के बाद जैतपुर धाम दूसरा सबसे बड़ा श्याम भक्तों के आस्था का स्थल बनता जा रहा है। हर साल करीब 5-6 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के स्थान पर ध्वज चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। यह मेला 11 मार्च द्वादशी तक चलेगा।
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महाभारत से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
श्री श्याम सेवा समिति के प्रधान ताराचंद यादव ने बताया कि मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। मान्यता है कि महाभारत काल में बर्बरीक द्वारा शीश दान देने के पहले श्रीकृष्ण ने शीश को टीका था। इस स्थल को भी बड़े श्रद्धा भाव से श्याम भक्त पूजते हैं। भजन गायक भजन कीर्तन से बाबा की स्तुति करते हैं। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रहती है। श्याम मंदिर के ग्रामीण पुजारी रतिराम ने बताया कि इस श्याम मंदिर का निर्माण 1820, 22 विक्रम संवत में उनके पूर्वजों ने करवाया था।
यहां श्रद्धालुओं की मन्नत होती है पूरी : ताराचंद
समाजसेवी ताराचंद प्रधान व ग्रामीण बताते हैं कि श्रद्धालु यहां के श्याम-धाम की भक्ति में उतनी ही शक्ति मानते हैं जितनी कि खाटू श्याम धाम की। इसलिए यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां जो भी भक्त सच्ची भक्ति और श्रद्धा से आता है उसकी उतनी ही मन्नतें पूरी होती हैं, जिससे क्षेत्र के लोग अपने आपको धन्य मानते हैं।