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मछलियां की मौत से छह गांवों में हाहाकार
Updated Mon, 19 Mar 2018 01:04 AM IST
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मछलियां की मौत से छह गांवों में हाहाकार
जगदीश यादव
कोसली।
अचानक तापमान में वृद्धि होने और जोहड़ों में पानी का स्तर कम होने से क्षेत्र के छह गांवों के मछली पालक किसानों को भारी नुकसान हो गया है। हजारों की संख्या में मछलियां मरने से छह गांवों के जोहड़ों का पानी दूषित होने के साथ ही गांवों में भी बदबू से हाहाकार है। मामले में बीडीपीओ नाहड खंड का कहना है कि मछलियों को दबाने के आदेश पंचायतों को दिए जा चुके हैं। मत्स्य विभाग का कहना है कि मौसम में आया अचानक बदलाव मछलियों की मौत का कारण हो सकता है। दूषित पानी जोहड़ों में गिरने और पानी का जलस्तर कम होने से आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। सिंचाई विभाग का कहना है कि जोहड़ों में पानी की कमी नहीं है। मछलियों की मौत का कारण पानी की कमी नहीं है। मछलियों की मौत से जोहड़ प्रदूषित होने से पशुपालकों और ग्रामीणों को भी परेशानी हो रही है।
क्षेत्र के गांव नाहड़, नेहरूगढ़, कारोली, झाड़ोदा और लूखी सहित अन्य गांवों के जोहड़ों में मछली पालन होता है। ग्राम पंचायत की तरफ से पालकों को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर जोहड़ दिया जाता है। इसकी एवज में मत्स्य पालक की तरफ से ग्राम पंचायत को निर्धारित राशि अदा करनी पड़ती है। पालक की तरफ से मछलियों का बीमा कराना भी आवश्यक होता है। गरमी के दिनों में जोहड़ में पानी कम होने लगता है, इस कारण पानी में मछलियों को आक्सीजन की कमी आ जाती है। इसके अलावा दूषित पानी भी जोहड़ में छोड़ दिया जाता है। इससे मछलियां मरने लगती है।
क्या कहते हैं मछली पालक
ग्राम पंचायतों से पट्टे पर लेकर जोहड़ों में मछली पालन किया था, लेकिन अचानक मछलियां मर रही हैं। इससे काफी नुकसान होने की संभावना है। प्रशासन की तरफ से भी कोई सहायता नहीं दी जा रही है। - अशोक, मछली पालक गांव लूखी।
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कोट
मछलियों के मरने से पशुओं को भी जोहड़ का पानी पिलाना दूभर हो गया है। पशु पालकों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। बदबूदार वातावरण से गांव में बीमारी फैलने की संभावना बन गई है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत भी की है। - रामनिवास, ग्रामीण लूखी।
मछलियों के मरने से गांव के जोहड़ का पानी दूषित हो गया है। मवेशियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। प्रशासन को भी शिकायत की जा चुकी है। गांव का वातावरण बदबूदार हो गया है। मछलियां मरने के बाद जोहड़ के किनारे पर जमा हो गई है। - रामनरेश, ग्रामीण नेहरुगढ़
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क्या कहते हैं अधिकारी
जोहड़ों में मछलियां का मामला संज्ञान में आ चुका है। जल्द ही जोहड़ों की सफाई करवाई जा रही है। मरी हुई मछलियों को दबवाने के लिए संबंधित गांवों के सरपंचों को कहा गया है। - अजीत चहल, बीडीपीओ नाहड खंड।
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पिछले सप्ताह मौसम में आए बदलाव के कारण मछलियां मर सकती है। वैसे मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है।
एफएफ वत्स, अधिकारी मत्स्य विभाग
जोहड़ों में पानी का अभाव नहीं है। कहीं से डिमांड की जाती है तो उसे जल्द भरवा दिया जाएगा। वैसे पानी के अभाव में मछलियां नहीं मर रही हैं। - राकेश कुमार, जेई सिंचाई विभाग
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जगदीश यादव
कोसली।
अचानक तापमान में वृद्धि होने और जोहड़ों में पानी का स्तर कम होने से क्षेत्र के छह गांवों के मछली पालक किसानों को भारी नुकसान हो गया है। हजारों की संख्या में मछलियां मरने से छह गांवों के जोहड़ों का पानी दूषित होने के साथ ही गांवों में भी बदबू से हाहाकार है। मामले में बीडीपीओ नाहड खंड का कहना है कि मछलियों को दबाने के आदेश पंचायतों को दिए जा चुके हैं। मत्स्य विभाग का कहना है कि मौसम में आया अचानक बदलाव मछलियों की मौत का कारण हो सकता है। दूषित पानी जोहड़ों में गिरने और पानी का जलस्तर कम होने से आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। सिंचाई विभाग का कहना है कि जोहड़ों में पानी की कमी नहीं है। मछलियों की मौत का कारण पानी की कमी नहीं है। मछलियों की मौत से जोहड़ प्रदूषित होने से पशुपालकों और ग्रामीणों को भी परेशानी हो रही है।
क्षेत्र के गांव नाहड़, नेहरूगढ़, कारोली, झाड़ोदा और लूखी सहित अन्य गांवों के जोहड़ों में मछली पालन होता है। ग्राम पंचायत की तरफ से पालकों को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर जोहड़ दिया जाता है। इसकी एवज में मत्स्य पालक की तरफ से ग्राम पंचायत को निर्धारित राशि अदा करनी पड़ती है। पालक की तरफ से मछलियों का बीमा कराना भी आवश्यक होता है। गरमी के दिनों में जोहड़ में पानी कम होने लगता है, इस कारण पानी में मछलियों को आक्सीजन की कमी आ जाती है। इसके अलावा दूषित पानी भी जोहड़ में छोड़ दिया जाता है। इससे मछलियां मरने लगती है।
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क्या कहते हैं मछली पालक
ग्राम पंचायतों से पट्टे पर लेकर जोहड़ों में मछली पालन किया था, लेकिन अचानक मछलियां मर रही हैं। इससे काफी नुकसान होने की संभावना है। प्रशासन की तरफ से भी कोई सहायता नहीं दी जा रही है। - अशोक, मछली पालक गांव लूखी।
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कोट
मछलियों के मरने से पशुओं को भी जोहड़ का पानी पिलाना दूभर हो गया है। पशु पालकों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। बदबूदार वातावरण से गांव में बीमारी फैलने की संभावना बन गई है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत भी की है। - रामनिवास, ग्रामीण लूखी।
मछलियों के मरने से गांव के जोहड़ का पानी दूषित हो गया है। मवेशियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। प्रशासन को भी शिकायत की जा चुकी है। गांव का वातावरण बदबूदार हो गया है। मछलियां मरने के बाद जोहड़ के किनारे पर जमा हो गई है। - रामनरेश, ग्रामीण नेहरुगढ़
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क्या कहते हैं अधिकारी
जोहड़ों में मछलियां का मामला संज्ञान में आ चुका है। जल्द ही जोहड़ों की सफाई करवाई जा रही है। मरी हुई मछलियों को दबवाने के लिए संबंधित गांवों के सरपंचों को कहा गया है। - अजीत चहल, बीडीपीओ नाहड खंड।
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पिछले सप्ताह मौसम में आए बदलाव के कारण मछलियां मर सकती है। वैसे मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है।
एफएफ वत्स, अधिकारी मत्स्य विभाग
जोहड़ों में पानी का अभाव नहीं है। कहीं से डिमांड की जाती है तो उसे जल्द भरवा दिया जाएगा। वैसे पानी के अभाव में मछलियां नहीं मर रही हैं। - राकेश कुमार, जेई सिंचाई विभाग