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Rewari News: 5 एसटीपी साहबी बैराज में छोड़ रहे थे पानी, अब डीसी वसूलेंगे 3 करोड़ रुपये

Thu, 01 Aug 2024 03:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Thu, 01 Aug 2024 03:40 AM IST
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5 STP Sahibs were releasing water in the barrage, now DC will charge Rs 3 crore
फोटो: साहबी बैराजरेवाड़ी। साहबी बैराज का मौजूदा दृश्य। संवाद
रेवाड़ी। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने रेवाड़ी उपायुक्त से हरियाणा भूमि राजस्व अधिनियम के तहत पांच सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से तीन करोड़ रुपये पर्यावरण मुआवजा वसूलने का आग्रह किया है। पूरा प्रकरण साहबी बैराज में एसटीपी का गंदा पानी छोड़े जाने को लेकर है।
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दरअसल एसटीपी का संचालन सरकारी विभागों द्वारा किया जा रहा है। धारूहेड़ा कस्बे में एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी ने हाल ही में एक शिकायत के संबंध में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को एक रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार नियमों का पालन न करने के कारण पिछले साल एसटीपी पर 3 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया था।
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इसमें 6.5 एमएलडी कालूवास रोड स्थित एसटीपी पर 56.20 लाख रुपये, 16 एमएलडी नसियाजी रोड स्थित एसटीपी पर 64.60 लाख रुपये, खरखड़ा गांव (धारूहेड़ा) के एसटीपी पर 65.10 लाख रुपये और 3 एमएलडी खेड़ा मुरार रोड (बावल) के लिए एसटीपी पर 63.70 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया था। यह जुर्माना एसटीपी के नमूने फेल होने पर लगाया गया था, लेकिन यह राशि प्लांटों ने नहीं दी। इसके बाद अब बोर्ड ने डीसी से राशि वसूलने का आग्रह किया है।
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शिकायतकर्ता प्रकाश खरकड़ा ने कही ये बात

इस संबंध में शिकायतकर्ता खरखड़ा गांव के प्रकाश यादव ने बताया कि 31 जुलाई को एनजीटी कोर्ट में सुनवाई हुई। इसको लेकर सिंचाई, प्रदूषण और चीफ सेकेट्री हरियाणा द्वारा हलफनामा के साथ अपना जवाब भी दिया गया है। खरखड़ा का कहना है कि दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर खरखड़ा और खलियावास गांवों के पास सूखी हुई साहबी बैराज की सैकड़ों एकड़ खाली जमीन में सीवर का पानी छोड़ा जा रहा था। गंदे पानी के कारण न केवल भूजल प्रदूषित हो रहा है, बल्कि पेड़ों और अन्य वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंच रहा है। साहबी नदी के क्षेत्र में जमा हरे रंग के पानी से दुर्गंध आ रही है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पानी अनुपचारित है। एसटीपी से अनुपचारित पानी को साहबी नदी क्षेत्र में जाने से रोका जाए। नियमित निगरानी के अलावा अपशिष्ट जल को छोड़ने से पहले उसका उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए।


पिछले साल 5 सदस्यीय कमेटी ने की थी जांच, नमूने मिले थे फेल

अप्रैल 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कोर्ट के सख्त आदेश पर जिला प्रशासन की ओर से एडीसी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय कमेटी जांच के लिए आसपास के ट्यूबवेलों के पानी के नमूने लेने पहुंची थी। 5 सदस्यीय कमेटी की जांच में लापरवाही सामने आई थी। इस टीम ने महीनेभर पहले ही ज्वाइंट विजिट कर बैराज व सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के पानी की सैंपलिंग कराई थी। सभी एसटीपी के साथ ही साहबी बैराज के पानी की रिपोर्ट भी फेल मिली थी।



कृत्रिम झील बनाने का किया था प्रोजेक्ट तैयार, नहीं चढ़ी योजना सिरे

बैराज में पहली बार 2017 में लगातार 66 दिन नहरी पानी से 20 हजार 274 फीट पानी मात्रा तक पूरा भरा गया था। 2018 में 68 दिन से लगातार बैराज को 24 हजार 42 फीट तक पानी से भरा गया था। यमुना का भी अतिरिक्त पानी बैराज में पहुंचाया गया था। तब पूर्व सीएम मनोहर लाल ने कहा था कि पर्यटकों के लिए इसे रमणीक स्थल बनाया जाएगा जिसमें रेस्टोरेंट व ठहरने के लिए हैट्स भी बनाए जाएंगे। बोटिंग के बाद फूड कोर्ट, एडवेंचर कैंप की गतिविधियां शुरू की जाएंगी।
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