{"_id":"5ccc8787bdec22072841f92d","slug":"41556907911-rewari-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नियम 134ए के विरोध में बंद रहे तीन सौ निजी स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नियम 134ए के विरोध में बंद रहे तीन सौ निजी स्कूल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेवाड़ी। नियम 134ए के विरोध समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को करीब तीन सौ निजी स्कूल बंद रहे। विरोध में जुलूस निकालते हुए प्रदर्शन किया गया। प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से प्रेषित ज्ञापन उपायुक्त के नहीं लेने पर अध्यापकों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। वहीं स्कूल संचालकों की हड़ताल के चलते तीन सौ स्कूल बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई ठप रही।
निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि सरकार से प्राइमरी स्टूडेंट के लिए 300 से 400 रुपये मासिक फीस निजी स्कूलों को देना तय किया हुआ है। सीनियर विंग के स्टूडेंट्स के लिए यह फीस 500 से 700 तय है। पिछले तीन साल से निजी स्कूूलों को नियम134ए में पढ़ाए जा चुके बच्चों की रिंबर्समेंट प्रदान करे। प्रदेश सरकार हरियाणा में 134ए की बजाए आरटीई लागू करे। जिसमें सरकार निजी स्कूलों 300 से 700 रुपये की बजाए स्कूल की वास्तविक फीस अदा करे। राजस्थान में यह अधिनियम लागू है। इसके अलावा निजी स्कूलों की बसों पर 20 रुपये प्रति सीट लगाया गया टैक्स खत्म किया जाए। बसों की आयु 10 साल की बजाए 15 साल की जाने की मांग भी हैं।
मांग को लेकर प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को शहर के नेेहरू पार्क में जिलेभर के तीन सौ से अधिक स्कूल संचालकों ने बैठक कर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जुलूस के रूप में जिला सचिवालय पहुंचे, लेकिन उपायुक्त ज्ञापन लेने के लिए बाहर नहीं आए। कहा गया कि पांच सदस्य अंदर आकर ज्ञापन सौंपे, इससे अध्यापकों में रोष पनप गया। इस दौरान अध्यापकों ने सचिवालय परिसर में घुसने का प्रयास किया, लेकिन गेट पर मौजूद पुलिस बल ने उनको अंदर जाने से रोक दिया। जिसके कारण पुलिस अधिकारियों व अध्यापकों के बीच काफी देर तनातनी का माहौल रहा। अध्यापकों का कहना था कि उपायुक्त को जिलेभर के शिक्षकों का सम्मान करते हुए उनके बीच आकर ज्ञापन लेना चाहिए। करीब दो घंटे तक उपायुक्त द्वारा ज्ञापन लेने के लिए बाहर नहीं आने पर अध्यापकों को बिना ज्ञापन दिए ही वापस लौटना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि सरकार से प्राइमरी स्टूडेंट के लिए 300 से 400 रुपये मासिक फीस निजी स्कूलों को देना तय किया हुआ है। सीनियर विंग के स्टूडेंट्स के लिए यह फीस 500 से 700 तय है। पिछले तीन साल से निजी स्कूूलों को नियम134ए में पढ़ाए जा चुके बच्चों की रिंबर्समेंट प्रदान करे। प्रदेश सरकार हरियाणा में 134ए की बजाए आरटीई लागू करे। जिसमें सरकार निजी स्कूलों 300 से 700 रुपये की बजाए स्कूल की वास्तविक फीस अदा करे। राजस्थान में यह अधिनियम लागू है। इसके अलावा निजी स्कूलों की बसों पर 20 रुपये प्रति सीट लगाया गया टैक्स खत्म किया जाए। बसों की आयु 10 साल की बजाए 15 साल की जाने की मांग भी हैं।
विज्ञापन
मांग को लेकर प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को शहर के नेेहरू पार्क में जिलेभर के तीन सौ से अधिक स्कूल संचालकों ने बैठक कर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जुलूस के रूप में जिला सचिवालय पहुंचे, लेकिन उपायुक्त ज्ञापन लेने के लिए बाहर नहीं आए। कहा गया कि पांच सदस्य अंदर आकर ज्ञापन सौंपे, इससे अध्यापकों में रोष पनप गया। इस दौरान अध्यापकों ने सचिवालय परिसर में घुसने का प्रयास किया, लेकिन गेट पर मौजूद पुलिस बल ने उनको अंदर जाने से रोक दिया। जिसके कारण पुलिस अधिकारियों व अध्यापकों के बीच काफी देर तनातनी का माहौल रहा। अध्यापकों का कहना था कि उपायुक्त को जिलेभर के शिक्षकों का सम्मान करते हुए उनके बीच आकर ज्ञापन लेना चाहिए। करीब दो घंटे तक उपायुक्त द्वारा ज्ञापन लेने के लिए बाहर नहीं आने पर अध्यापकों को बिना ज्ञापन दिए ही वापस लौटना पड़ा।
विज्ञापन