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Rewari News: सिविल अस्पताल में हर रोज आ रहे कुत्ता काटे के 40 मरीज
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फोटोे: 01 रेवाड़ी। सिविल अस्पताल स्थित कमरा नंबर 11 में मरीज को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाती ह
रेवाड़ी। जिले में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कहीं बेसहारा कुत्ते तो कहीं पालतू कुत्ते भी लोगों पर हमला कर रहे हैं। यही कारण है कि सिविल अस्पताल में कमरा नंबर 11 में कुत्ते के काटने के हर रोज 40 मरीज आ रहे हैं।
इन दिनों शहर से लेकर गांवों तक में आवारा कुत्ते झुंड में दिखाई देते हैं। शहर में कुत्तों के काटने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। प्रशासन की ओर से कुत्तों की नसबंदी पर जोर नहीं दिया जा रहा है, जिससे इनकी तादाद और बढ़ती जा रही है। अधिकारी जिम्मेदारी से कतरा रहे हैं।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद यादव ने बताया कि साल में छह महीने कुत्तों के प्रजनन के होते हैं। इस समय अगर इन्हें कोई छेड़ता है तो यह हमला कर देते हैं। यही वजह है गर्मियों के दिनों में कुत्ते के काटने के केस बढ़ जाते हैं। वैसे कुत्ते हमला नहीं करते, अगर कोई कुत्ता पागल हो जाए तो वह काटता है।
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भारी पड़ सकती है थोड़ी सी लापरवाही
रेबीज जानलेवा बीमारी है। किसी व्यक्ति में रेबीज के वायरस होते हैं तो लक्षण दिखने तक इलाज का समय निकल चुका होता है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि कई जानवरों के काटने से लार का संपर्क जब व्यक्ति के खून से होता है तो ये वायरस फैलता है। रेबीज से ग्रसित व्यक्ति में लक्षण बहुत दिनों के बाद उभरते हैं। रेबीज के आम लक्षण में बुखार आना, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, पागलपन के लक्षण, अनिद्रा, एक अंग में लकवा होना आदि प्रमुख हैं।
जानवर की निगरानी जरूरी
ज्यादातर लोगों में रेबीज के लक्षण चार से आठ सप्ताह में विकसित होने लगते हैं। रेबीज से संक्रमित जानवर किसी की गर्दन या सिर के आसपास काटता है तो लक्षण तेजी से उभरते हैं, क्योंकि वायरस व्यक्ति के दिमाग तक जल्दी पहुंच जाते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को जानवर ने काटा है, तो उसे जल्द से जल्द चिकित्सक से मिलना चाहिए और एंटीरेबीज टीका लगवाना चाहिए। काटने वाले पशु की निगरानी करनी चाहिए। 14 दिन के अंदर वह पशु मर जाता है तो स्थिति खतरनाक साबित होगी।
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वर्जन:
रेबीज को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। एंटी रेबीज टीकों की कोई कमी नहीं है। किसी जानवर के काटने पर तुरंत व्यक्ति को प्राथमिक उपचार घर पर कर लेना चाहिए, ताकि जहर फैलने से रोका जा सके। 24 घंटे के अंदर टिटनेस का टीका जरूर लगवा लें।
-अरुण गुप्ता, इंचार्ज, टीका केंद्र, नागरिक अस्पताल।
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इन दिनों शहर से लेकर गांवों तक में आवारा कुत्ते झुंड में दिखाई देते हैं। शहर में कुत्तों के काटने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। प्रशासन की ओर से कुत्तों की नसबंदी पर जोर नहीं दिया जा रहा है, जिससे इनकी तादाद और बढ़ती जा रही है। अधिकारी जिम्मेदारी से कतरा रहे हैं।
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पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद यादव ने बताया कि साल में छह महीने कुत्तों के प्रजनन के होते हैं। इस समय अगर इन्हें कोई छेड़ता है तो यह हमला कर देते हैं। यही वजह है गर्मियों के दिनों में कुत्ते के काटने के केस बढ़ जाते हैं। वैसे कुत्ते हमला नहीं करते, अगर कोई कुत्ता पागल हो जाए तो वह काटता है।
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भारी पड़ सकती है थोड़ी सी लापरवाही
रेबीज जानलेवा बीमारी है। किसी व्यक्ति में रेबीज के वायरस होते हैं तो लक्षण दिखने तक इलाज का समय निकल चुका होता है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि कई जानवरों के काटने से लार का संपर्क जब व्यक्ति के खून से होता है तो ये वायरस फैलता है। रेबीज से ग्रसित व्यक्ति में लक्षण बहुत दिनों के बाद उभरते हैं। रेबीज के आम लक्षण में बुखार आना, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, पागलपन के लक्षण, अनिद्रा, एक अंग में लकवा होना आदि प्रमुख हैं।
जानवर की निगरानी जरूरी
ज्यादातर लोगों में रेबीज के लक्षण चार से आठ सप्ताह में विकसित होने लगते हैं। रेबीज से संक्रमित जानवर किसी की गर्दन या सिर के आसपास काटता है तो लक्षण तेजी से उभरते हैं, क्योंकि वायरस व्यक्ति के दिमाग तक जल्दी पहुंच जाते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को जानवर ने काटा है, तो उसे जल्द से जल्द चिकित्सक से मिलना चाहिए और एंटीरेबीज टीका लगवाना चाहिए। काटने वाले पशु की निगरानी करनी चाहिए। 14 दिन के अंदर वह पशु मर जाता है तो स्थिति खतरनाक साबित होगी।
वर्जन:
रेबीज को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। एंटी रेबीज टीकों की कोई कमी नहीं है। किसी जानवर के काटने पर तुरंत व्यक्ति को प्राथमिक उपचार घर पर कर लेना चाहिए, ताकि जहर फैलने से रोका जा सके। 24 घंटे के अंदर टिटनेस का टीका जरूर लगवा लें।
-अरुण गुप्ता, इंचार्ज, टीका केंद्र, नागरिक अस्पताल।