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एक माह में होती है 24 करोड़ की बिजली चोरी
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Sun, 20 Dec 2015 11:52 PM IST
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जिले में जितनी बिजली चोरी एक महीने में होती है, उसकी बचत से रेवाड़ी शहर 58 दिन तक रोशन हो सकता है। ये खुलासा बिजली निगम के आंकड़ों से हुआ हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में हर माह औसत 22 फीसदी बिजली चोरी हो रही है। इसमें कुछ लाइन लॉस भी माना जाता है। बिजली निगम जिले में जितनी बिजली सप्लाई करता है, उसमें 22 फीसदी का बिल ही नहीं बनता। यानी उसकी कहीं रीडिंग ही नहीं है। ऐसे में यह पता चलता है कि यदि इतनी बिजली की कहीं यूनिट ही नहीं मिल रही है तो वह चोरी हो रही है। अधिकारी भी इसे स्वीकार करते हैं और कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक रेवाड़ी, धारूहेड़ा व कोसली डिविजन से एक माह में लगभग साढ़े तीन करोड़ बिजली यूनिट की चोरी व लोस हो जाता है। व्यवसायिक व घरेलू दरों सहित अन्य दरों का औसत जोड़ दिया जाए तो एक यूनिट की दर लगभग सात रुपये आती है, इस हिसाब गणना की जाए तो निगम के खजाने को हर महीने लगभग 24 करोड़ का चुना लग जाता है।
बिजली निगम के जानकारों की माने तो इस चोरी पर रोक लगाने के लिए सबसे जरूरी राजनैतिक इच्छा शक्ति है। बिना राजनैतिक इच्छा शक्ति के चोरी पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। शहरों में जहां मीटरों को बाहर लगाने के बावजूद मीटर धीमा करने जैसे काम होते हैं, वहीं गांव में सीधे कुंडी डालकर ही एसी तक चलाए जाते हैं।
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यह है जिले की स्थिति
रेवाड़ी जिला तीन डिवीजनों में बंटा हुआ है। जिसमें रेवाड़ी, धारूहेड़ा व कोसली शामिल है। वहीं शहर की बात करें तो इसे भी सिटी-1 व सिटी -2 में बांटा गया है। शहर मेंपर प्रतिदिन लगभग छह लाख यूनिट की खपत होती है तथा हर महीने लगभग एक करोड़ अस्सी लाख यूनिट की खपत हो जाती है।
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सिटी-1 में अकेले तीस लाख यूनिट की चोरी
बीते माह की बात करें तो सिटी-1 में 85 लाख यूनिट की सप्लाई की गई ,जिसमे से केवल 55 लाख यूनिट बिल्ड हुई है। वहीं इसी तरह से सिटी-2 में लगभग 96 लाख यूनिट की सप्लाई हुई,जबकि 88 लाख यूनिट ही बिल्ड हो पाई।
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ऐसे होगा 58 दिन तक मुफ्त में शहर...
तीनो डिविजनों को होने वाली चोरी व लोस को जोड़ दिया जाए तो जिले में प्रतिमाह लगभग साढ़े तीन करोड़ का चूना बिजली निगम को लग जाता है। निगम से मिले सितंबर माह के आंकडों की बात करें तो बिजली निगम को कुल 15,46,76,105 यूनिट की रिसीव हुई। जिसमें 12, 04, 30, 208 यूनिट को सोल्ड माना गया। यानी जिनका बिल मिला। इसका मतलब यह हुआ कि 3,42, 45, 897 यूनिट टेक्रिकल लोस के साथ चोरी हो गई। बिजली निगम के जानकारों की माने तो औसत सात प्रतिशत का टेक्रिकल लोस माना जाता है। बिजली निगम के आंकड़ों की के अनुसार सितंबर माह में 22.14 प्रतिशत की चोरी व लोस माना गया। वहीं यह आंकडा तीस प्रतिशत तक भी चला जाता है।
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ऐसे होती है बिजली चोरी
कुंडी डालकर गंाव के साथ शहरों में भी घर के सामने से जाने वाली तारों पर कुंडी डालकर बिजली चोरी बहुत ज्यादा की जाती है। जानकारों के अनुसार गांवों में लोग तारों पर सीधे कुंडी डालकर एसी और फ्रिज तक चलाते हैं।
-मीटर स्लो करने वाला गिरोह सक्रिय
-शहरों व कस्बों में मीटरों को घर से बाहर निकालने के बावजूद पोल पर लगे मीटरों को स्लो करने के लिए गिरोह सक्रिय है।
-मीटरो को जला दिया जाता है।
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एक्सपर्ट व्यू..............
राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ सरंपच को देनी होगी बिजली चोरी पर रोक की जिम्मेदारी
बिजली निगम के पूर्व एससी व हाल ही में उत्तर भारत पावर सप्लाई एसोसिएशन के चेयरमैन आरएस दहिया का कहना है कि जब तक राजनैतिक इच्छा शक्ति नहीं होगी बिजली चोरी पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। आरएस दहिया का कहना है कि जब तक गांवों में बिजली रोकने के लिए सरपंचों की जवाबदेही निर्धारित नहीं की जाएगी, चोरी पर लगाम लगाना संभव नहीं है।
बिजली कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान कंवरपाल यादव का कहना है कि चोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार को ठेका प्रथा छोड़कर नियमित भर्ती करनी होगी। वहीं उन्होंने भी माना की चोरी रोकने में राजनैतिक दबाव हावी है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि निगम की ओर से कार्रवाई की जाती है।
वर्जन-
चोरी रोकने के लिए मीटर बदलने का काम चल रहा है, वहीं इसी के साथ कुंडी डालने वालों सहित जो लोग अन्य तरीकों से चोरी करते हैं निगम की ओर से कार्रवाई की जाती है। चोरी पर रोक लगाने के लिए भविष्य में और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपनी मानसिकता भी बदलनी होगी, यदि लोग चोरी नहीं करेंगे तो उन्हें अधिक समय पर व कम कीमत में बिजली मिल सकती है।
-नवीन कुमार, एससी, रेवाड़ी सर्कल
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जानकारी के अनुसार जिले में हर माह औसत 22 फीसदी बिजली चोरी हो रही है। इसमें कुछ लाइन लॉस भी माना जाता है। बिजली निगम जिले में जितनी बिजली सप्लाई करता है, उसमें 22 फीसदी का बिल ही नहीं बनता। यानी उसकी कहीं रीडिंग ही नहीं है। ऐसे में यह पता चलता है कि यदि इतनी बिजली की कहीं यूनिट ही नहीं मिल रही है तो वह चोरी हो रही है। अधिकारी भी इसे स्वीकार करते हैं और कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक रेवाड़ी, धारूहेड़ा व कोसली डिविजन से एक माह में लगभग साढ़े तीन करोड़ बिजली यूनिट की चोरी व लोस हो जाता है। व्यवसायिक व घरेलू दरों सहित अन्य दरों का औसत जोड़ दिया जाए तो एक यूनिट की दर लगभग सात रुपये आती है, इस हिसाब गणना की जाए तो निगम के खजाने को हर महीने लगभग 24 करोड़ का चुना लग जाता है।
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बिजली निगम के जानकारों की माने तो इस चोरी पर रोक लगाने के लिए सबसे जरूरी राजनैतिक इच्छा शक्ति है। बिना राजनैतिक इच्छा शक्ति के चोरी पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। शहरों में जहां मीटरों को बाहर लगाने के बावजूद मीटर धीमा करने जैसे काम होते हैं, वहीं गांव में सीधे कुंडी डालकर ही एसी तक चलाए जाते हैं।
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यह है जिले की स्थिति
रेवाड़ी जिला तीन डिवीजनों में बंटा हुआ है। जिसमें रेवाड़ी, धारूहेड़ा व कोसली शामिल है। वहीं शहर की बात करें तो इसे भी सिटी-1 व सिटी -2 में बांटा गया है। शहर मेंपर प्रतिदिन लगभग छह लाख यूनिट की खपत होती है तथा हर महीने लगभग एक करोड़ अस्सी लाख यूनिट की खपत हो जाती है।
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सिटी-1 में अकेले तीस लाख यूनिट की चोरी
बीते माह की बात करें तो सिटी-1 में 85 लाख यूनिट की सप्लाई की गई ,जिसमे से केवल 55 लाख यूनिट बिल्ड हुई है। वहीं इसी तरह से सिटी-2 में लगभग 96 लाख यूनिट की सप्लाई हुई,जबकि 88 लाख यूनिट ही बिल्ड हो पाई।
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ऐसे होगा 58 दिन तक मुफ्त में शहर...
तीनो डिविजनों को होने वाली चोरी व लोस को जोड़ दिया जाए तो जिले में प्रतिमाह लगभग साढ़े तीन करोड़ का चूना बिजली निगम को लग जाता है। निगम से मिले सितंबर माह के आंकडों की बात करें तो बिजली निगम को कुल 15,46,76,105 यूनिट की रिसीव हुई। जिसमें 12, 04, 30, 208 यूनिट को सोल्ड माना गया। यानी जिनका बिल मिला। इसका मतलब यह हुआ कि 3,42, 45, 897 यूनिट टेक्रिकल लोस के साथ चोरी हो गई। बिजली निगम के जानकारों की माने तो औसत सात प्रतिशत का टेक्रिकल लोस माना जाता है। बिजली निगम के आंकड़ों की के अनुसार सितंबर माह में 22.14 प्रतिशत की चोरी व लोस माना गया। वहीं यह आंकडा तीस प्रतिशत तक भी चला जाता है।
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ऐसे होती है बिजली चोरी
कुंडी डालकर गंाव के साथ शहरों में भी घर के सामने से जाने वाली तारों पर कुंडी डालकर बिजली चोरी बहुत ज्यादा की जाती है। जानकारों के अनुसार गांवों में लोग तारों पर सीधे कुंडी डालकर एसी और फ्रिज तक चलाते हैं।
-मीटर स्लो करने वाला गिरोह सक्रिय
-शहरों व कस्बों में मीटरों को घर से बाहर निकालने के बावजूद पोल पर लगे मीटरों को स्लो करने के लिए गिरोह सक्रिय है।
-मीटरो को जला दिया जाता है।
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एक्सपर्ट व्यू..............
राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ सरंपच को देनी होगी बिजली चोरी पर रोक की जिम्मेदारी
बिजली निगम के पूर्व एससी व हाल ही में उत्तर भारत पावर सप्लाई एसोसिएशन के चेयरमैन आरएस दहिया का कहना है कि जब तक राजनैतिक इच्छा शक्ति नहीं होगी बिजली चोरी पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। आरएस दहिया का कहना है कि जब तक गांवों में बिजली रोकने के लिए सरपंचों की जवाबदेही निर्धारित नहीं की जाएगी, चोरी पर लगाम लगाना संभव नहीं है।
बिजली कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान कंवरपाल यादव का कहना है कि चोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार को ठेका प्रथा छोड़कर नियमित भर्ती करनी होगी। वहीं उन्होंने भी माना की चोरी रोकने में राजनैतिक दबाव हावी है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि निगम की ओर से कार्रवाई की जाती है।
वर्जन-
चोरी रोकने के लिए मीटर बदलने का काम चल रहा है, वहीं इसी के साथ कुंडी डालने वालों सहित जो लोग अन्य तरीकों से चोरी करते हैं निगम की ओर से कार्रवाई की जाती है। चोरी पर रोक लगाने के लिए भविष्य में और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपनी मानसिकता भी बदलनी होगी, यदि लोग चोरी नहीं करेंगे तो उन्हें अधिक समय पर व कम कीमत में बिजली मिल सकती है।
-नवीन कुमार, एससी, रेवाड़ी सर्कल