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ऐतिहासिक धरोहर गोकल गेट के दो प्रवेश द्वारों पर अवैध कब्जा

Wed, 11 Jul 2018 12:53 AM IST
Updated Wed, 11 Jul 2018 12:53 AM IST
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ऐतिहासिक धरोहर गोकल गेट के दो प्रवेश द्वारों पर अवैध कब्जा
ऐतिहासिक धरोहर गोकल गेट के दो प्रवेश द्वारों पर अवैध कब्जा
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। अहीरवाल की राजधानी रेवाड़ी की ऐतिहासिक विरासतों में शुमार है शहर के प्रवेश द्वारों पर बने चार गेट हैं। जब शहर में बेहद कम आबादी वाला था उस समय ब्रिटिश शासनकाल में शहर के प्रवेश द्वारों पर चार गेट बनाए गए थे। इनको गोकल गेट, कानोड़ गेट, भाड़ावास गेट और दिल्ली गेट नाम दिया गया। बढ़ती आबादी के साथ ऐतिहासिक विरासत अपने संघर्ष के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें तीन तो प्रशासन की रुचि के बाद अपना अस्तित्व बचाने में कामयाब रहे लेकिन गोकल गेट मुख्य बाजार में होने की वजह से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
अन्य गेटों की तरह शहर के गोकल गेट पर दो छोटे गेट जो कि अब पूरी तरह से कब्जे में चले गए हैं। उनका नामोनिशान तक मिट गया है। इन ऐतिहासिक धरोहर को बचाने का जिम्मा संभालने वाले पुरातत्व विभाग उस पर ध्यान नहीं दे रहा है। इससे भी ज्यादा दुख इस बात का है कि जिला प्रशासन सब कुछ जानकर भी अनजान बना हुआ है।
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रेवाड़ी एक ऐतिहासिक धरा है। यहां भारत के अंतिम सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य की जहां हवेली है, वहीं कई अन्य धरोहर भी हैं। ब्रिटिश सरकार में बनाए चार गेटों का उक्त सरकार में विशेष महत्व भी रहा है। कुछ साल पूर्व तत्कालीन उपायुक्त ने सौंदर्यीकरण योजना के तहत इनका जीर्णोद्धार कराया था। इन पर काफी खर्च भी आया था। आज तीन गेटों के दोनों अन्य छोटे रास्ते सही सलामत है, इनकी शोभा भी अलग दिखाई देती है, लेकिन गोकल गेट के दोनों छोटे रास्तों पर कब्जे हो गए हैं। इन छोटे गेट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि करीब 15 वर्ष पूर्व नगर परिषद ने कानोड़ गेट की साइड की जगह दुकान बनाने के लिए किराए पर दी थी। किराएदार ने दुकान का निर्माण करते समय इस ऐतिहासिक धरोहर के एक गेट की दीवार का कुछ हिस्सा अपनी दुकान में मिला लिया था। उस समय शहर के लगभग सभी बाजारों की एसोसिएशन के अलावा सामाजिक संगठनों व कुछ राजनीतिक संगठन के पदाधिकारियों ने इसका कड़ा विरोध किया था। परिणाम यह हुआ कि प्रशासन ने उक्त दुकान को पूरी तरह ध्वस्त कर इस धरोहर की खूबसूरती को बचाया था। गोकल गेट के मामले में जहां प्रशासन पूरी तरह सोया हुआ है, वहीं पुरातत्व विभाग ने भी अपने कर्तव्य पालन में कोई रुचि नहीं दिखाई है।
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मेरे नोटिस में यह जानकारी नहीं है कि किसी ने गोकल गेट के दोनों छोटे गेटों पर कब्जा किया हुआ है। मामले की जांच की जाएगी। यदि कब्जा हुआ तो कब्जाधारियों पर कार्रवाई होगी। ऐतिहासिक धरोहर को खराब नहीं होने दिया जाएगा। एसडीएम जितेंद्र कुमार
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