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200 से अधिक बच्चे नहीं जा पा रहे स्कूल
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कोसली। क्षेत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू करने के सरकारी दावे मात्र कागजों तक ही सीमित होकर रह गए है। दो वक्त कि रोटी के जुगाड़ में अनेकों बच्चे स्कूल जाने की बजाए कूड़ा बीनने में लगे हैं। रेवाड़ी क्षेत्र में सैकड़ों बच्चे मां बाप का साया सिर से उठ जाने के कारण या फिर गरीबी के चलते दो जून कि रोटी का जुगाड़ करने के लिए कूड़ा बीनने के अलावा होटल, ढाबों पर बर्तन धोने का काम कर रहे हैं।
सामाजिक संस्था एकता मंच की ओर से किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि कोसली उपमंडल में छह वर्ष से 18 वर्ष तक के 200 बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इनमें 70 प्रतिशत लड़कियां है। ज्यादातर अनुसूचित जाति के हैं। क्षेत्र में दर्जनों ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के 700 बच्चे अलग से हैं। जिन्होंने आज तक स्कूल का दरवाजा तक नहीं देखा है। क्षेत्र में आज तक अभियान चला कर इन्हें स्कूल जाने के लिए ना तो प्रेरित किया गया। उनके पुनर्वास व शिक्षा के लिए गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है। एकता मंच के अध्यक्ष थावर सिहं ने बताया कि बहुत से बच्चे समाज से दुत्कार के कारण निराशा व हताशा का शिकार हो रहे हैं।
शिक्षा के अधिकार में बड़ा अवरोध उनके सिर पर पिता का साया न होना है। पढ़ने की इच्छा रखने वाले बच्चे भी गरीबी के कारण पढ़ नहीं पा रहे। उन्होंने कहा कि इस बारे में शिक्षामंत्री को भी अवगत करा चुके हैं। शिक्षामंत्री का आश्वासन आज तक पूरा नहीं हो सका।
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हमारा प्रयास है कि क्षेत्र में कोई ऐसा बच्चा ना रहे जो स्कूल ना जाता हो। इसके बाद भी अगर ऐसे बच्चे हैं, तो वे अपनी ओर से भरपूर प्रयास करेंगे कि उन्हें स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए। वह शिक्षा ग्रहण करें ।
जवान सिहं मैहरा, मौलिक खंड शिक्षा अधिकारी, कोसली।
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सामाजिक संस्था एकता मंच की ओर से किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि कोसली उपमंडल में छह वर्ष से 18 वर्ष तक के 200 बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इनमें 70 प्रतिशत लड़कियां है। ज्यादातर अनुसूचित जाति के हैं। क्षेत्र में दर्जनों ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के 700 बच्चे अलग से हैं। जिन्होंने आज तक स्कूल का दरवाजा तक नहीं देखा है। क्षेत्र में आज तक अभियान चला कर इन्हें स्कूल जाने के लिए ना तो प्रेरित किया गया। उनके पुनर्वास व शिक्षा के लिए गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है। एकता मंच के अध्यक्ष थावर सिहं ने बताया कि बहुत से बच्चे समाज से दुत्कार के कारण निराशा व हताशा का शिकार हो रहे हैं।
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शिक्षा के अधिकार में बड़ा अवरोध उनके सिर पर पिता का साया न होना है। पढ़ने की इच्छा रखने वाले बच्चे भी गरीबी के कारण पढ़ नहीं पा रहे। उन्होंने कहा कि इस बारे में शिक्षामंत्री को भी अवगत करा चुके हैं। शिक्षामंत्री का आश्वासन आज तक पूरा नहीं हो सका।
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हमारा प्रयास है कि क्षेत्र में कोई ऐसा बच्चा ना रहे जो स्कूल ना जाता हो। इसके बाद भी अगर ऐसे बच्चे हैं, तो वे अपनी ओर से भरपूर प्रयास करेंगे कि उन्हें स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए। वह शिक्षा ग्रहण करें ।
जवान सिहं मैहरा, मौलिक खंड शिक्षा अधिकारी, कोसली।