फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   अधिकारी, डॉक्टर, बिजली, पानी सब किसानों से रूठे

अधिकारी, डॉक्टर, बिजली, पानी सब किसानों से रूठे

Sun, 30 Jul 2017 11:31 PM IST
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
अधिकारी, डॉक्टर, बिजली, पानी सब किसानों से रूठे
अधिकारी, डॉक्टर, बिजली, पानी सब किसानों से रूठे
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
साहब! किसान की सभी जगह पिसाई हो रही है। उसकी बात को सुना नहीं जाता। बच्चों के रिश्ते करना मुश्किल हो गया। फीस भी नहीं भर पा रहे हैं। आज एक किसान को अपनी बेटी की शादी करने के लिए आधा किला गिरवी रखना पड़ता है। यह नजारा रविवार को किसान भवन में देखने को मिला। भारतीय किसान संघ के दरबार में हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन रमेश यादव के सामने किसानों ने अपनी पीड़ा रखी।
करीब ढाई घंटे के दरबार में पहले किसानों को बोलने का अवसर दिया गया। यहां किसानों ने सरकार के खिलाफ अपनी जमकर भड़ास निकाली। उनका कहना था कि गांवों में किसानों को न अधिकारी मिलते है न तो डॉक्टर। बिजली मिलती है न पानी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का जवाब देने को कहा गया। दरबार की सबसे खास बात यह रही कि किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के नंबर तक सार्वजनिक कराए गए, जिससे कि किसानों को कोई दिक्कत होने पर वह सीधा संबंधित अधिकारी से बात कर सके।
विज्ञापन


पानी का मुद्दा रहा हावी
रेवाड़ी में किसान दरबार हो और पानी की समस्या नहीं आए। ऐसा हो ही नहीं सकता। किसानों ने पानी की मार से चेयरमैन को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पीने को भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, खेती तो दूर की बात है। इस समय नहर आ रही हैं लेकिन वह एक जगह से आगे नहीं बढ़ पा रही है। एसवाईएल का पानी तो दूर की बात है। पहले हमारे हिस्से का पानी तो दिला दो। मुआवजों में भी अनियमितता पाई गई है। देखा जा रहा है कि कुछ लोग पटवारी से मिलीभगत कर कम नुकसान को अधिक मुआवजा बनवा लेते हैं। वहीं बहुत सारे किसान जिन्हें अधिक नुकसान हुआ है उन्हें पर्याप्त मुआवजा भी नहीं मिल पाता।
विज्ञापन
विज्ञापन


अस्पतालों में नहीं मिलते डॉक्टर
किसानों ने बताया कि गांवों में बनीं डिस्पेंसरी सूनी पड़ी रहती हैं। यहां वेटरनरी डॉक्टर नहीं मिलते। ऐसे में अगर पशु बीमार हो जाए तो उन्हें कहां लेकर जाएं। गांवों में बिजली की समस्या भी बहुत बड़ी है। किसानों का कहना था कि जापान में किसानों को 74 फीसदी, चीन में 34.5 फीसदी और पाकिस्तानी में 29 फीसदी सब्सिडी मिलती है। भारत में किसानों को केवल तीन फीसदी सब्सिडी मिलती है। ऐसे में किसान कैसे खुशहाल होगा। किसान भीम सिंह यादव ने कहा कि आज अधिकारी और कर्मचारी जवाबदेह नहीं हैं। उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। लापरवाही मिलने पर कर्मचारी की तनख्वाह काटी जाए। उन्होंने अधिकारियों से यह अपील भी की, कि जो फसल मंडी में आए वह उसी दिन बिक जाए। दरबार में जमीन के मुआवजों का मामला भी गर्माया गया। उन्होंने कहा कि उनकी जमीन एनएच -71 पर वर्ष 2010 में एक्वायर की गई थी। सात साल हो गए। उसकी मां भी मर गई। लेकिन इसकी किश्त नहीं मिली। लगता है कि हम भी मर जाएंगे, लेकिन यह किश्त नहीं आएगी।

अधिकारियों ने बताए समाधान
किसानों की समस्याओं के बात वहां मौजूद अधिकारियों ने एक-एक समस्याओं का जवाब दिया। बागवानी विभाग की ओर से बताया कि किसानों को बागवानी के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की गई हैं। जिन पर मिली सब्सिडी का लाभ लेकर किसान अपनी पैदावार बढ़ा सकता है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि गांवों में डिस्पेंसरी में ईमानदारी से दवाइयां बांटी जाती हैं। रहीं डिस्पेंसरीज में चिकित्सक नहीं मिलने की बात तो चिकित्सक डोर-टू-डोर जाते हैं। जहां जरूरत होती है चिकित्सक को वहां जाना पड़ता है। अगर किसी को जल्दी है तो वह चिकित्सक के मोबाइल पर फोन कर अपनी समस्या बता सकता है। वहीं मार्केट कमेटी की ओर से दिए जवाब में बताया कि सरकार ने दुर्घटनाग्रस्त किसानों के लिए खेतिहर सुरक्षा योजना चला रखी है। जिसमें अंगुली कटने से लेकर अकाल मृत्यु होने तक के लिए मुआवजे का प्रावधान है। लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं। मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम एवं एफआईआर रिपोर्ट होना जरूरी हे। साथ ही मार्केट कमेटी कार्यालय में 60 दिन के भीतर एप्लीकेशन फॉर्म जमा कराना जरूरी है।

माल बेचने के लिए किसान नहंीं होंगे परेशान
उन्होंने कहा कि मंडी में माल लेकर आए किसान परेशान नहीं होंगे। ई-मंडी का फार्मेट लागू हो रहा है। जो फसल मंडी में दो 12 बजे तक आएगी। उसकी दोपहर 12 से दो बजे तक बोली लगेगी। वहीं जो फसल शाम चार बजे तक आएगी उस फसल की शाम चार से छह बजे तक बोली लगेगी। वहीं लाइसेंस प्रक्रिया भी अभी-अभी शुरू की गई है। किसान कहीं पर भी जाकर अपनी फसल बेच सकता है। उसके खाते में रकम आ जाएगी।

सीटीएम से कहा, हिंदी में बोलो
सीटीएम डॉ. जयपाल सिंह जब अपने विभाग से संबंधित कहने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने कहा कि सरकारी योजना के अनुसार 50 हजार पौधे लगाने हैं। इसमें एक घर में कम से कम एक और अधिक से अधिक पांच फ्रूट ट्री के पौधे लगेंगे। इस पर वहां मौजूद किसान नेताओं ने कहा कि हिंदी में फ्रूट ट्री का मतलब बताइए। इस पर उन्होंने फलदार पौधे कहा। वहीं जब कोई समस्या आने पर अपना नंबर बताने की बारी आई तो उन्होंने वह भी अंग्रेजी में बताना शुरू किया। इसके बाद किसानों के आग्रह पर उन्होंने अपना नंबर हिंदी में बताया।

60 रुपये में तो ग्रिल की पढ़ाई जाती है
भारतीय किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष ओम सिंह ने कहा कि सरकार के पास भंडारण की व्यवस्था नहीं है। सरकार अगर अपने घोषणापत्र पर अमल नहीं करती तो वह कागज का टुकड़ा हैं। एक उदाहरण देकर कहा कि एक बार एक जेबीटी टीचर जिसे 60 रुपये मिलते थे एक बच्चे को जीआईआरएल का मतलब बच्चे को ग्रिल पढ़ा रहे थे। कोई समझदार इंसान वहां से गुजरा और उसने कहा कि गुरुजी इसका मतलब ताक गर्ल होता है तो गुरुजी ने कहा कि 60 रुपये में तो ऐसा ही पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि शासन मिलने के बाद सरकारें गूंगी हो जाती हैं। उन्हें ऊंचा सुनाई देने लग जाता है। ऐसे में किसानों का संगठित होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में किसानों का अधिवेशन होने वाला है। अगर नाक दबाओगे तो मुंह अपने आप खुलेगा। अगर किसान अपनी पर आ गए तो योजनाएं दिल्ली में नहीं, किसानों की चौपालों पर बनेंगी। हालांकि उन्होंने किसान नेता रामकिशन महलावत की मांग पर नहरी पानी का समान बंटवारा और किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने की बात कही।


चेयरमैन ने किया सरकारी योजनाओं का बखान
अपना नंबर आने पर चेयरमैन रमेश यादव सरकार की योजनाओं का बखान करने लगे। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद अब किसानों के पक्ष में योजनाएं बनने लगी हैं। प्रशासनिक तंत्र का स्वभाव बदला है। अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने चिंता जताई की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य अपने हितों का ध्यान रख रहे हैं। और तो और दूसरे राज्य से दुराग्रह भी रखते हैं। उन्होंने यह बात एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पंजाब को लेकर कहा। संघ के जिलाध्यक्ष भजनलाल खटाणा ने सभी का आभार जताया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed