{"_id":"677046af5ecd25f860052d04","slug":"15-children-adopted-in-one-year-1453-children-need-special-care-rewari-news-c-198-1-rew1001-213315-2024-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: एक वर्ष में 15 बच्चे गोद दिए गए, 1453 बच्चों पर विशेष देखरेख की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: एक वर्ष में 15 बच्चे गोद दिए गए, 1453 बच्चों पर विशेष देखरेख की जरूरत
Sun, 29 Dec 2024 12:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 29 Dec 2024 12:13 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिला बाल संरक्षण की ओर से जिले में जनवरी 2024 से अबतक 15 बच्चे गोद दिए गए। सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथारिटी पोर्टल पर 2209 बच्चे रजिस्टर्ड हैं, जिसमें 756 बच्चे बिल्कुल ठीक हैं। इनमें 1453 ऐसे बच्चे हैं, जिनकी विशेष देखरेख की जरूरत है।
यह जानकारी उपायुक्त अभिषेक मीणा ने दी। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर 35,405 अभिभावकों ने इन बच्चों को गोद लेने के लिए पंजीकरण कराया है। औसत देखें तो एक बच्चे को गोद लेने के लिए तकरीबन 16 अभिभावकों ने आवेदन किया है। गोद लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को कम-से कम 3 साल तक इंतजार करना पड़ता है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी दीपिका यादव ने बताया कि बच्चे को छोड़ने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यदि अभिभावक चाहें तो सीधे चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी के समक्ष भी बच्चे को छोड़ सकते हैं। स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी में 1 बच्ची है। यहां से अभी तक 37 बच्चे अडॉप्ट किए जा चुके हैं। जनवरी 2024 से अभी तक 15 बच्चे गोद दिए गए हैं। जिला बाल संरक्षण इकाई रैड क्रॉस भवन में कमरा नंबर 788 में संचालित है।
बताया कि अगर किसी को कोई बच्चा मिले या इस बारे में सूचना मिले तो उसकी जानकारी चाइल्ड हेल्प लाइन, पुलिस हेल्प लाइन या बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई को दी जा सकती है। फोन नम्बर 01274221852 पर भी सूचना दी जा सकती है। नवजात बच्चों को लावारिस हालात में छोड़ना एक अमानवीय कृत्य तो है ही, साथ ही यह है एक संगीन कानूनी अपराध भी है। यदि कोई भी अपने नवजात बच्चों का किसी भी परिस्थिति वश पालन पोषण करने में असमर्थ है, तो उसे लावारिस हालत में छोड़ने के स्थान पर 1098 पर कॉल कर जानकारी दी जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रेवाड़ी। जिला बाल संरक्षण की ओर से जिले में जनवरी 2024 से अबतक 15 बच्चे गोद दिए गए। सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथारिटी पोर्टल पर 2209 बच्चे रजिस्टर्ड हैं, जिसमें 756 बच्चे बिल्कुल ठीक हैं। इनमें 1453 ऐसे बच्चे हैं, जिनकी विशेष देखरेख की जरूरत है।
यह जानकारी उपायुक्त अभिषेक मीणा ने दी। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर 35,405 अभिभावकों ने इन बच्चों को गोद लेने के लिए पंजीकरण कराया है। औसत देखें तो एक बच्चे को गोद लेने के लिए तकरीबन 16 अभिभावकों ने आवेदन किया है। गोद लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को कम-से कम 3 साल तक इंतजार करना पड़ता है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी दीपिका यादव ने बताया कि बच्चे को छोड़ने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यदि अभिभावक चाहें तो सीधे चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी के समक्ष भी बच्चे को छोड़ सकते हैं। स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी में 1 बच्ची है। यहां से अभी तक 37 बच्चे अडॉप्ट किए जा चुके हैं। जनवरी 2024 से अभी तक 15 बच्चे गोद दिए गए हैं। जिला बाल संरक्षण इकाई रैड क्रॉस भवन में कमरा नंबर 788 में संचालित है।
विज्ञापन
बताया कि अगर किसी को कोई बच्चा मिले या इस बारे में सूचना मिले तो उसकी जानकारी चाइल्ड हेल्प लाइन, पुलिस हेल्प लाइन या बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई को दी जा सकती है। फोन नम्बर 01274221852 पर भी सूचना दी जा सकती है। नवजात बच्चों को लावारिस हालात में छोड़ना एक अमानवीय कृत्य तो है ही, साथ ही यह है एक संगीन कानूनी अपराध भी है। यदि कोई भी अपने नवजात बच्चों का किसी भी परिस्थिति वश पालन पोषण करने में असमर्थ है, तो उसे लावारिस हालत में छोड़ने के स्थान पर 1098 पर कॉल कर जानकारी दी जा सकती है।
विज्ञापन