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आईजीयू में टर्निटिन रोकेगा शोध की चोरी
Updated Fri, 20 Apr 2018 01:08 AM IST
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आईजीयू में टर्निटिन रोकेगा शोध की चोरी
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आइजीयू) में शोध करने वाले विद्यार्थियों और साहित्यकारों का शोध और साहित्य चोरी नहीं हो सकेगा। इसके लिए विशेष टर्निटिन नामक सॉफ्टवेयर शोध करने वाले विद्यार्थियों और साहित्यकारों के लिए कारगर साबित होगा। यह सुविधा उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक अखंडता और साहित्यिक चोरी की रोकथाम के तहत लागू की जा रही है। रेवाड़ी के मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में यह सॉफ्टवेयर आरंभ करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। संस्थान के वरिष्ठ शिक्षकों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर से रेवाड़ी के साथ महेंद्रगढ़ के कॉलेजों के शिक्षकों और शोध कार्य करने वाले विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा। टर्निटिन नामक सॉफ्टवेयर से साहित्यिक चोरी रोकने और शोधार्थियों के कार्य की गुणवत्ता को परखने में मदद मिलेगी। इसके लिए विश्वविद्यालय की तरफ से इस सॉफ्टवेयर को लेने के लिए सदस्यता ली जा चुकी है। कॉमर्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. तेज सिंह को इस प्रोजेक्ट का चेयरमैन बनाया गया है। उनकी अध्यक्षता में वेब कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग की डॉ. पिंकी इंसां और डॉ. ममता अग्रवाल ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अब वे अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को इस सॉफ्टवेयर के संचालन और इसकी उपयोगिता के बारे में प्रशिक्षण देंगी। डॉ. पिंकी इंसां ने बताया कि सभी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में एकता की संस्कृति बनाने, प्रकाशित शोध कार्यों की मौलिकता की जांच के लिए टर्निटिन एक बेहतर सॉफ्टवेयर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विश्व में सबसे बड़ा डाटाबेस है। आइजीयू और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में अखंडता और अनुसंधान की उत्कृष्टता को बनाए रखने के लिए यह उपकरण लाभकारी साबित होगा। टर्निटिन एजूकेशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक वरुण पिपलानी ने तकनीकी बारीकियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आइजीयू) में शोध करने वाले विद्यार्थियों और साहित्यकारों का शोध और साहित्य चोरी नहीं हो सकेगा। इसके लिए विशेष टर्निटिन नामक सॉफ्टवेयर शोध करने वाले विद्यार्थियों और साहित्यकारों के लिए कारगर साबित होगा। यह सुविधा उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक अखंडता और साहित्यिक चोरी की रोकथाम के तहत लागू की जा रही है। रेवाड़ी के मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में यह सॉफ्टवेयर आरंभ करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। संस्थान के वरिष्ठ शिक्षकों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर से रेवाड़ी के साथ महेंद्रगढ़ के कॉलेजों के शिक्षकों और शोध कार्य करने वाले विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा। टर्निटिन नामक सॉफ्टवेयर से साहित्यिक चोरी रोकने और शोधार्थियों के कार्य की गुणवत्ता को परखने में मदद मिलेगी। इसके लिए विश्वविद्यालय की तरफ से इस सॉफ्टवेयर को लेने के लिए सदस्यता ली जा चुकी है। कॉमर्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. तेज सिंह को इस प्रोजेक्ट का चेयरमैन बनाया गया है। उनकी अध्यक्षता में वेब कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग की डॉ. पिंकी इंसां और डॉ. ममता अग्रवाल ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अब वे अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को इस सॉफ्टवेयर के संचालन और इसकी उपयोगिता के बारे में प्रशिक्षण देंगी। डॉ. पिंकी इंसां ने बताया कि सभी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में एकता की संस्कृति बनाने, प्रकाशित शोध कार्यों की मौलिकता की जांच के लिए टर्निटिन एक बेहतर सॉफ्टवेयर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विश्व में सबसे बड़ा डाटाबेस है। आइजीयू और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में अखंडता और अनुसंधान की उत्कृष्टता को बनाए रखने के लिए यह उपकरण लाभकारी साबित होगा। टर्निटिन एजूकेशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक वरुण पिपलानी ने तकनीकी बारीकियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।