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हरियाणा: शोध से खुलेगा पुरा पाषाण काल की मानव संस्कृति का रहस्य, पुरातत्व विभाग ने अरावली के प्रागैतिहासिक स्थलों के लिए मांगी सुरक्षा

Fri, 12 Nov 2021 09:48 AM IST
प्रमोद कुमार यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: प्रमोद कुमार Updated Fri, 12 Nov 2021 09:48 AM IST
सार

हरियाणा में खनन व निर्माण गतिविधियों पर रोक की मांग के लिए पुरातत्व विभाग ने सक्रियता दिखाई है। क्षेत्र के विस्तृत अध्ययन के लिए विभाग को लगभग दो साल लगेंगे। विभाग शोध करेगा, जिसके बाद पुरा पाषाण काल की मानव संस्कृति का रहस्य खुलेगा। पुरातत्व विभाग ने अरावली के प्रागैतिहासिक स्थलों की सुरक्षा की मांग की है।

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Research in Haryana will reveal the secret of human culture of the Paleolithic period
अरावली क्षेत्र - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा के अरावली क्षेत्र में पहली बार मिले शैल चित्रों के शोध से पुरा पाषाण काल की मानव संस्कृति का रहस्य खुल सकता है। पुरातत्व विभाग ने शोध शुरू कराने से पहले गुरुग्राम, फरीदाबाद व आसपास के क्षेत्र में स्थित इन प्रागैतिहासिक स्थलों के लिए सरकार से सुरक्षा मांगी है। क्षेत्र के विस्तृत अध्ययन व शोध में कम से कम दो साल लगेंगे। विभाग के प्रधान सचिव ने इन स्थलों को सुरक्षित करने का प्रस्ताव सरकार को सिफारिशों के साथ भेजा है। जिसमें स्थलों के आसपास खनन व निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने का आग्रह भी शामिल है। संभवतः यह स्थल उत्तर पश्चिम भारत में अब तक खोजी गई पाषाण युग की सबसे बड़ी बस्तियों में से हैं।

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इसलिए ओपन एयर साइट्स सहित सभी रॉक शेल्टर का दस्तावेजीकरण और मानचित्रण जरूरी है। विभाग ने जून 2021 में मंगर बानी, शिलाखरी, मंगर, कोट, धौज, रोज का गुज्जर, दमदमा क्षेत्र में खोजबीन की थी। उसमें शैल आश्रयों से पाषाण युग के उपकरण व चित्र मिले हैं। पुरा पाषाण काल के औजारों की पहचान अरावली के कुछ हिस्सों में पहले भी की जा चुकी है, लेकिन यह पहली बार है जब बड़े पैमाने पर गुफा चित्र और रॉक कला पाई गई है। अरावली में अब तक कोई शैल चित्र नहीं मिले थे।
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यह भेजा प्रस्ताव
विभाग ने सरकार को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि यह संरक्षित स्थल नहीं हैं, इसे ठीक से प्रलेखित किया गया है, न ही पूरी खोज हुई है। खोज से हरियाणा का इतिहास सामने आएगा। गुफा चित्रों को अभी तक दिनांकित नहीं किया गया है। कुछ पेंटिंग प्रागैतिहासिक हैं और कुछ बाद के चरणों की हैं। पुरा पाषाण काल की मानव संस्कृति और उपकरणों के विकास को समझने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है।


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           स्थलों के लिए विभाग की प्रमुख सिफारिशें

  • पहचाने गए पाषाण युग के सभी स्थानों की सुरक्षा पर जल्द विचार करें। क्षेत्र गैर मुमकिन पहाड़ के अंतर्गत आता है। कुल क्षेत्रफल लगभग 4800 हेक्टेयर है। स्थल संरक्षण एवं प्रबंधन की योजना जल्दी तैयार की जाएगी।
  • स्थलों की स्थिति और संख्या का मूल्यांकन करने के लिए गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है। विभाग जल्द ट्रायल ट्रेंच खुदाई शुरू कराएगा।
  • नेशनल रिसर्च लेबोरेटरी फॉर कंजर्वेशन लखनऊ, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज लखनऊ, फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी अहमदाबाद, गुजरात के सहयोग से रॉक पेंटिंग का संरक्षण और तारीखीकरण किया जाएगा।
  • स्थलों को प्रागैतिहासिक पारिस्थितिक वन में बदलने की जरूरत है।
  • पंजाब प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम-1964 (राज्य अधिनियम) के तहत स्थलों को राज्य संरक्षण प्रदान करें
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