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कुश्ती हटती तो खेल छोड़ खेती करते
सोनीपत/जयबीर सिंह
Updated Tue, 10 Sep 2013 12:03 AM IST
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भविष्य को लेकर चिंतित जूनियर पहलवानों में ओलंपिक में कुश्ती के बरकरार रहने से खुशी की लहर दौड़ गई है। जूनियर पहलवानों के साथ-साथ सीनियर पहलवानों ने भी ओलंपिक संघ के फैसले का स्वागत किया है।
उनका मानना है कि अगर कुश्ती को 2020 ओलंपिक में रखने के हक में फैसला नहीं आता तो कुश्ती में भविष्य की तलाश कर रहे पूरी दुनिया के जूनियर पहलवानों को भारी आघात लगता। अंडर-16 कामनवेल्थ में स्वर्ण पदक विजेता गांव भैंसवाल निवासी अमित ने कहा कि अगर कुश्ती को ओलंपिक से बाहर कर दिया जाता तो वह किसी अन्य खेल में जाने की बजाय खेती करना पसंद करता।
13 से 18 अगस्त को बुल्गारिया के साफिया में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक विजेता प्रदीप रायपुर और भैंसवाल निवासी प्रवीन का कहना है कि इस फैसले से वे ओलंपिक में पदक लाने की तैयारी में जुट गए हैं। 2011 में आयोजित जूनियर एशिया कांस्य पदक विजेता युद्धवीर ने भी इस फैसले से खुशी जताई है।
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वहीं भारत कुमार, पांच बार के जूनियर एशिया स्वर्ण पदक विजेता और सीनियर के कांस्य पदक विजेता कुलबीर का मानना है कि कुश्ती के खिलाड़ी अन्य खेलों में ज्यादा आगे तक नहीं जा सकते। वह इस खेल में ही भविष्य तलाशते हैं।
सीनियरों ने दी शुभकामनाएं
भारतीय खेल प्राधिकरण के उत्तर भारतीय सेंटर में अभ्यास कर रहे ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने कहा कि 2020 में होने वाले ओलंपिक में कुश्ती को बाहर रखने पर विचार चल रहा था, जिससे जूनियर खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लगा था। कुश्ती के पक्ष में वोटिंग होने से अब पहलवान बिना चिंता के अभ्यास कर सकेंगे। उन्होंने पहलवानों द्वारा 2020 ओलंपिक में कम से कम चार या पांच पदक जीतने की उम्मीद जताई है।
देश को वर्ल्ड कुश्ती में पदक दिलाने वाले पहलवान रमेश गुलिया ने बताया कि ओलंपिक से कुश्ती को बाहर करने का विचार दुनिया के हजारों पहलवानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था, जिसके शामिल रहने के फैसले से उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा मिली है।
सुभाष स्टेडियम कुश्ती एकेडमी के प्रशिक्षक राजसिंह छिक्कारा ने कहा कि 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों में कुश्ती के बरकरार रहने से उनकी एकेडमी में अभ्यास करने वाले लगभग दो सौ पहलवानों में खुशी की लहर दौड़ गई है ।
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उनका मानना है कि अगर कुश्ती को 2020 ओलंपिक में रखने के हक में फैसला नहीं आता तो कुश्ती में भविष्य की तलाश कर रहे पूरी दुनिया के जूनियर पहलवानों को भारी आघात लगता। अंडर-16 कामनवेल्थ में स्वर्ण पदक विजेता गांव भैंसवाल निवासी अमित ने कहा कि अगर कुश्ती को ओलंपिक से बाहर कर दिया जाता तो वह किसी अन्य खेल में जाने की बजाय खेती करना पसंद करता।
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13 से 18 अगस्त को बुल्गारिया के साफिया में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक विजेता प्रदीप रायपुर और भैंसवाल निवासी प्रवीन का कहना है कि इस फैसले से वे ओलंपिक में पदक लाने की तैयारी में जुट गए हैं। 2011 में आयोजित जूनियर एशिया कांस्य पदक विजेता युद्धवीर ने भी इस फैसले से खुशी जताई है।
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वहीं भारत कुमार, पांच बार के जूनियर एशिया स्वर्ण पदक विजेता और सीनियर के कांस्य पदक विजेता कुलबीर का मानना है कि कुश्ती के खिलाड़ी अन्य खेलों में ज्यादा आगे तक नहीं जा सकते। वह इस खेल में ही भविष्य तलाशते हैं।
सीनियरों ने दी शुभकामनाएं
भारतीय खेल प्राधिकरण के उत्तर भारतीय सेंटर में अभ्यास कर रहे ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने कहा कि 2020 में होने वाले ओलंपिक में कुश्ती को बाहर रखने पर विचार चल रहा था, जिससे जूनियर खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लगा था। कुश्ती के पक्ष में वोटिंग होने से अब पहलवान बिना चिंता के अभ्यास कर सकेंगे। उन्होंने पहलवानों द्वारा 2020 ओलंपिक में कम से कम चार या पांच पदक जीतने की उम्मीद जताई है।
देश को वर्ल्ड कुश्ती में पदक दिलाने वाले पहलवान रमेश गुलिया ने बताया कि ओलंपिक से कुश्ती को बाहर करने का विचार दुनिया के हजारों पहलवानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था, जिसके शामिल रहने के फैसले से उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा मिली है।
सुभाष स्टेडियम कुश्ती एकेडमी के प्रशिक्षक राजसिंह छिक्कारा ने कहा कि 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों में कुश्ती के बरकरार रहने से उनकी एकेडमी में अभ्यास करने वाले लगभग दो सौ पहलवानों में खुशी की लहर दौड़ गई है ।