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बतला रहीं हैं इनके माथे की सिलवटें, कितने तूफां इन्हें छूकर गुजर गए

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 01:45 AM IST
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World Elder Abuse Awareness Day, Panipat
जितेंद्र नरवाल
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पानीपत। शहर के वृद्धाश्रम में रह रहे वृद्धजनों का खिलखिलाता चेहरा नजरों का धोखा भर है, लेकिन उनकी पेशानी (ललाट) पर उभरी लकीरें उनका दर्द को बयां करने को काफी हैं। इन्हें इनके ही परिवार वालों ने ही घर से निकाल दिया है, अब वृद्ध आश्रम में रहने को मजबूर हैं। कहते हैं कि परिवार की याद तो बहुत आती है, लेकिन कभी लौटेंगे नहीं। आश्रम में ही घर है और यहां रहने वाले ही उनका परिवार। सोमवार को अमर उजाला टीम ने माटा चौक स्थित वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों से बात की। यहां पांच वद्धा और चार वृद्ध रह रहे हैैं। इन पर जो गुजरी, आपके सामने इस उम्मीद के साथ प्रस्तुत है कि हम अपने बुजुर्गों की देखभाल का संकल्प लेंगे।
बेटे-बहू की लव मैरिज को रास नहीं आया बाप : खुराना
वार्ड नंबर दस के रहने वाले 75 वर्षीय महेश खुराना ने बताया कि उनके दो बेटे थे। एक का देहांत हो गया था और दूसरे ने लव मैरिज कर ली थी। लव मैरिज दूसरे धर्म की युवती से की गई थी। एक घटना के चलते उनके चेहरे पर चोट लग गई। उनका उपचार करना या करवाना बेटे-बहू को रास नहीं आया। इसके बाद टोका-टाकी बढ़ी तो बहू-बेटे ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब पिछले कई साल से वृद्धा आश्रम में ही रहते हैं। उन्होंने बताया कि कभी-कभार बेटा उनसे मिलने आ जाता है और वापस चलने की कहता है, लेकिन अब उनकी उनके घर में जाने की इच्छा ही नहीं होती।
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1000 रुपये देने का किया था वादा, वो भी पूरा नहीं किया : अर्जुन
उझा रोड नलवा कॉलोनी के रहने वाले 71 वर्षीय बुजुर्ग अर्जुन दास ने बताया कि उनके पास दो 50-50 गज के प्लाट थे। उनकी पत्नी के देहांत के बाद बेटों ने एक प्लाट बेच दिया और दूसरे पर कब्जा कर लिया। ये प्लाट उन्होंने अपने मेहनत की कमाई से 22 साल रिक्शा चलाकर खरीदे थे। इसके बाद इन्हीं बेटों ने उन्हें घर से निकाल दिया। कोर्ट में शपथ पत्र पर प्लाट अपने नाम करवा लिया वहीं, एक शर्त भी रखी कि दोनों बेटे हर महीने एक-एक हजार रुपये पिता को दिया करेंगे लेकिन अब न बेटे घर में रहने देते हैं और न ही खर्च के हजार रुपये देते हैं।
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बेटे ने निकाला, सुन नहीं सकते, लिख कर समझाते हैं दर्द : नारंग
82 वर्षीय मनोहर लाल ने बताया कि उनकी पत्नी के देहांत के बाद उनके बड़े बेटे ने उन्हें घर से निकाल कर उस पर कब्जा कर लिया। पिछले चार साल से वे वृद्ध आश्रम में रह रहे हैं। उनके दोनों कानों के पर्देे खराब है, इसलिए वे सुन नहीं सकते। किसी को बात करनी हो तो लिखकर देना पड़ता है। उनके बड़े बेटे की प्रताड़ना की शिकायत उन्होंने पुलिस, थानों, जिला प्रशासन और गृह मंत्री अनिल विज तक को दी, लेकिन उनकी आज तक कोई सुनवाई नहीं हो पाई। इस पूरे प्रकरण के पीछे उन्होंनें विधायक और पार्षद पर भी आरोप लगाए।

परिवार में कोई नहीं, अब आश्रम ही है सहारा : कृष्णा
वार्ड नंबर 11 की रहने वाली 71 वर्षीय कृष्णा ने बताया कि उनके परिवार में कोई नहीं है। न पति है न बच्चे हैं। पिछले सात साल से वे आश्रम में ही रह रही हैं। पूरा दिन आश्रम में रहने वालों के साथ बातचीत करके टाइम पास हो जाता है। आश्रम में रहने, खाने की पूरी और अच्छी व्यवस्था है। अब तो जीवन के अंतिम पल यहीं पर गुजारने हैं। रोज भगवान के भजन सुन लेते हैं। एक दूसरे से बात कर एक दूजे की समस्याएं सुन लेते हैं। जिंदगी से अब किसी और चीज की ख्वाहिश तक नहीं है। अब कभी कभार अपने परिवार की याद आ जाती है।
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