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केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों ने प्रशासन के साथ बैठक कर भूजल के हालात की समीक्षा की
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बैठक लेते वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार साइकत सरकार ।
- फोटो : panipat
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प्रधानमंत्री जल शक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए लघु सचिवालय के कांफ्रेंस हाल में शुक्रवार को पानीपत जिले के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार साइकत सरकार ने की। बैठक को जल शक्ति मंत्रालय के निदेशक डॉ. शेर सिंह, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार के उप सचिव सुशील कुमार कालड़ा ने भी संबोधित किया। एडीसी प्रीति ने सभी का स्वागत किया। जिला परिषद की सीईओ सुमन भाखड़ ने जल संरक्षण व पौधरोपण के लिए जिले में करवाए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
करनाल से आए भू-जल विशेषज्ञ दलबीर राणा व सहायक भू-संरक्षण अधिकारी नीना सहवाग ने भी जल संरक्षण करने के कई सुझाव दिए। भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार साइकत सरकार ने कहा कि यूं तो जल संरक्षण व पौधरोपण के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारों की ओर से भारत में कई योजनाएं लागू हैं। लेकिन जब तक जल संरक्षण व पौधरोपण से संबंधित विभागों के अधिकारी एक टीम के रूप में जिम्मेदारी से कार्य नहीं करेंगे, इस योजना को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जागरूकता में अद्भुत शक्ति होती है, इसलिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को जल के महत्व के बारे में और अधिक जागरूक किया जाना चाहिए। इससे 1 जुलाई से 15 सितंबर तक चलाए जा रहे अभियान के सुखद परिणाम मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि एक सामान्य परिवार को प्रतिदिन 200 लीटर पानी की जरूरत होती है, लेकिन कुछ अमीर लोग हजारों लीटर पानी प्रति दिन व्यर्थ में खर्च कर देते है। यही कारण है कि बड़े शहरों में पानी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीणों को समालखा खंड के गांव बसाड़ा से प्रेरणा लेते हुए अपने घरों में दो-दो सोखते बनाकर घर का व वर्षा का सारा पानी जमीन में उतार देना चाहिए। जिला परिषद की सीईओ सुमन भाखड़ ने कहा कि बेहतर कल के लिए जल का संरक्षण और पुर्नभरण करना होगा। इसके चलते सरकार ने हरियाणा तालाब विकास प्राधिकरण का गठन किया है। यही नहीं जल शक्ति विजन को सफल बनाने के लिए हरियाणा सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार ने प्रदेश के 19 जिलों के 81 डार्क जोन वाले सभी विकास खंडों में 1 जुलाई से 15 सितंबर तक विशेष जल संरक्षण अभियान लागू किया है। इस अभियान में पानीपत जिले के समालखा व बापौली खंड को भी शामिल किया गया है। इन खंडों में ही नहीं जिले के सभी विकास खंडों में जल संरक्षण करने के लिए तालाबों की खुदाई व सफाई करना, नए तालाब बनाना, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, भवनों पर जल हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना शामिल है। पानीपत जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में निगरानी कमेटियों का गठन करके जल शक्ति अभियान को सफल बनाने में सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों के लिए प्रेरित करना चाहिए, जिनमें पानी कम खर्च होता हो। किसानों को टपका सिंचाई के लिए भी प्रेरित करें। नगर निगम के आयुक्त ओमप्रकाश ने कहा कि जल शक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकाय विभाग भी महत्वपूर्ण सहयोग देगा। नगर निगम व नगर पालिकाओं के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। इसके लिए शहरों के सरकारी भवन, सार्वजनिक भवन, व्यवसायिक व औद्योगिक भवनों के साथ जल हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाकर जल को भूमि के अंदर उतारा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में मत्सय पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। पंचायती भूमि पर और अधिक पौधरोपण किया जाएगा। नहरों में कम अधिक पानी 24 घंटे रखने के लिए भी वरिष्ठ अधिकारियों को सुझाव दिए जाएंगे। समालखा के एसडीएम कुशल कटारिया, पानीपत की एसडीएम वीना हुडा, नगर निगम के संयुक्त-आयुक्त गौरव कुमार, एक्सईन प्रदीप अत्री, सिचाई विभाग के एक्सईन सुरेश सैनी, पंचायती राज के एक्सईन कर्मबीर शर्मा, उप निदेशक डॉ. संजय अंतिल, केयूके उझा के डॉ. सतपाल सिंह व डीप्टी सीईओ जसविंद्र सिंह ने भी जल संरक्षण के लिए सुझाव दिए।
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करनाल से आए भू-जल विशेषज्ञ दलबीर राणा व सहायक भू-संरक्षण अधिकारी नीना सहवाग ने भी जल संरक्षण करने के कई सुझाव दिए। भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार साइकत सरकार ने कहा कि यूं तो जल संरक्षण व पौधरोपण के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारों की ओर से भारत में कई योजनाएं लागू हैं। लेकिन जब तक जल संरक्षण व पौधरोपण से संबंधित विभागों के अधिकारी एक टीम के रूप में जिम्मेदारी से कार्य नहीं करेंगे, इस योजना को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जागरूकता में अद्भुत शक्ति होती है, इसलिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को जल के महत्व के बारे में और अधिक जागरूक किया जाना चाहिए। इससे 1 जुलाई से 15 सितंबर तक चलाए जा रहे अभियान के सुखद परिणाम मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि एक सामान्य परिवार को प्रतिदिन 200 लीटर पानी की जरूरत होती है, लेकिन कुछ अमीर लोग हजारों लीटर पानी प्रति दिन व्यर्थ में खर्च कर देते है। यही कारण है कि बड़े शहरों में पानी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीणों को समालखा खंड के गांव बसाड़ा से प्रेरणा लेते हुए अपने घरों में दो-दो सोखते बनाकर घर का व वर्षा का सारा पानी जमीन में उतार देना चाहिए। जिला परिषद की सीईओ सुमन भाखड़ ने कहा कि बेहतर कल के लिए जल का संरक्षण और पुर्नभरण करना होगा। इसके चलते सरकार ने हरियाणा तालाब विकास प्राधिकरण का गठन किया है। यही नहीं जल शक्ति विजन को सफल बनाने के लिए हरियाणा सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार ने प्रदेश के 19 जिलों के 81 डार्क जोन वाले सभी विकास खंडों में 1 जुलाई से 15 सितंबर तक विशेष जल संरक्षण अभियान लागू किया है। इस अभियान में पानीपत जिले के समालखा व बापौली खंड को भी शामिल किया गया है। इन खंडों में ही नहीं जिले के सभी विकास खंडों में जल संरक्षण करने के लिए तालाबों की खुदाई व सफाई करना, नए तालाब बनाना, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, भवनों पर जल हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना शामिल है। पानीपत जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में निगरानी कमेटियों का गठन करके जल शक्ति अभियान को सफल बनाने में सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों के लिए प्रेरित करना चाहिए, जिनमें पानी कम खर्च होता हो। किसानों को टपका सिंचाई के लिए भी प्रेरित करें। नगर निगम के आयुक्त ओमप्रकाश ने कहा कि जल शक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकाय विभाग भी महत्वपूर्ण सहयोग देगा। नगर निगम व नगर पालिकाओं के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। इसके लिए शहरों के सरकारी भवन, सार्वजनिक भवन, व्यवसायिक व औद्योगिक भवनों के साथ जल हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाकर जल को भूमि के अंदर उतारा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में मत्सय पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। पंचायती भूमि पर और अधिक पौधरोपण किया जाएगा। नहरों में कम अधिक पानी 24 घंटे रखने के लिए भी वरिष्ठ अधिकारियों को सुझाव दिए जाएंगे। समालखा के एसडीएम कुशल कटारिया, पानीपत की एसडीएम वीना हुडा, नगर निगम के संयुक्त-आयुक्त गौरव कुमार, एक्सईन प्रदीप अत्री, सिचाई विभाग के एक्सईन सुरेश सैनी, पंचायती राज के एक्सईन कर्मबीर शर्मा, उप निदेशक डॉ. संजय अंतिल, केयूके उझा के डॉ. सतपाल सिंह व डीप्टी सीईओ जसविंद्र सिंह ने भी जल संरक्षण के लिए सुझाव दिए।
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