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‘कोई भी कम सजा पीड़ित, उसके परिवार ही नहीं समाज के साथ भी अन्याय’

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 02:17 AM IST
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victims less punishment and injustice to society
‘यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों के दायरे में आता है। ऐसे में दोषियों को कम सजा होना पीड़िता और उसके परिवार ही नहीं बल्कि समाज के साथ भी अन्याय होगा।’ 12 वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर हत्या के मामले में सजा सुनाते हुए अदालत ने उक्त सख्त टिप्पणी की है।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि जिस तरह से अपराध किया गया है और सबूतों को नष्ट करने के प्रयास हुआ। वह स्पष्ट रूप से इसके जघन्य चरित्र को दर्शाता है। अदालत दोषियों को सजा सुनाते समय पीड़िता और उसके परिवार की दुर्दशा को ध्यान में रखने के अपने कर्त्तव्य से अनजान नहीं रह सकती है।
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शराब के नशे में होना अपराध की गंभीरता को कम नहीं करता
अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि दोषियों का शराब के नशे में होना अपराध की गंभीरता को कम नहीं करता है। उन्होंने नशा स्वैच्छिक रूप से किया था और जिस तरह से दोषियों ने पीड़िता के कपड़े जलाकर सबूतों को नष्ट किया और शव को फेंका, उससे स्पष्ट है कि वे अपने कृत्य के परिणाम को समझने के लिए पूरी तरह से होश में थे।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अपराध की प्रकृति और तरीके को ध्यान में रखा गया है। दोषियों ने करीब 12 वर्ष की बच्ची के साथ अमानवीय तरीके से अपराध किया है। इस तरह के अपराध पूरे समाज को प्रभावित करते हैं। दोषियों ने न केवल कम उम्र की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया बल्कि खुद को सजा से बचाने के लिए उसकी हत्या कर दी।
समाज और मानवता को झकझोरने वाले इस अपराध की शैतानी प्रवृति इससे प्रकट होती है कि दोषियों ने पीड़िता की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ फिर दुष्कर्म किया। अपराध की क्रूरता और दोषियों के आचरण को इस तथ्य से समझा जा सकता है। दोषियों ने अपनी तीव्र यौन भूख के साथ ही बच्ची के नग्न शरीर को फेंककर अपनी अमानवीय विकृति दिखाई।

बच्ची के मामा केस लेकर आए थे। यह वारदात दिल को झकझोर देने वाली थी। बच्ची के साथ बहुत ज्यादा दरिंदगी की गई थी। इस केस में 17 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। एक भी गवाह मुकरा नहीं। दोषियों को उनके घिनौने अपराध के लिए सजा मिली है।
- अनुज चौधरी, पीड़िता के मामा का वकील
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