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ब्लैक फंगस के दो और संदिग्ध मिले
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला प्रशासन के लिए कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस से निपटना भी बड़ी चुनौती बन चुका है। पिछले 9 दिन से लगातार ब्लैक फंगस के नए केस आ रहे हैं। हालांकि विभाग इनको कंफर्म नहीं कर रहा है और रोगियों को जांच के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। ब्लैक फंगस के दो संदिग्ध रोगी शनिवार को भी मिले हैं। ये शुगर से पीड़ित हैं और कोरोना संक्रमित रह चुके हैं। इनको भी रेफर कर दिया गया है।
अब तक जिले में ब्लैक फंगस के 34 संदिग्ध एवं दो कंफर्म मरीज मिल चुके हैं। इन 34 रोगियों में से 10 रोगी ऐसे भी हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है। 25 वर्ष आयु के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। 12 रोगी ऐसे मिले हैं, जो पहले कोरोना से संक्रमित नहीं हुए हैं। इसलिए ब्लैक फंगस हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बड़ा खतरा है। निजी अस्पतालों के अनुसार जिले में ब्लैक फंगस के 40 से अधिक रोगी है, लेकिन निजी अस्पताल समय पर रोगियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दे रहे हैं।
सिविल अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मेहता का कहना है कि ब्लैक फंगस उन लोगों पर अधिक आक्रामक है, जो शुगर के मरीज हैं और कोरोना संक्रमित रह चुके हैं। ये स्टेरॉयड का सेवन कर चुके हैं। ये किसी खास आयु वर्ग को टारगेट नहीं कर रहा है। शनिवार को दो और संदिग्ध रोगी मिले हैं। इनको खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। लोगों से अपील है कि वे ब्लैक फंगस के लक्षण मिलते ही बिना देरी के जांच कराएं। खानपुर में रोगियों की एमआरआई, बायोप्सी और एंडोस्कोपी कराई जा रही है। 25 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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हम निजी अस्पतालों से लगातार अपील कर रहे हैं कि वे ब्लैक फंगस के मामलों की जानकारी उन्हें दें। सभी को एक गूगल सीट भेजी जा चुकी है, जिसमें जानकारी भरकर देनी है। सिविल अस्पताल में संदिग्ध रोगी आ रहे हैं, उनको खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। उनका ब्लैक फंगस कंफर्म होने की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। - डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन
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पानीपत। जिला प्रशासन के लिए कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस से निपटना भी बड़ी चुनौती बन चुका है। पिछले 9 दिन से लगातार ब्लैक फंगस के नए केस आ रहे हैं। हालांकि विभाग इनको कंफर्म नहीं कर रहा है और रोगियों को जांच के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। ब्लैक फंगस के दो संदिग्ध रोगी शनिवार को भी मिले हैं। ये शुगर से पीड़ित हैं और कोरोना संक्रमित रह चुके हैं। इनको भी रेफर कर दिया गया है।
अब तक जिले में ब्लैक फंगस के 34 संदिग्ध एवं दो कंफर्म मरीज मिल चुके हैं। इन 34 रोगियों में से 10 रोगी ऐसे भी हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है। 25 वर्ष आयु के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। 12 रोगी ऐसे मिले हैं, जो पहले कोरोना से संक्रमित नहीं हुए हैं। इसलिए ब्लैक फंगस हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बड़ा खतरा है। निजी अस्पतालों के अनुसार जिले में ब्लैक फंगस के 40 से अधिक रोगी है, लेकिन निजी अस्पताल समय पर रोगियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दे रहे हैं।
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सिविल अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मेहता का कहना है कि ब्लैक फंगस उन लोगों पर अधिक आक्रामक है, जो शुगर के मरीज हैं और कोरोना संक्रमित रह चुके हैं। ये स्टेरॉयड का सेवन कर चुके हैं। ये किसी खास आयु वर्ग को टारगेट नहीं कर रहा है। शनिवार को दो और संदिग्ध रोगी मिले हैं। इनको खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। लोगों से अपील है कि वे ब्लैक फंगस के लक्षण मिलते ही बिना देरी के जांच कराएं। खानपुर में रोगियों की एमआरआई, बायोप्सी और एंडोस्कोपी कराई जा रही है। 25 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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हम निजी अस्पतालों से लगातार अपील कर रहे हैं कि वे ब्लैक फंगस के मामलों की जानकारी उन्हें दें। सभी को एक गूगल सीट भेजी जा चुकी है, जिसमें जानकारी भरकर देनी है। सिविल अस्पताल में संदिग्ध रोगी आ रहे हैं, उनको खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। उनका ब्लैक फंगस कंफर्म होने की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। - डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन