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घुटना टूटने के दो महीने बाद शिवम ने मारा दांव, जीता स्वर्ण
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पानीपत। जीत के बाद शिवम अपने कोच रामविलास के पैर को छुते हुए ।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। घुटना टूटने के दो महीने बाद गांव कुराना के शिवम ने शिवाजी स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिता में पहली बार भाग लिया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। शिवम ने महज 30 सेकेंड में अपने प्रतिद्वंद्वी को चित कर दिया।
दो महीने पहले अभ्यास करने के दौरान शिवम का घुटना टूट गया था। तब से उनका इलाज रोहतक पीजीआई में चल रहा था। जैसे ही शिवम के कोच रामबिलास को पता चला कि पानीपत में जिला स्तरीय रेसलिंग चैंपियनशिप का आयोजन हो रहा है, उन्होंने शिवम को मैट पर उतारने की सोची। कोच ने जब शिवम से पूछा कि वह खेलेगा तो जवाब था- हां गुरु जी।
इसके बाद वह सीधे जिला स्तरीय रेसलिंग चैंपियनशिप में उतरे और मैट पर प्रतिद्वंद्वी को धराशायी कर दिया। उन्होंने इससे पहले किसी चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लिया था। शिवम ने बताया कि गांव कुराना में रोज खिलाड़ियों को खेलता देख मन में आया कि वह भी कुश्ती खेले। इसके बाद गांव के अखाड़े में खेलना शुरू कर दिया। कुछ समय तक तो बिना कोच के ही खेले पर फिर कोच की देखरेख में अभ्यास शुरू कर दिया। फिर अपनी पहली जिला स्तरीय चैंपियनशिप में स्वर्ण जीत लिया।
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किसान पिता ने कुश्ती के लिए किया प्रोत्साहित
शिवम के पिता राममेहर ने बताया कि उनके पास केवल एक किला जमीन है, जिस पर खेती कर घर का गुजारा चलाते हैं। शिवम ने बताया कि घर में कई बार आर्थिक स्थिति काफी ज्यादा खराब हो जाती है। इसके बावजूद पिता ने हमेशा कुश्ती खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।
3 किलो दूध और 100 ग्राम बादाम खाकर करता है अभ्यास
शिवम रोजाना 3 किलो दूध और 100 ग्राम बादाम खाकर खेल का अभ्यास करता है। सुबह अभ्यास के दौरान 100 ग्राम घी पीता है। शिवम के कोच ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह प्रोटिन शेक और अन्य डाइट नहीं ले सका। देसी डाइट से ही शिवम अपने आप को फिट रखते हैं।
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दो महीने पहले अभ्यास करने के दौरान शिवम का घुटना टूट गया था। तब से उनका इलाज रोहतक पीजीआई में चल रहा था। जैसे ही शिवम के कोच रामबिलास को पता चला कि पानीपत में जिला स्तरीय रेसलिंग चैंपियनशिप का आयोजन हो रहा है, उन्होंने शिवम को मैट पर उतारने की सोची। कोच ने जब शिवम से पूछा कि वह खेलेगा तो जवाब था- हां गुरु जी।
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इसके बाद वह सीधे जिला स्तरीय रेसलिंग चैंपियनशिप में उतरे और मैट पर प्रतिद्वंद्वी को धराशायी कर दिया। उन्होंने इससे पहले किसी चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लिया था। शिवम ने बताया कि गांव कुराना में रोज खिलाड़ियों को खेलता देख मन में आया कि वह भी कुश्ती खेले। इसके बाद गांव के अखाड़े में खेलना शुरू कर दिया। कुछ समय तक तो बिना कोच के ही खेले पर फिर कोच की देखरेख में अभ्यास शुरू कर दिया। फिर अपनी पहली जिला स्तरीय चैंपियनशिप में स्वर्ण जीत लिया।
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किसान पिता ने कुश्ती के लिए किया प्रोत्साहित
शिवम के पिता राममेहर ने बताया कि उनके पास केवल एक किला जमीन है, जिस पर खेती कर घर का गुजारा चलाते हैं। शिवम ने बताया कि घर में कई बार आर्थिक स्थिति काफी ज्यादा खराब हो जाती है। इसके बावजूद पिता ने हमेशा कुश्ती खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।
3 किलो दूध और 100 ग्राम बादाम खाकर करता है अभ्यास
शिवम रोजाना 3 किलो दूध और 100 ग्राम बादाम खाकर खेल का अभ्यास करता है। सुबह अभ्यास के दौरान 100 ग्राम घी पीता है। शिवम के कोच ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह प्रोटिन शेक और अन्य डाइट नहीं ले सका। देसी डाइट से ही शिवम अपने आप को फिट रखते हैं।