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गुरु पर करो विश्वास
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पानीपत। सत्संग करते हुए स्वामी दयानन्द सरस्वती महाराज ।
- फोटो : Panipat
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शिष्य का गुरु पर विश्वास और श्रद्धा ही सब कुछ है: स्वामी दयानंद
हरि मंदिर में नव विक्रमी संवत के उपलक्ष्य में संत समागम का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हरि मंदिर के प्रांगण में आयोजित संत समागम में मंगलवार को 1008 स्वामी दयानंद सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) ने गुरु-शिष्य के संबंध पर चर्चा की। महाराज ने कहा कि गुरु पर विश्वास करना चाहिए। इस मौके पर भजन गायक वेद कमल ने प्रस्तुती से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
महाराज जी ने मारपा नामक लड़के की कथा सुनाई। बताया कि उसका अंत:करण इतना पवित्र था कि आश्रम में रहने वाले अन्य शिष्यों को उससे ईर्ष्या होने लगी। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा है अग्नि में प्रवेश करना होगा। फिर गुरु के नाम पर उसे पहाड़ से कुदा दिया। फिर नदी पार करने के लिए कहा, लेकिन गुरु की कृपा से उसके कोई संकट छू भी नहीं पाया। फिर सभी शिष्यों गुरु के पास गए। उन्होंने गुरु जी से कहा कि हमने मारपा से झूठ बोला फिर भी यह अग्नि में कूदा, पहाड़ से छलांग लगाई और पानी पर चला। उसे कुछ भी नहीं हुआ, ऐसा क्यों ? गुरुजी ने कहा कि यह उस शिष्य की श्रद्धा और विश्वास था, जो उसे बचा रहा था। इस मौके पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा, जगदीश जुनेजा, करमसिंह रामदेव, सुरेश चुघ, शाम सपड़ा, शक्ति सिंह रेवड़ी आदि मौजूद रहे।
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शिष्य का गुरु पर विश्वास और श्रद्धा ही सब कुछ है: स्वामी दयानंद
हरि मंदिर में नव विक्रमी संवत के उपलक्ष्य में संत समागम का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हरि मंदिर के प्रांगण में आयोजित संत समागम में मंगलवार को 1008 स्वामी दयानंद सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) ने गुरु-शिष्य के संबंध पर चर्चा की। महाराज ने कहा कि गुरु पर विश्वास करना चाहिए। इस मौके पर भजन गायक वेद कमल ने प्रस्तुती से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
महाराज जी ने मारपा नामक लड़के की कथा सुनाई। बताया कि उसका अंत:करण इतना पवित्र था कि आश्रम में रहने वाले अन्य शिष्यों को उससे ईर्ष्या होने लगी। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा है अग्नि में प्रवेश करना होगा। फिर गुरु के नाम पर उसे पहाड़ से कुदा दिया। फिर नदी पार करने के लिए कहा, लेकिन गुरु की कृपा से उसके कोई संकट छू भी नहीं पाया। फिर सभी शिष्यों गुरु के पास गए। उन्होंने गुरु जी से कहा कि हमने मारपा से झूठ बोला फिर भी यह अग्नि में कूदा, पहाड़ से छलांग लगाई और पानी पर चला। उसे कुछ भी नहीं हुआ, ऐसा क्यों ? गुरुजी ने कहा कि यह उस शिष्य की श्रद्धा और विश्वास था, जो उसे बचा रहा था। इस मौके पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा, जगदीश जुनेजा, करमसिंह रामदेव, सुरेश चुघ, शाम सपड़ा, शक्ति सिंह रेवड़ी आदि मौजूद रहे।
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