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Panipat News: 28 साल पुराने मिलावटी मिर्च केस में व्यापारी को मिली राहत
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। मसाला व्यापारी सतीश कुमार को मिर्ची पाउडर में मिलावट के मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एनएस शेखावत की कोर्ट में राहत मिली है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के छह महीने के कठोर कारावास के फैसले को बदल दिया है। हाईकोर्ट ने व्यापारी की 28 दिन की पहली काटी सजा तक सीमित रखा है। दुकानदार पर निचली कोर्ट के लगाए एक हजार रुपये के जुर्माने को 100 गुना तक बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। व्यापारी ने इसे न्याय की जीत बताया है।
खाद्य सामग्री का मामला 15 अप्रैल 1998 का है। सतीश कुमार ने बताया कि तत्कालीन खाद्य निरीक्षक केके शर्मा ने उनकी दुकान से 600 ग्राम मिर्ची पाउडर का नमूना लिया था। लैब में नमूना फेल आया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (2006) के तहत अपराध पाया गया। यह मामला कोर्ट में चला गया था। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की कोर्ट ने 14 अगस्त 2007 को उनको दोषी ठहराते हुए छह महीने की कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
उन्होंने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पानीपत की कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने 29 सितंबर 2008 को अपना फैसला दिया था। इसमें सीजेएम के फैसले को बरकरार रखा था।
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उन्होंने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। न्यायमूर्ति एनएस शेखावत की कोर्ट ने कहा कि 1998 के मामले को दोषी 28 वर्ष से भुगत रहा है। उन्होंने इसके अलावा नया कोई अपराध नहीं किया है। दोषी मुकदमे के दौरान भी जेल काट चुका है। ऐसे में उनको अतिरिक्त सजा नहीं देते। वह 24 दिन की सजा काट चुके हैं। कोर्ट ने जुर्माने की राशि को एक हजार रुपये से बढ़ा एक लाख रुपये कर दी है। व्यापारी को निर्णय की सत्यापित कॉपी मिलने के एक महीने के भीतर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पानीपत की कोर्ट में जमा करानी होगी। वह जुर्माना राशि जमा नहीं करते हैं तो दी गई राहत रद्द कर दी जाएगी। इस सजा को छह महीने की रखा जाएगा।
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पानीपत। मसाला व्यापारी सतीश कुमार को मिर्ची पाउडर में मिलावट के मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एनएस शेखावत की कोर्ट में राहत मिली है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के छह महीने के कठोर कारावास के फैसले को बदल दिया है। हाईकोर्ट ने व्यापारी की 28 दिन की पहली काटी सजा तक सीमित रखा है। दुकानदार पर निचली कोर्ट के लगाए एक हजार रुपये के जुर्माने को 100 गुना तक बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। व्यापारी ने इसे न्याय की जीत बताया है।
खाद्य सामग्री का मामला 15 अप्रैल 1998 का है। सतीश कुमार ने बताया कि तत्कालीन खाद्य निरीक्षक केके शर्मा ने उनकी दुकान से 600 ग्राम मिर्ची पाउडर का नमूना लिया था। लैब में नमूना फेल आया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (2006) के तहत अपराध पाया गया। यह मामला कोर्ट में चला गया था। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की कोर्ट ने 14 अगस्त 2007 को उनको दोषी ठहराते हुए छह महीने की कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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उन्होंने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पानीपत की कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने 29 सितंबर 2008 को अपना फैसला दिया था। इसमें सीजेएम के फैसले को बरकरार रखा था।
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उन्होंने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। न्यायमूर्ति एनएस शेखावत की कोर्ट ने कहा कि 1998 के मामले को दोषी 28 वर्ष से भुगत रहा है। उन्होंने इसके अलावा नया कोई अपराध नहीं किया है। दोषी मुकदमे के दौरान भी जेल काट चुका है। ऐसे में उनको अतिरिक्त सजा नहीं देते। वह 24 दिन की सजा काट चुके हैं। कोर्ट ने जुर्माने की राशि को एक हजार रुपये से बढ़ा एक लाख रुपये कर दी है। व्यापारी को निर्णय की सत्यापित कॉपी मिलने के एक महीने के भीतर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पानीपत की कोर्ट में जमा करानी होगी। वह जुर्माना राशि जमा नहीं करते हैं तो दी गई राहत रद्द कर दी जाएगी। इस सजा को छह महीने की रखा जाएगा।