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Panipat News: पर्यटन स्थल हैं... पर्यटकों को लुभा नहीं पा रहे
Sat, 25 Jan 2025 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 25 Jan 2025 01:34 AM IST
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स्वीटी सांगवान
पानीपत। औद्योगिक नगरी पर्यटन के लिए अनेक स्थल संजोए हुई हैं। इनमें मंदिर, दरगाह, संग्रहालय और युद्ध स्मारक आदि शामिल हैं। यहां दिल्ली की सल्तनत पाने को लेकर तीनों लड़ाइयों के साक्ष्य संग्रहालयों में आज भी रखे हैं। काला आंब को साल में एक बार याद किया जाता है। यह भी अनदेखी का शिकार हो रहा है। इसी अनदेखी के चलते पर्यटन स्थल होने के बाद भी यहां पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
पुरातत्व विभाग और प्रशासन पर्यटन स्थलों की देखरेख करें तो पर्यटन नगरी के रूप में भी पहचान बन सकती है। हेमू और बाबर का मकबरा आज भी वीरान होने के साथ-साथ अपनी पहचान को तरस रहा है। सलारजंग गेट का भी रखरखाव नहीं हो पाया है। यहां भी अतिक्रमण ने घेर लिया है।
बू-अली शाह कलंदर दरगाह : दुनिया में ढाई कलंदर बताए गए हैं। इनमें से एक कलंदर पानीपत में है। यह मकबरा चिश्ती सिलसिला के संत शेख शराफुद्दीन बू अली कलंदर को समर्पित है। यह मकबरा करीब 700 साल पुराना है। देश-विदेश से लोग यहां आकर अपनी मन्नत मांगते हैं और इसे पूरा होने पर चादरपोशी करते हैं। शहर के किला मैदान से आगे स्थित दरगाह कलंदर साहब तक दिन के समय पहुंचना मुश्किल भरा है। यहां सीधे गाड़ी या दूसरे वाहन नहीं पहुंच पाते। पुराना वार्ड-11 चौक के पास गाड़ी खड़ी कर पैदल जाना पड़ता है।
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काला आंब हो रहा अनदेखी का शिकार : काला आंब पानीपत की तीसरी लड़ाई का स्मारक है। यहां पर अहमदशाह अब्दाली की जीत के नमूने मिले थे जो आज भी पानीपत संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए हैं लेकिन काला आंब को आज तक पर्यटन स्थल के रूप में मूर्त रूप नहीं मिल पाया है। यहां अमर जवान ज्योति जलाने के साथ 10 एकड़ में धाम स्थापित करने और सुंदरीकरण का प्रोजेक्ट कई साल बाद अटका हुआ है। मराठा महाराष्ट्र से करीब 1500 किलोमीटर दूर आकर हर साल 14 जनवरी को पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद में कार्यक्रम करते हैं। सरकार और प्रशासन इसको लेकर आज तक उदासीन बना हुआ है।
पानीपत संग्रहालय : पानीपत की लड़ाइयों से जुड़ी साक्ष्यों को रखने के लिए पानीपत संग्रहालय शहर से बाहर सिंचाई विभाग के कार्यालय के नजदीक बनाया गया है। संग्रहालय का एक मुख्य आकर्षण लघु चित्रों की विस्तृत तस्वीरें हैं। ये लघु चित्र बाबरनामा और अकबरनामा से हैं। संग्रहालय के रखरखाव के प्रति प्रशासन सजग नहीं है। इसलिए यह पर्यटकों को नहीं लुभा पा रहा है। यहां कभी कभार ही कोई व्यक्ति पहुंच पाता है। बाकी दिनों वीरान रहता है।
प्राचीन देवी मंदिर : प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर में सैकडों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और अपनी मन्नत मांगते हैं। यहां पर लोग दूर-दूर के क्षेत्रों से मन्नत मांगने के लिए और घूमने के लिए आते हैं। मंदिर में एक सूखे तालाब में पार्क का निर्माण किया गया है। जहां बच्चे व बुजुर्ग सुबह शाम टहलने आते हैं।
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पानीपत। औद्योगिक नगरी पर्यटन के लिए अनेक स्थल संजोए हुई हैं। इनमें मंदिर, दरगाह, संग्रहालय और युद्ध स्मारक आदि शामिल हैं। यहां दिल्ली की सल्तनत पाने को लेकर तीनों लड़ाइयों के साक्ष्य संग्रहालयों में आज भी रखे हैं। काला आंब को साल में एक बार याद किया जाता है। यह भी अनदेखी का शिकार हो रहा है। इसी अनदेखी के चलते पर्यटन स्थल होने के बाद भी यहां पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
पुरातत्व विभाग और प्रशासन पर्यटन स्थलों की देखरेख करें तो पर्यटन नगरी के रूप में भी पहचान बन सकती है। हेमू और बाबर का मकबरा आज भी वीरान होने के साथ-साथ अपनी पहचान को तरस रहा है। सलारजंग गेट का भी रखरखाव नहीं हो पाया है। यहां भी अतिक्रमण ने घेर लिया है।
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बू-अली शाह कलंदर दरगाह : दुनिया में ढाई कलंदर बताए गए हैं। इनमें से एक कलंदर पानीपत में है। यह मकबरा चिश्ती सिलसिला के संत शेख शराफुद्दीन बू अली कलंदर को समर्पित है। यह मकबरा करीब 700 साल पुराना है। देश-विदेश से लोग यहां आकर अपनी मन्नत मांगते हैं और इसे पूरा होने पर चादरपोशी करते हैं। शहर के किला मैदान से आगे स्थित दरगाह कलंदर साहब तक दिन के समय पहुंचना मुश्किल भरा है। यहां सीधे गाड़ी या दूसरे वाहन नहीं पहुंच पाते। पुराना वार्ड-11 चौक के पास गाड़ी खड़ी कर पैदल जाना पड़ता है।
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काला आंब हो रहा अनदेखी का शिकार : काला आंब पानीपत की तीसरी लड़ाई का स्मारक है। यहां पर अहमदशाह अब्दाली की जीत के नमूने मिले थे जो आज भी पानीपत संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए हैं लेकिन काला आंब को आज तक पर्यटन स्थल के रूप में मूर्त रूप नहीं मिल पाया है। यहां अमर जवान ज्योति जलाने के साथ 10 एकड़ में धाम स्थापित करने और सुंदरीकरण का प्रोजेक्ट कई साल बाद अटका हुआ है। मराठा महाराष्ट्र से करीब 1500 किलोमीटर दूर आकर हर साल 14 जनवरी को पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद में कार्यक्रम करते हैं। सरकार और प्रशासन इसको लेकर आज तक उदासीन बना हुआ है।
पानीपत संग्रहालय : पानीपत की लड़ाइयों से जुड़ी साक्ष्यों को रखने के लिए पानीपत संग्रहालय शहर से बाहर सिंचाई विभाग के कार्यालय के नजदीक बनाया गया है। संग्रहालय का एक मुख्य आकर्षण लघु चित्रों की विस्तृत तस्वीरें हैं। ये लघु चित्र बाबरनामा और अकबरनामा से हैं। संग्रहालय के रखरखाव के प्रति प्रशासन सजग नहीं है। इसलिए यह पर्यटकों को नहीं लुभा पा रहा है। यहां कभी कभार ही कोई व्यक्ति पहुंच पाता है। बाकी दिनों वीरान रहता है।
प्राचीन देवी मंदिर : प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर में सैकडों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और अपनी मन्नत मांगते हैं। यहां पर लोग दूर-दूर के क्षेत्रों से मन्नत मांगने के लिए और घूमने के लिए आते हैं। मंदिर में एक सूखे तालाब में पार्क का निर्माण किया गया है। जहां बच्चे व बुजुर्ग सुबह शाम टहलने आते हैं।