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नाट्य लेखन शिविर में रचनाओं के माध्यम हादसों को बताया
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Sun, 20 Dec 2015 12:24 AM IST
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एसडी पीजी कॉलेज में लाट्य लेखन शिविर के दूसरे दिन 25 विद्यार्र्थियों ने रचनात्मक प्रस्तुति देकर हादसों को खतरनाक बताया।
वहीं प्रख्यात नाटय लेखक अनीस आजमी व अन्य वक्ताओं ने हादसों के नुकसान से बचने के लिए जागरूकता को बड़ा हथियार बताया।
कार्यशाला के दूसरे दिन प्रथम सत्र में प्रख्यात नाट्य लेखक अनीस आजमी ने विद्यार्थियों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि रचना सोच में जन्म लेती है और लेखक उसको आकार देता है।
रंगकर्मी उसे मंच पर जीवंत करता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जहां जीवन जीता है उसके वातावरण और आस-पास घटित होने वाली घटनाएं उसके मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ता है।
जब हम देखें हुए दृश्य को शब्दों में ढालते हैं तो रचना का जन्म होता है। तब हम यथार्थ को साहित्य का धरातल बनाते तो जनता उसे पसंद करती है।
कार्यशाला में 25 विद्यार्थियों की रचनात्मक हिस्सेदारी प्रदेश की नई पीढ़ी का आश्वासन बनी। कार्यशाला में लिखने का जिम्मा शिक्षकों ने भी लिया।
प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि नाटक एक विषय नहीं है बल्कि नाटक में नेतृत्व विकास भाषा संवर्धन, नृत्य संगीत कला वो सब कुछ जो मनुष्य को बेहतर मनुष्य बनाता है।
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उन्होंने कहा कि नाटक भारतीय संस्कृति की आत्मा है। नाटक के दूसरे सत्र में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के प्रोफेसर दिनेश खन्ना ने कहा कि हरियाणा प्रदेश से उनका पुराना रिश्ता है।
वे शुरूआत समिति के माध्यम से 2005 में पर्यावरण सरंक्षण 2008 में स्त्री सशक्तीकरण और अब एसडी कॉलेज परिसर में सड़क सुरक्षा पर शिविर में हिस्सेदारी लेने पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा का जीवन किसान चेतना का जीवन है। हरियाणा के लोग भूमि की पूजा ही नहीं करते बल्कि उसकी संतान भी मानते हैं।
ऐसे में नाटक के माध्यम से सांस्कृतिक पुर्नउत्थान का यह प्रयास सृजन की नई संभावनाओं को जन्म देगा। उन्होंने कहा कि अभी हरियाणा में रंगमंच युवा महोत्सवों तक केंद्रीत है।
पानीपत की यह कार्यशाला रंग कर्म की नई संभावनाओं को साकार करेगा। कार्यशाला के समंव्यक संस्कृतिकर्मी राजीव रंजन ने कहा कि कार्यशाला में सामूहिक सृजन के माध्यम से रचनायात्रा साहित्य प्रयोग की नई धारा का सृजन है।
हरियाणा में रागिनी, सांग, कथा कहानी, भजन को अभिव्यक्ति के माध्यम रूप में गाया जाता रहा है, इस कार्यशाला में इन विधाओं का भी प्रस्तुति में माध्यम बनाया जाएगा। यशोदा ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्र्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त मंच बना है।
राजकीय विद्यालय से अंग्रेजी शिक्षक जसबीर ने कहा कि अपनीय रंगमंच आधुनिक भारत के इतिहास की गाथा को प्रस्तुत करता रहा है। इसके समानांतर उक्त कार्यशाला में समकालीन प्रश्न सड़क सुरक्षा और पर्यावरण के संकट के साक्षात्कार का अभिनव प्रयोग है। हिंदी शिक्षक डॉ. राकेश कौशिक ने कहा कि हिन्दी रंग मंच हिंदी साहित्य की स्वर्ण गाथा है।
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वहीं प्रख्यात नाटय लेखक अनीस आजमी व अन्य वक्ताओं ने हादसों के नुकसान से बचने के लिए जागरूकता को बड़ा हथियार बताया।
कार्यशाला के दूसरे दिन प्रथम सत्र में प्रख्यात नाट्य लेखक अनीस आजमी ने विद्यार्थियों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि रचना सोच में जन्म लेती है और लेखक उसको आकार देता है।
रंगकर्मी उसे मंच पर जीवंत करता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जहां जीवन जीता है उसके वातावरण और आस-पास घटित होने वाली घटनाएं उसके मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ता है।
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जब हम देखें हुए दृश्य को शब्दों में ढालते हैं तो रचना का जन्म होता है। तब हम यथार्थ को साहित्य का धरातल बनाते तो जनता उसे पसंद करती है।
कार्यशाला में 25 विद्यार्थियों की रचनात्मक हिस्सेदारी प्रदेश की नई पीढ़ी का आश्वासन बनी। कार्यशाला में लिखने का जिम्मा शिक्षकों ने भी लिया।
प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि नाटक एक विषय नहीं है बल्कि नाटक में नेतृत्व विकास भाषा संवर्धन, नृत्य संगीत कला वो सब कुछ जो मनुष्य को बेहतर मनुष्य बनाता है।
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उन्होंने कहा कि नाटक भारतीय संस्कृति की आत्मा है। नाटक के दूसरे सत्र में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के प्रोफेसर दिनेश खन्ना ने कहा कि हरियाणा प्रदेश से उनका पुराना रिश्ता है।
वे शुरूआत समिति के माध्यम से 2005 में पर्यावरण सरंक्षण 2008 में स्त्री सशक्तीकरण और अब एसडी कॉलेज परिसर में सड़क सुरक्षा पर शिविर में हिस्सेदारी लेने पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा का जीवन किसान चेतना का जीवन है। हरियाणा के लोग भूमि की पूजा ही नहीं करते बल्कि उसकी संतान भी मानते हैं।
ऐसे में नाटक के माध्यम से सांस्कृतिक पुर्नउत्थान का यह प्रयास सृजन की नई संभावनाओं को जन्म देगा। उन्होंने कहा कि अभी हरियाणा में रंगमंच युवा महोत्सवों तक केंद्रीत है।
पानीपत की यह कार्यशाला रंग कर्म की नई संभावनाओं को साकार करेगा। कार्यशाला के समंव्यक संस्कृतिकर्मी राजीव रंजन ने कहा कि कार्यशाला में सामूहिक सृजन के माध्यम से रचनायात्रा साहित्य प्रयोग की नई धारा का सृजन है।
हरियाणा में रागिनी, सांग, कथा कहानी, भजन को अभिव्यक्ति के माध्यम रूप में गाया जाता रहा है, इस कार्यशाला में इन विधाओं का भी प्रस्तुति में माध्यम बनाया जाएगा। यशोदा ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्र्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त मंच बना है।
राजकीय विद्यालय से अंग्रेजी शिक्षक जसबीर ने कहा कि अपनीय रंगमंच आधुनिक भारत के इतिहास की गाथा को प्रस्तुत करता रहा है। इसके समानांतर उक्त कार्यशाला में समकालीन प्रश्न सड़क सुरक्षा और पर्यावरण के संकट के साक्षात्कार का अभिनव प्रयोग है। हिंदी शिक्षक डॉ. राकेश कौशिक ने कहा कि हिन्दी रंग मंच हिंदी साहित्य की स्वर्ण गाथा है।