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Panipat News: तीसरी बार लड़ने के लिए छोड़ने पड़ेंगे दो चुनाव
Thu, 09 Oct 2025 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Thu, 09 Oct 2025 12:26 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला बार एसोसिएशन की ओर से अपना नया संविधान तैयार किया गया है। आठ सदस्यों की ड्राफ्टिंग कमेटी ने संविधान का मसौदा तैयार किया है जिसमें अधिवक्ताओं के वोट डालने से चुनाव लड़ने तक के नियमों में बदलाव किया जाएगा। लगातार दो चुनाव लड़ने के बाद तीसरी बार चुनाव लड़ने के लिए कम से कम दो चुनाव छोड़ने होंगे। वहीं वोट डालने के लिए भी कम से कम पांच वकालतनामा पर हस्ताक्षर जरूरी होंगे। वीरवार को संविधान पर बार एसोसिएशन की बैठक में आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। इसके बाद संविधान लागू कर दिया जाएगा।
पानीपत बार एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र दुहन ने बताया अभी द डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, पानीपत का कोई लिखित संविधान नहीं था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से एक सितंबर 2014 के आदेश पर बार काउंसिल की ओर से बनाए गए नियमों से ही काम चल रहा था जिस कारण बार एसोसिएशन का लिखित संविधान तैयार किया गया है। आठ सदस्यों की ड्राफ्टिंग कमेटी ने संविधान का मसौदा तैयार किया। बार एसोसिएशन के संविधान को नौ भागों में विभाजित किया गया है। इसमें 38 अनुच्छेद और 14 नियम बनाए गए हैं। संविधान के तहत केवल वही अधिवक्ता सदस्य बन सकेंगे जिनका नाम पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल की सूची में दर्ज है और जो पानीपत जिले की अदालतों में नियमित रूप से वकालत कर रहे हैं।
संविधान लागू होने से बदल जाएंगे नियम
संविधान लागू होने के बाद बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ने के नियम बदल जाएंगे। अब तक चुनाव लड़ने का कोई नियम नहीं था। अब बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ने का नियम तय कर दिया है। लगातार दो बार ही चुनाव लड़ सकेंगे। तीसरी बार चुनाव लड़ने के लिए कम से कम दो चुनाव छोड़ने होंगे। साथ ही चुनाव में वही लोग वोट डाल पाएंगे तो चुनाव की घोषणा से कम से कम तीन माह पहले सदस्यता ग्रहण करेंगे। वोट डालने के लिए पांच वकालतनामा पर हस्ताक्षर होना अनिवार्य होगा।
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अनुशासन और पारदर्शिता पर जोर
संविधान के तहत किसी सदस्य पर अनुशासनहीनता या संगठन विरोधी गतिविधि का आरोप सिद्ध होने पर उसे दो-तिहाई बहुमत से सदस्यता से हटाया जा सकता है। पुनः सदस्यता केवल कार्यकारिणी की सिफारिश और आम सभा की मंजूरी से ही दी जाएगी। साथ ही संविधान में अधिवक्ताओं के कल्याण का भी ध्यान रखा गया है। अधिवक्ता की मृत्यु पर दो लाख रुपये का क्लेम दिया जाएगा। अब तक एक लाख रुपये का क्लेम दिया जाता था।
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चुनाव लड़ने के लिए अनुभव
प्रधान पद - 10 साल
उप प्रधान- 5 साल
सचिव- 5 साल
सह-सचिव- 3 साल
कोषाध्यक्ष- 3 साल
पानीपत। जिला बार एसोसिएशन की ओर से अपना नया संविधान तैयार किया गया है। आठ सदस्यों की ड्राफ्टिंग कमेटी ने संविधान का मसौदा तैयार किया है जिसमें अधिवक्ताओं के वोट डालने से चुनाव लड़ने तक के नियमों में बदलाव किया जाएगा। लगातार दो चुनाव लड़ने के बाद तीसरी बार चुनाव लड़ने के लिए कम से कम दो चुनाव छोड़ने होंगे। वहीं वोट डालने के लिए भी कम से कम पांच वकालतनामा पर हस्ताक्षर जरूरी होंगे। वीरवार को संविधान पर बार एसोसिएशन की बैठक में आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। इसके बाद संविधान लागू कर दिया जाएगा।
पानीपत बार एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र दुहन ने बताया अभी द डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, पानीपत का कोई लिखित संविधान नहीं था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से एक सितंबर 2014 के आदेश पर बार काउंसिल की ओर से बनाए गए नियमों से ही काम चल रहा था जिस कारण बार एसोसिएशन का लिखित संविधान तैयार किया गया है। आठ सदस्यों की ड्राफ्टिंग कमेटी ने संविधान का मसौदा तैयार किया। बार एसोसिएशन के संविधान को नौ भागों में विभाजित किया गया है। इसमें 38 अनुच्छेद और 14 नियम बनाए गए हैं। संविधान के तहत केवल वही अधिवक्ता सदस्य बन सकेंगे जिनका नाम पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल की सूची में दर्ज है और जो पानीपत जिले की अदालतों में नियमित रूप से वकालत कर रहे हैं।
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संविधान लागू होने से बदल जाएंगे नियम
संविधान लागू होने के बाद बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ने के नियम बदल जाएंगे। अब तक चुनाव लड़ने का कोई नियम नहीं था। अब बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ने का नियम तय कर दिया है। लगातार दो बार ही चुनाव लड़ सकेंगे। तीसरी बार चुनाव लड़ने के लिए कम से कम दो चुनाव छोड़ने होंगे। साथ ही चुनाव में वही लोग वोट डाल पाएंगे तो चुनाव की घोषणा से कम से कम तीन माह पहले सदस्यता ग्रहण करेंगे। वोट डालने के लिए पांच वकालतनामा पर हस्ताक्षर होना अनिवार्य होगा।
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अनुशासन और पारदर्शिता पर जोर
संविधान के तहत किसी सदस्य पर अनुशासनहीनता या संगठन विरोधी गतिविधि का आरोप सिद्ध होने पर उसे दो-तिहाई बहुमत से सदस्यता से हटाया जा सकता है। पुनः सदस्यता केवल कार्यकारिणी की सिफारिश और आम सभा की मंजूरी से ही दी जाएगी। साथ ही संविधान में अधिवक्ताओं के कल्याण का भी ध्यान रखा गया है। अधिवक्ता की मृत्यु पर दो लाख रुपये का क्लेम दिया जाएगा। अब तक एक लाख रुपये का क्लेम दिया जाता था।
चुनाव लड़ने के लिए अनुभव
प्रधान पद - 10 साल
उप प्रधान- 5 साल
सचिव- 5 साल
सह-सचिव- 3 साल
कोषाध्यक्ष- 3 साल