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समालखा मंडी में बारिश में भीगा हजारों क्विंटल धान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 11:33 PM IST
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Thousands of quintals of paddy soaked in rain in Samalkha Mandi
समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण भीगे धान उठाते हुए श्रमिक। - फोटो : Panipat
अनाज मंडी समालखा में सोमवार की रात हुई बारिश ने किसानों का नुकसान कर दिया। मंडी में खुले में पड़ी हजारों क्विंटल धान की फसल भीग गई। मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम इस कदर रहा कि मार्केट कमेटी धान को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल तक मुहैया नहीं करा पाई। ऊपर से मार्केट कमेटी का तर्क है कि इतनी ज्यादा फसल थी तो आढ़ती तिरपाल कहां से लाते।
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नई अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद नहीं होने पर किसानों का कहना था कि एक तो खरीद शुरू होने के बावजूद धान की खरीद नहीं हो रही है। पहले ही सरकार मार रही है और अब बारिश ने भी मार दी है। सोमवार रात सवा 11 बजे पहले आंधी और उसके 15 मिनट बाद हुई बारिश ने किसानों की समस्या को दोगुना कर दिया। खुले में रखी हुई किसानों की फसल भीग गई। जिसके बिकने की किसान कई दिनों से राह देख रहा था। बारिश और आंधी से फसल को बचाने के लिए कुछ किसान तो अपने आढ़तियों के यहां से तिरपाल ले आए, लेकिन ऐसे किसानों की भी कमी नहीं थी, जिनकी फसल बारिश में भिगती रही और आढ़ती सोते रहे। मंडी में मार्केट कमेटी और आढ़ती के पास तिरपाल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है।
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कभी नमी तो कभी झरने की बात कर टाली जा रही खरीद
किसानों का आरोप है कि खरीद एजेंसी कभी नमी तो कभी झरना नहीं होने की बात कहकर खरीद टाल रही है। पिछले कई दिनों से धक्के खा रहे किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। प्रदेश सरकार ने पहले एक अक्टूबर से खरीद की बात कही थी, जिसके चलते काफी किसान मंडी में धान लेकर पहुंच गए। फिर इसके 11 अक्तूबर किया और विरोध पर तीन अक्तूबर से खरीद शुरू की गई, लेकिन तब से समालखा मंडी में एक दाना भी नहीं खरीदा गया है।
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मार्केट कमेटी सचिव कृष्ण कुमार संतोषजनक जवाब देने की बजाए आढ़तियों का पक्ष लेते नजर आए। उन्होंने कहा कि बारिश आई थी और ज्यादा फसल के लिए आढ़ती तिरपाल कहां से लाते।
कई दिनों से मंडी में किसान, एजेंसी की ना-नुकुर
संजय निवासी गांव पावटी 200 क्विंटल धान, शमेर पावटी 150 क्विंटल, सतीश डिडवाड़ी 125 क्विंटल, प्रवीन डिकाडला 210 क्विंटल धान एक अक्टूबर को मंडी में लेकर पहुंचे थे। वहीं सतपाल चिटिया 200 क्विंटल, जयनारायण गढ़ी केवल 100 क्विंटल, राजेंद्र पावटी 100 क्विंटल, जयपाल चिटिया 75 क्विंटल फसल लेकर कई दिनों से मंडी में हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही।

साफ धान में झरने की क्या जरूरत
मंडी फेस-2 के प्रधान मास्टर प्रेम सिंह ने कहा कि पिछले सीजन में झरना पर एसोसिएशन ने रोक लगाई थी। लेकिन इस बार झरने पर फेस-2 में कोई रोक नहीं है। जो ढेरी साफ है, उसमें झरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। वहीं फेस-1 के प्रधान बलजीत सिंह का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से मिल तय नहीं की गई हैं। बारदाने की भी समस्या है।

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण  धान भीगने से उदास बैठा किसान।

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण धान भीगने से उदास बैठा किसान।- फोटो : Panipat

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण  भीगी धान ।

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण भीगी धान ।- फोटो : Panipat

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण  भीगी धान।

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण भीगी धान।- फोटो : Panipat

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण  भीगी धान को  सुखाने के लिए धान को पलटी मारते हुए

समालखा। समालखा अनाज मंडी में बारिश के कारण भीगी धान को सुखाने के लिए धान को पलटी मारते हुए- फोटो : Panipat

समालखा। प्रदर्शन कर रोष जताते हुए किसान

समालखा। प्रदर्शन कर रोष जताते हुए किसान- फोटो : Panipat

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