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Panipat News: आरके पुरम कॉलोनी के हजारों लोग पेयजल संकट से जूझने को विवश
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पानीपत। वार्ड नंबर 18 की आरके पुरम कॉलोनी में ट्यूबवेल खराब होने से मोहल्ले के ढाई हजार लोग पिछले पांच दिन से को पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। नगर निगम और बिजली निगम के बीच ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने का मामला उलझने के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि बिजली निगम के अधिकारियों ने नगर निगम के अधिकारियों को कई विकल्प दिए हैं ताकि लोगों को जल्द से जल्द पीने के पानी की समस्या से राहत मिल सके।
बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है कि अगर नगर निगम ट्रांसफार्मर शिफ्ट कराने के लिए उन्हें डिपॉजिट एस्टीमेट के ढाई लाख जमा करवा दे तो वे तुंरत प्रभाव से ट्रांसफार्मर को शिफ्ट करवा देंगे। दूसरा विकल्प ये है कि अगर नगर निगम बिजली निगम को सिर्फ ये पत्राचार भी कर दे कि इस डिपॉजिट एस्टीमेट की राशि नगर निगम म्यूनिसिपल टैक्स में एडजस्ट कर दे तो भी बिजली निगम इसे तुंरत प्रभाव से काम को शुरू करवा देगा। अगर ये दोनों काम नगर निगम नहीं करता है तो बिजली निगम खुद नगर निगम को पत्राचार करेगा। इसके बाद रिमांइडर भी भेजेगा। फिर भी नगर निगम ने कदम नहीं उठाया तो बिजली निगम जनहित को देखते हुए इस काम को खुद करेगा। लेकिन इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।
गौरतलब है कि आरके पुरम कॉलोनी में छह फुट चौड़ी सरकारी जमीन पर नगर निगम ने ट्यूबवेल लगाया है। इस जमीन के तीनों ओर मकान और चौथी ओर गली है। इस गली में इस जमीन के साथ बिजली निगम का ट्रांसफार्मर लगा है। यहां लगा ट्यूबवेल पिछले पांच दिन से खराब है। इसकी मोटर बदलवाने के लिए चेन कुप्पी तक लगाने की जगह नहीं बची। लोगों ने बिजली निगम से इस ट्रांसफार्मर को हटवाने की डिमांड की तो बिजली निगम ने इसके लिए ढाई लाख रुपये का डिपोजिट एस्टीमेट बना दिया है। अब इस एस्टीमेट को नगर निगम जमा नहीं करा पाया। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। इस समाचार को अमर उजाला ने अपने 22 मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। हालांकि समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर निगम के अधिकारियों में इसे लेकर हलचल तो हुई है लेकिन अभी तक नगर निगम की ओर से बिजली निगम को पत्राचार नहीं किया गया है।
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इस संबंध में निवर्तमान पार्षद बलराम मकौल का कहना है कि लोगों की समस्या देखते हुए वे कई बार नगर निगम अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं लेकिन अधिकारी इस पर कोई सुनवाई नहीं कर रहे। अब वे पहले नगर निगम के अधिकारियों से मिलकर बिजली निगम को पत्राचार कराएंगे। यहां से बात नहीं बनी तो बिजली निगम में इसकी फरियाद लगाएंगे।
वहीं, बिजली निगम के सिटी डिवीजन के एक्सईएन विशाल गोयत का कहना है कि अगर नगर निगम डिपॉजिट एस्टीमेट जमा नहीं कराता तो इस पर बिजली निगम संज्ञान लेगा और जनहित में ट्रांसफार्मर शिफ्ट करवाने का काम करेगा।
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बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है कि अगर नगर निगम ट्रांसफार्मर शिफ्ट कराने के लिए उन्हें डिपॉजिट एस्टीमेट के ढाई लाख जमा करवा दे तो वे तुंरत प्रभाव से ट्रांसफार्मर को शिफ्ट करवा देंगे। दूसरा विकल्प ये है कि अगर नगर निगम बिजली निगम को सिर्फ ये पत्राचार भी कर दे कि इस डिपॉजिट एस्टीमेट की राशि नगर निगम म्यूनिसिपल टैक्स में एडजस्ट कर दे तो भी बिजली निगम इसे तुंरत प्रभाव से काम को शुरू करवा देगा। अगर ये दोनों काम नगर निगम नहीं करता है तो बिजली निगम खुद नगर निगम को पत्राचार करेगा। इसके बाद रिमांइडर भी भेजेगा। फिर भी नगर निगम ने कदम नहीं उठाया तो बिजली निगम जनहित को देखते हुए इस काम को खुद करेगा। लेकिन इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।
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गौरतलब है कि आरके पुरम कॉलोनी में छह फुट चौड़ी सरकारी जमीन पर नगर निगम ने ट्यूबवेल लगाया है। इस जमीन के तीनों ओर मकान और चौथी ओर गली है। इस गली में इस जमीन के साथ बिजली निगम का ट्रांसफार्मर लगा है। यहां लगा ट्यूबवेल पिछले पांच दिन से खराब है। इसकी मोटर बदलवाने के लिए चेन कुप्पी तक लगाने की जगह नहीं बची। लोगों ने बिजली निगम से इस ट्रांसफार्मर को हटवाने की डिमांड की तो बिजली निगम ने इसके लिए ढाई लाख रुपये का डिपोजिट एस्टीमेट बना दिया है। अब इस एस्टीमेट को नगर निगम जमा नहीं करा पाया। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। इस समाचार को अमर उजाला ने अपने 22 मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। हालांकि समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर निगम के अधिकारियों में इसे लेकर हलचल तो हुई है लेकिन अभी तक नगर निगम की ओर से बिजली निगम को पत्राचार नहीं किया गया है।
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इस संबंध में निवर्तमान पार्षद बलराम मकौल का कहना है कि लोगों की समस्या देखते हुए वे कई बार नगर निगम अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं लेकिन अधिकारी इस पर कोई सुनवाई नहीं कर रहे। अब वे पहले नगर निगम के अधिकारियों से मिलकर बिजली निगम को पत्राचार कराएंगे। यहां से बात नहीं बनी तो बिजली निगम में इसकी फरियाद लगाएंगे।
वहीं, बिजली निगम के सिटी डिवीजन के एक्सईएन विशाल गोयत का कहना है कि अगर नगर निगम डिपॉजिट एस्टीमेट जमा नहीं कराता तो इस पर बिजली निगम संज्ञान लेगा और जनहित में ट्रांसफार्मर शिफ्ट करवाने का काम करेगा।